क्या सच में परमाणु युद्ध होने वाला है? US ने भारी मात्रा में खरीदी आयोडीन की गोलियां
अमेरिका ने परमाणु हमले से बचने के लिए भारी मात्रा में एंटी रेडिएशन गोलियां खरीदी हैं। इसके लिए अमेरिका ने 290 मिलियन डॉलर खर्च किए हैं।
अमेरिका ने इस महीने की शुरुआत में भारी मात्रा में एंटी रेडिएशन गोलियां(anti-radiation pills) खरीदी हैं। इसके लिए अमेरिका ने 290 मिलियन डॉलर खर्च किए हैं। अमेरिका के इतिहास में ये पहली बार है जब इतनी भारी मात्रा में एंटी रेडिएशन पिल की खरीदारी हुई है। अमेरिका में जो बाइडेन की सरकार ने कहा है कि इतनी भारी मात्रा में ये गोलियां केमिकल, बायोलॉजिकल, न्यूक्लियर और रेडियोलॉजिकल हमले से बचने के लिए खरीदी गई हैं।

प्रोजेक्ट बायोशील्ड 2004 प्लान के तहत खरीदीं गोलियां
यूएस डिपार्टमेंट फॉर हेल्थ एंड ह्यूमन सर्विसेज (HHS) ने मंगलवार को कहा कि उसने प्रोजेक्ट बायोशील्ड 2004 के तहत आपातकालीन तैयारी के लिए Amgen USA Inc. से एनप्लेट (Nplate) दवा खरीदी है। दरअसल 18 साल पहले जॉर्ज बुश के कार्यकाल में अमेरिकी संसद ने प्रोजेक्ट बायोशील्ड 2004 कानून बनाया था। इस कानून में अगले एक दशक के लिए दवाओं पर 5 बिलियन डॉलर खर्च किए जाने का प्लान तैयार किया गया था।

परमाणु हमले से बचने के लिए किया गया डिजाइन
एनप्लेट (Nplate) को तीव्र विकिरण सिंड्रोम (ARS) से पीड़ित मरीजों के इलाज के लिए डिजाइन किया गया है। ऐसा दावा किया जाता है कि यह दवा परमाणु हमले के बाद होने वाले रेडिएशन से लोगों को बचा सकता है। हालांकि परमाणु हमले में भी यह दवा सौ फीसदी असरदायक नहीं है। बड़े परमाणु हमले में घटनास्थल के कई किलोमीटर के क्षेत्र में किसी जान-माल का बचना असंभव होता है लेकिन छोटे परमाणु हमले जिसमें रेडिएशन लीक हो रहा हो उससे बचने में इसका उपयोग होता है। फिर भी दवा का प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है कि व्यक्ति के शरीर में कितनी मात्रा में रेडियोएक्टिव तत्व प्रवेश कर चुका है।

100 सौ फीसदी असरदायक नहीं है दवा
दरअसल, परमाणु बम के धमाके के बाद हवा में रेडियोऐक्टिव तत्व I-131 तैरने लगता है। यह सांस के जरिए लोगों के शरीर में घुस जाता है। इसकी वजह से थायरॉइड कैंसर, ल्यूकीमिया, मेंटल डिसऑर्डर और गले और शरीर के हिस्सों में ट्यूमर जैसी दिक्कतें होने लगती हैं। यह दवा शरीर में रेडिएक्टिव तत्वों को के खतरे से कुछ हद तक तो बचा लेती है लेकिन बाकी अन्य तरह के रेडिएशन में असरकारक नहीं होती है। हाल में पुतिन और बाइडेन के बयानों के बाद परमाणु जंग को लेकर चर्चा तेज हो गई है। परमाणु हमले से निपटने के लिए अमेरिका के अलावा और भी कई यूरोपीय देश प्रयास में जुट चुके हैं।
कई यूरोपीय देश खरीद रहे दवा
पोलैंड इस युद्ध में यूक्रेन का सबसे बड़ा सहयोगी बनकर उभरा है ऐसे में रूस से सबसे अधिक खतरा इसी देश को है। ऐसे में पोलैंड में भी प्रशासन लोगों को विकिरण से निपटने के लिए आयडीन की गोलियां उपलब्ध कराने में जुट गई हैं। पोलैंड के 16 प्रांतों में पोटाशियम आयोडाइड यानी कि आयोडीन की दवाइयों के विकिरण केंद्र बनाए गए हैं जहां अधिकारी इन दवाओं की आपूर्ति और उनके वितरण से जुड़े काम देख रहे हैं। पोलैंड की राजधानी वारसॉ में, किंडरगार्टन, स्कूलों और नगरपालिका कार्यालयों में 600 से अधिक डिस्ट्रीब्यूशन प्वाइंट स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा ब्रिटेन, फिनलैंड, यूक्रेन आदि यूरोपीय देशों में आयोडीन की गोलियां की मांग बढ़ चुकी है। यूक्रेन में 55 लाख गोलियां भेजी गई हैं। हाल ही में व्लादिमीर पुतिन के बयानों ने इसकी बिक्री बढ़ गई है।

क्या सच में परमाणु हमला होने वाला है?
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने साफ कहा है कि वो कोई गीदड़ भभकी नहीं दे रहे हैं और अपने देश की रक्षा के लिए परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने से जरा भी नहीं चूकेंगे। पुतिन की इस धमकी को अमेरिका ने सीरियस ले लिया है। राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा कि दुनिया आखिरी जंग के करीब पहुंच गई है। बाइडेन के इस बयान से ठीक 5 दिन पहले ही अमेरिका ने Amgen USA Inc से आयोडीन की खरीदारी का ऐलान किया है।
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