जासूसी मामला: ब्रिटिश कोर्ट में अमेरिका की जीत, विकीलीक्स संस्थापक जूलियन असांजे के प्रत्यर्पण को मंजूरी
नई दिल्ली, 10 दिसंबर: विकीलीक्स के संस्थापक जूलियन असांजे के प्रत्यर्पण मामले में अमेरिका की जीत हुई है, जहां शुक्रवार को ब्रिटिश अपीलीय अदालत ने निचली अदालत के फैसले को पलट दिया, जिसमें कहा गया था कि असांजे का मानसिक स्वास्थ्य अमेरिकी आपराधिक न्याय प्रणाली का सामना करने के लिए बहुत नाजुक है। अब नए फैसले के बाद उनका प्रत्यर्पण अमेरिका हो सकेगा। उनके ऊपर जो आरोप हैं, उस हिसाब से अमेरिका में उन्हें 175 साल की जेल की सजा हो सकती है।

दरअसल इस साल की शुरुआत में एक निचली अदालत में गुप्त सैन्य दस्तावेजों को प्रकाशित करने के आरोप में सुनवाई हुई। जिसमें असांजे को अमेरिका प्रत्यर्पित करने का अनुरोध किया गया था। हालांकि कोर्ट ने लंबी सुनवाई के बाद इससे इनकार कर दिया। उस दौरान डिस्ट्रिक जज वैनेसा बैरिटसर ने कहा था कि असांजे का मानसिक स्वास्थ्य अमेरिका में सुनवाई के लिए तैयार नहीं है। अगर उनको कठोर अमेरिकी जेल में रखा गया, तो वो सुसाइड भी कर सकते हैं।
इसके बाद अमेरिका ने इस फैसले को अपीलीय अदालत में चुनौती दी, जहां वकील जेम्स लुईस ने कहा कि आरोपी की स्थायी मानसिक बीमारी की कोई मेडिकल हिस्ट्री नहीं है। ऐसे में उनको आसानी से प्रत्यर्पित किया जा सकता है। अमेरिकी अधिकारियों ने ब्रिटिश न्यायाधीशों से कहा है कि अगर वे असांजे के प्रत्यर्पण के लिए सहमत होते हैं, तो वो अपने मूल ऑस्ट्रेलिया में मिलने वाली किसी भी अमेरिकी जेल की सजा काट सकते हैं।
सजा का सता रहा डर?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक असांजे पर जासूसी के 17 आरोप हैं। इसके अलावा विकीलीक्स पर हजारों डेटा, सैन्य दस्तावेज, कंप्यूटर के गलत दुरुपयोग समेत कई आरोप हैं। ऐसे में अमेरिकी कानून के हिसाब से उन्हें 175 साल की जेल हो सकती है। इतने लंबे वक्त तक इंसान तो जिंदा नहीं रहता है, लेकिन ये साफ है कि वो पूरी जिंदगी जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे। इसी वजह से वो प्रत्यर्पण से बचने की कोशिश कर रहे हैं।












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