हमास से जंग के बीच इजराइल जाएंगे 6,000 भारतीय, यहूदी देश में मजदूरों की क्यों हो रही बंपर हायरिंग?
इजराइल-हमास जंग 7 अक्टूबर से जारी है। इस जंग में हजारों लोगों की मौत हो गई है। इस जंग के कारण इजराइल से विदेशी श्रमिकों का पलायन शुरू हो गया जिसकी वजह से देश में श्रमिकों की काफी कमी हो गई है। श्रमिकों के लिए इजराइल अपने मित्र देशों पर निर्भर हो गया है।
इस संघर्ष के बीच श्रमिकों की कमी को पूरा करने में मदद करने के लिए 6,000 से अधिक भारतीय कामगार अप्रैल और मई के दौरान इजराइल पहुंचेंगे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिसंबर में करीब 800 से ज्यादा भारतीय नौकरी के लिए इजराइल पहुंचे थे। इनमें से ज्यादातर केरल, तमिलनाडु, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश के थे।

इजराइल सरकार ने बुधवार देर रात बयान जारी कर इसकी जानकारी दी है। इस बयान में कहा गया है कि इजराइली प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ), वित्त मंत्रालय और निर्माण और आवास मंत्रालय द्वारा चार्टर उड़ानों पर सब्सिडी देने के निर्णय के बाद श्रमिकों को एयर शटल से इजराइल लाने के फैसले पर मुहर लगी है।
6 हजार भारतीयों के इजराइल पहुंचने वाले फैसले पर इजराइली सरकार ने कहा, "यह इजराइल में कंस्ट्रक्शन सेक्टर के लिए कम समय में पहुंचने वाले विदेशी श्रमिकों की सबसे बड़ी संख्या है।" आपको बता दें कि युद्ध से पहले इजराइल में लगभग 1 लाख मजदूर गाजा और वेस्ट बैंक के थे। लेकिन जंग शुरू होने के बाद इन मजदूरों का वर्किंग परमिट कैंसिल हो गया। इससे इजराइल में मजदूरों की भारी कमी हो गई, जिस वजह से कई परियोजनाएं रुक गई।
आपको बता दें कि 2023 में इजराइल और भारत के बीच लेबर फोर्स को लेकर एक समझौता हुआ था। इसके तहत 42 हजार भारतीय कामगार इजराइल में काम करने जाने वाले थे। दिसंबर में जंग को लेकर इजराइली पीएम और पीएम मोदी के बीच फोन पर बातचीत हुई थी। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच भारतीय लेबर को इजराइल भेजने के एग्रीमेंट में तेजी लाने पर सहमति बनी थी।
इससे पहले पिछले मंगलवार को भारत से 64 श्रमिक इजराइल पहुंचे थे। अप्रैल के मध्य तक कुल 850 मजदूर इजराइल पहुंच जाएंगे। इस समय करीब 18,000 भारतीय मजदूर इजराइल में कार्यरत हैं।












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