UNSC में अमेरिका ने फिलीस्तीन को दिया बहुत बड़ा झटका.. अरब देशों के युद्धविराम के प्रस्ताव पर किया वीटो
America VETO against Israel Resolution: संयुक्त राज्य अमेरिका ने (20 फरवरी) अरब समर्थित संयुक्त राष्ट्र के उस प्रस्ताव को वीटो कर रोक दिया है, जिसमें संकटग्रस्त गाजा पट्टी में इजराइल-हमास युद्ध में तत्काल मानवीय संघर्ष विराम की मांग की गई थी।
यूएन में पेश किए गये प्रस्ताव में गाजा पट्टी में चल रहे संघर्ष को तत्काल रोकने की मांग की गई थी, जिसे अरब देशों की तरफ से पेश किया गया था, लेकिन अमेरिका ने प्रस्ताव को रोककर फिलीस्तीन को बहुत बड़ा झटका दिया है।

अरब देशों के प्रस्ताव को अमेरिका ने रोका
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, जिसमें 15 स्थाई और अस्थाई सदस्य हैं, उसमें 13-1 से फैसला आया है। एक सदस्य देश यूनाइटेड किंगडम वोटिंग से गैर-हाजिर रहा है, जो पिछले चार महीने से ज्यादा समय से चल रहे युद्ध को समाप्त करने के लिए व्यापक वैश्विक समर्थन को दर्शाता है, जो दक्षिणी इजराइल पर हमास के हैरान करने वाले क्रूर हमले के साथ शुरू हुआ था, जिसमें करीब 1,200 लोग मारे गए थे।
गाजा के हमास नियंत्रित स्वास्थ्य मंत्रालय ने दावा किया है, कि 7 अक्टूबर को शुरू हुए इजराइली हमले में अभी तक 29 हजार नागरिक मारे गये हैं, जबकि इजराइल ने 10 हजार से ज्यादा आतंकवादियों को मारने का दावा किया है।
वहीं, यह गाजा में संघर्ष विराम की मांग वाले सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव पर अमेरिका का तीसरा वीटो था।
अरब राष्ट्र, गाजा पट्टी में तत्काल मानवीय संघर्ष विराम की मांग करने वाले संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव पर तब भी मतदान कर रहे हैं, जब वो ये जानते थे, कि अमेरिका उनके प्रस्ताव को वीटो कर रोक देगा। लेकिन, फिर भी वोटिंग आयोजित करवाने का उनका फैसला इजरायल-हमास युद्ध को समाप्त करने के लिए व्यापक वैश्विक समर्थन दिखाने की उम्मीद कर रहे हैं।

वोटिंग के दौरान 15 देशों वाले सुरक्षा परिषद में 13 देशों ने युद्धविराम के पक्ष में वोट डाला, जबकि अमेरिका ने वीटो कर दिया और यूनाइटेड किंगडम वोटिंग से गैरहाजिर रहा।
यूएनएससी में अमेरिकी राजदूत लिंडा थॉमस-ग्रीनफील्ड का कहना था, कि बाइडेन प्रशासन अरब समर्थित प्रस्ताव को वीटो करेगा, क्योंकि यह युद्धरत पक्षों के बीच एक समझौते की व्यवस्था करने के चल रहे अमेरिकी प्रयासों में हस्तक्षेप कर सकता है। अमेरिका का कहना है, कि हमास के कब्जे में अभी भी इजराइली नागरिक हैं और उनकी रिहाई को लेकर कोई बात नहीं की गई थी।
वहीं, एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने बाद में सोमवार को कहा, कि "हम मतदान में जल्दबाजी में विश्वास नहीं करते।" अमेरिकी मसौदे पर परिषद की चर्चा से पहले नाम न छापने की शर्त पर अधिकारी ने कहा, "हम आने वाले दिनों में इस पर गहन बातचीत करने का इरादा रखते हैं। ...इसलिए हम वोट के लिए कोई समयसीमा तय नहीं कर रहे हैं, लेकिन हम स्थिति की तात्कालिकता को पहचानते हैं।''
आपको बता दें, कि संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्य देशों में से ज्यादातर अरब देश संघर्ष विराम की मांग कर रहे हैं, क्योंकि हमास के हमले के जवाब में इजरायल का सैन्य आक्रमण काफी तेजी से जारी है। गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार मारे गए फिलिस्तीनियों की संख्या 29,000 से ज्यादा हो गई है, जिनमें से ज्यादातर बच्चे और महिलाएं हैं।












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