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America Vs Venezuela: 27 साल से अमेरिका के निशाने पर था वेनेजुएला, ट्रप 1.0 में बढ़ गई थी दुश्मनी, पूरी कहानी

America Vs Venezuela: 3 जनवरी की रात में अमेरिका ने वेनेजुएला पर हवाई हमला कर दिया। इसके साथ ही वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पत्नी समेत गिरफ्तार कर उठवा लिया गया। लेकिन ये कहानी सत्ता, तेल, चुनाव, ड्रग तस्करी और भू-राजनीति की उस लंबी लड़ाई की आख़िरी कड़ी थी, जो सालों से चल रही थी। लेकिन इस लड़ाई में आखिरी चिंगारी साल 2018 में लगी थी।

चैप्टर 1- यही रात अंतिम, यही रात भारी

3 जनवरी 2026 की तड़के, वेनेजुएला की राजधानी काराकास में जोरदार धमाकों की आवाज़ें गूंजीं। आसमान में बेहद नीचे उड़ते लड़ाकू विमान मंडरा रहे थे। कुछ इलाकों में बिजली चली गई, लोग घरों से बाहर निकल आए। कुछ घंटों बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया-अमेरिका ने वेनेजुएला पर "बड़े पैमाने पर हमला" किया है और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़कर देश से बाहर भेज दिया गया है।

America Vs Venezuela

यह हमला 1989 में पनामा पर हुए अमेरिकी आक्रमण के बाद लैटिन अमेरिका में सबसे बड़ा और सीधा सैन्य दखल था। तब तानाशाह मैनुअल नोरिएगा को ड्रग तस्करी के आरोप में अमेरिका ले जाया गया था। अब वही कहानी, नए किरदार के साथ दोहराई गई।

चैप्टर 2- तेल का खेल

वेनेजुएला दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडारों में से एक पर बैठा देश है। खासकर यहां का अत्यधिक भारी कच्चा तेल (Heavy Crude Oil) अमेरिका की रिफाइनरियों के लिए बेहद उपयोगी है। पिछले 25 सालों से यहां समाजवादी सरकार रही है, जिसने खुद को अमेरिका के खिलाफ खड़ा किया। 1999 से ही अमेरिका और वेनेजुएला के रिश्ते तेल को लेकर गर्म होते गए। जिसमें साल 2013 में ह्यूगो शावेज़ की मौत के बाद निकोलस मादुरो राष्ट्रपति बने। शावेज़ ने जिस समाजवादी विचारधारा-चाविस्मो-की नींव रखी थी, मादुरो को वही विरासत मिली। साथ ही मिला अमेरिका के प्रति गहरा अविश्वास।

चैप्टर 3- ड्रग स्टेट वेनेजुएला

अमेरिका लंबे समय से मादुरो सरकार पर आरोप लगाता रहा है कि वेनेजुएला एक "नार्को-स्टेट" बन चुका है, यानी ऐसा देश जिसकी सत्ता ड्रग तस्करी से जुड़ी है। मादुरो ने इन आरोपों को हमेशा अमेरिकी साजिश बताया। लेकिन अमेरिका की नजर ड्रग की आड़ में वेनेजुएला के तेल पर रही। अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) के मुताबिक वेनेजुएला के पास 303 अरब बैरल कच्चा तेल है-जो दुनिया के कुल तेल भंडार का करीब 20% है। हालांकि भारी तेल को निकालना और प्रोसेस करना महंगा है, लेकिन इसका रणनीतिक महत्व बहुत बड़ा है। जिसके हाथ ये लगता है वह राजा बनेगा ही बनेगा। इसमें अमेरिका के कान तब खड़े हुए जब OPEC के आंकड़ों में ये बात आई कि 2025 में वेनेजुएला का तेल निर्यात बढ़कर 9 लाख बैरल प्रति दिन हो गया। ये आंकड़ा 2013 के मुकाबले आधा और 1999 के 35 लाख बैरल प्रतिदिन के स्तर से बहुत कम है।

चैप्टर 4- अमेरिकी लालच

वेनेजुएला के पास 5.5 ट्रिलियन क्यूबिक मीटर प्राकृतिक गैस है-जो दक्षिण अमेरिका के कुल भंडार का 73% है। इसके अलावा ओरिनोको माइनिंग आर्क में सोना और कोल्टन है, लेकिन यहां अवैध खनन और सशस्त्र गिरोहों का कब्जा है। इनसे लड़ने के लिए वेनेजुएला के पास पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। कहा ये भी जाता है कि माइनिंग वाले गिरोहों की वेनेजुएला सरकार के साथ मिलीभगत है, इसलिए कोई भी सरकार इनपर नकेल कसना ही नहीं चाहती। पर अमेरिका के लिए यहां कंट्रोल करना और इन गिरोहों का सफाया करना बाएं हाथ का खेल है।

चैप्टर 5- दुश्मन का दोस्त= दुश्मन

2024 में अमेरिका ने प्रतिबंध कड़े किए। इसके बाद वेनेजुएला का तेल चीन, रूस, भारत और तुर्की को जाने लगा। इससे वॉशिंगटन में चिंता बढ़ी कि प्रतिबंध अब असरदार नहीं रहे। जिसमें रूस और चीन अमेरिका के सीधे कॉम्प्टीटर हैं जबकि भारत के साथ भी रिश्तों में ट्रंप के आने से खटास आई है। अमेरिका का कहना है कि तेल से आने वाला पैसा मादुरो सरकार दमन और अपराधों में इस्तेमाल कर रही थी। वहीं मादुरो कहते रहे कि अमेरिका असल में वेनेजुएला के संसाधनों पर कब्जा चाहता है।

चैप्टर 6- तू चोर, मैं सिपाही

मार्च 2020 में अमेरिका ने मादुरो पर "नार्को-टेररिज्म" का आरोप लगाया। कहा गया कि वह कार्टेल डे लॉस सोलेस नाम के ड्रग नेटवर्क के मुखिया हैं और अमेरिका में कोकीन भेजते हैं। इसके बाद अमेरिका ने मादुरो को एक राष्ट्राध्यक्ष नहीं, बल्कि अपराधी की तरह ट्रीट करना शुरू किया और खुद को अपराध के खिलाफ लड़ने वाले योद्धा के तौर पर पेश किया। यही आरोप आगे चलकर सैन्य कार्रवाई का आधार बने। जुलाई 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में मादुरो को विजेता घोषित किया गया, लेकिन विपक्ष ने भारी धांधली का आरोप लगाया। अमेरिका और कई देशों ने नतीजों को मानने से इनकार कर दिया।

चैप्टर 6- दुश्मन का दुश्मन= दोस्त

मादुरो 2024 में निर्दलीय उम्मीदवार एडमंडो गोंज़ालेज़ को हराकर फिर से चुने गए। वेनेजुएला में मुख्य विपक्षी नेता और मादुरो की धुर विरोधी मारिया कोरिना मचाडो को चुनाव लड़ने से न सिर्फ रोका गया, बल्कि उनके पीछे पूरी सरकारी मशीनरी लगा दी गई। लिहाजा मचाडो को वेनेजुएला के सुप्रीम कोर्ट द्वारा गुएदो के साथ एक "भ्रष्टाचार की साजिश" में शामिल होने का दोषी घोषित किया गया। जिसके बाद न सिर्फ उनके चुनाव लड़ने पर रोक लगाई, बल्कि माहौल ऐसा बना कि उन्हें अपना देश वेनेजुएला ही छोड़ना पड़ा। कई अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह मामला मनगढ़ंत था। इसके बाद पूरा माहौल बनाकर उन्हें वेनेजुएला छोड़ने पर मजबूर किया गया। लेकिन जब अक्टूबर 2025 में उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार मिला तो उनका अंतरराष्ट्रीय समर्थन और बढ़ गया। इसके बाद ट्रंप ने मादुरो पर लोकतंत्र का गला घोंटने के आरोप और तेज कर दिए।

चैप्टर 7- वापसी, ऐलान और बदला

ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में अमेरिका ने मादुरो पर $50 मिलियन का इनाम रखा। गैंग ट्रेन डे अरागुआ को एक आतंकवादी संगठन घोषित किया गया। इसके बाद सितंबर 2025 से अमेरिका ने कथित ड्रग नौकाओं पर हमले शुरू किए। जनवरी 2026 तक 35 जहाज नष्ट, 110 से ज्यादा लोग मारे गए। CIA ने वेनेजुएला के एक बंदरगाह पर ड्रोन हमला किया। ये देश के भीतर पहला सीधा अमेरिकी हमला था। कहा जाता है कि इन सभी हमलों की जमीन CIA ने ही तैयार की है।

चैप्टर 8- माहौल और टेस्टिंग

वेनेजुएला पर हमला किया तो क्या असर होगा ये देखने के लिए अमेरिका ने दुनिया का सबसे बड़ा विमानवाहक पोत, 15,000 सैनिक और लड़ाकू विमान तैनात किए। फिर कई देशों से रिएक्शन आने का इंतजार किया। जब लगा मादुरो या वेनेजुएला के पक्ष में कोई मजबूत प्लेयर नहीं है तो फिर एक्शन को हरी झंडी दिखाई गई। दशकों में यह पहली बार था जब अमेरिका ने इतने बड़े पैमाने पर सैनिक उतारे हों।

चैप्टर 9- हमला, निंदा और नया निजाम

काराकास, मिरांडा, अरागुआ और ला ग्वायरा में धमाके हुए। 21 साल की कार्मेन हिडाल्गो ने कहा, "पूरी जमीन हिल गई, हवा भी मार रही थी।" कुछ घंटों बाद ट्रंप ने घोषणा की-मादुरो और उनकी पत्नी अमेरिकी हिरासत में हैं और अमेरिका लाए गए हैं। हमले के बाद दुनिया से रिएक्शन आना शुरू हुए। क्यूबा, ईरान और रूस ने हमले की निंदा की। अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर माइली ने ट्रंप की तारीफ करते हुए कहा, "आजादी अमर रहे।" मादुरो की गिरफ्तारी के बाद वेनेजुएला में सत्ता को लेकर भ्रम है। कानूनन उप-राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज को जिम्मेदारी मिलनी चाहिए, लेकिन हालात साफ नहीं हैं। कुछ हल्कों में मारिया कुरीना मचाडो का नाम भी चल रहा है।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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