फेसबुक के अजीबो-गरीब प्रयोग पर खफा हुए यूजर्स

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कैलिफोर्निया। सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक ने अपने सात लाख यूजर्स की जानकारी के बिना उनके साथ जो साइकोलॉजिकल टेस्‍ट्स किए हैं उसकी वजह से पूरी दुनिया में उसकी खूब आलोचना हो रही है।

फेसबुक के इस टेस्ट के तहत फेसबुक ने लोगों की न्यूज फीड में गड़बड़ी की और तय किया कि यूजर्स किस तरह के इमोशनल मैसेजेस देखें।

फेसबुक की ओर से यह रिसर्च दो अमेरिकी विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर किया गया था जिसका मकसद यह देखना था कि ‘क्या एक निश्चित तरह के भावनात्मक संदेश देखने पर क्या बाकी लोगों के पोस्ट करने का तरीका बदल जाता है।'

अब इस टेस्‍ट पर फेसबुक की ओर से सफाई देकर कहा गया है कि उसने किसी भी यूजर के बारे में आवश्यक रुप से जानकारी नहीं जुटाई है।

फेसबुक की ओर से दिए गए बयान के मुताबिक 'जो भी आकड़े हैं वे किसी एक व्यक्ति विशेष के फेसबुक अकाउंट से जुड़े हुए नहीं हैं।'

इस रिसर्च में फेसबुक ने यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया और कॉरनेल यूनिवर्सिटी को शामिल किया था।

कई लोगों ने रिसर्च के तरीकों पर सवाल उठाए हैं और पूछा है कि इस तरह की रिसर्च का क्या प्रभाव होगा। पूरी दुनिया में फेसबुक की इस रिसर्च को लेकर बवाल मचा हुआ है।

यूजर्स को समझ में नहीं आ रहा है कि कैसे फेसबुक उनकी न्‍यूज फीड के साथ खिलवाड़ कर सकती है।

इस बीच ब्रिटेन की लेबर पार्टी के सांसद जिम सेरिडान ने इस मामले में जांच की मांग की है।

जिम ने बीबीसी को दिए एक बयान में कहा है कि ये बहुत ताकतवर चीज है और अगर लोगों को बचाने के लिए कोई कानून नहीं है तो कानून होने चाहिए।

वहीं ब्रिटिश न्‍यूजपेपर गार्जियन ने सेरिडान के हवाले से लिखा है कि अब समय आ गया है जब एक सख्‍त कानून की जरूरत दुनिया भर के लाखों लोगों को है।

फेसबुक की ओर से जो रिसर्च की गई थी उसकी रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन लोगों की न्यूज फीड में नेगेटिव पोस्ट आती हैं उनमें नेगेटिव पोस्ट लिखने की प्रवृत्ति उस समय कम हो जाती है।

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