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रूस से भारत के तेल खरीदने पर US को ऐतराज नहीं, लेकिन व्हाइट हाउस ने कहा, जब इतिहास लिखा जाएगा....

रूसी तेल कंपनियों ने कच्चे तेल की पुरानी कीमतो पर 25-27 प्रतिशत तक छूट देने का ऑफर दिया है। रूसी तेल कंपनियों ने कहा है कि, 'जो प्रस्ताव दिए गये हैं, वो आकर्षक हैं'।

वॉशिंगटन, मार्च 16: अगर भारत रूस से डिस्काउंट रेट पर कच्चे तेल का आयात करता है, तो वो अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन नहीं माना जाएगा। व्हाइट हाउस ने भारत को रूस से करीब 25 प्रतिशत डिस्काउंट पर तेल खरीदने के ऑफर पर व्हाइट हाउस का बड़ा बयान आया है। कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि, रूस से डिस्काउंट रेट पर तेल खरीदने को लेकर भारत ने इच्छा जताई है।

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    अमेरिका ने क्या कहा?

    अमेरिका ने क्या कहा?

    व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव जेन साकी ने मंगलवार को अपने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान रिपोर्टर्स से बात करके हुए कहा है कि, "किसी भी देश के लिए हमारा संदेश यह है, कि हमने जो प्रतिबंध लगाए हैं, हम सभी उन प्रतिबंधों का पालन करें, जो अनुशंसित हैं।" वहीं, जब भारत द्वारा रियायती कच्चे तेल की रूसी पेशकश को स्वीकार करने की संभावना के बारे में एक रिपोर्ट के बारे में पूछा गया, तो व्हाइट हाउस प्रवक्ता ने कहा कि, "मुझे नहीं लगता कि यह (प्रतिबंधों) का उल्लंघन होगा।"

    जब इतिहास लिखा जाएगा....

    हालांकि, व्हाइट हाउस की तरफ से आगे कहा गया कि, "लेकिन यह भी सोचें कि जब इतिहास की किताबें इस वक्त के बारे में लिखा जाएगा, तो आप कहां खड़ा होना चाहते हैं? रूसी नेतृत्व के लिए समर्थन एक आक्रमण के लिए समर्थन है, जो स्पष्ट रूप से विनाशकारी प्रभाव डाल रहा है''। आपको बता दें कि, भारत ने यूक्रेन पर रूसी आक्रमण का समर्थन नहीं किया है। नई दिल्ली ने लगातार सभी हितधारकों से बातचीत के जरिए मतभेदों को सुलझाने की अपील की है। हालांकि, इसने रूस के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र के सभी प्रस्तावों में वोटिंग में गैर-हाजिर रहने का विकल्प चुना।

    अमेरिकी सांसदों को भारत से निराशा...

    अमेरिकी सांसदों को भारत से निराशा...

    हालांकि, बाइडेन प्रशासन के अधिकारियों ने रूस को लेकर भारत की मौजूदा स्थिति पर अपनी समझ दिखाई है और बाइडेन प्रशासन के कई सांसद ने भी कहा है, कि नई दिल्ली अफनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए रूसी सैन्य आपूर्ति पर एक बड़ी निर्भरता रखता है। लेकिन, हालांकि, भारतीय-अमेरिकी कांग्रेसी डॉ अमी बेरा ने उन खबरों पर निराशा व्यक्त है, की कि भारत भारी छूट वाली दर पर रूसी तेल खरीदने पर विचार कर रहा है। उन्होंने कहा कि, ‘'यदि रिपोर्ट सही है और भारत रियायती मूल्य पर रूसी तेल खरीदने का यह फैसला लेता है, तो नई दिल्ली इतिहास के इस महत्वपूर्ण पल पर, जब रूस ने यूक्रेन पर हमला किया है और जब दुनियाभर के लोगों ने यूक्रेन का समर्थन किया है, तब भारत को रूसे के घातक आक्रमण का समर्थन माना जाएगा''। बेरा ने एक बयान में कहा, "दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र और क्वाड के नेता के रूप में, भारत की जिम्मेदारी है कि वह यह सुनिश्चित करे कि उसके कार्य प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पुतिन और उनके आक्रमण का समर्थन न करें।"

    रूस से तेल खरीद सकता है भारत

    रूस से तेल खरीद सकता है भारत

    डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत, जो अपनी जरूरत का 80 प्रतिशत तेल आयात करता है, आमतौर पर रूस से लगभग 1 प्रतिशत ही खरीदता है। लेकिन इस साल भारत में तेल की कीमतों में अभी तक 40 प्रतिशत तक का इजाफा हो चुका है और भारत सरकार के लिए तेल की कीमतों पर कमी करना एक बड़ी चुनौती है, लिहाजा भारत सरकार भारी छूट पर रूस से कच्चे तेल का आयात करने पर विचार कर रही है और भारत सरकार की कोशिश रूस से भारी डिस्काउंट पर कच्चा तेल खरीदकर तेल की घरेलू कीमतों में कमी लाने की कोशिश होगी। डेली मेल की रिपोर्ट के अनुसार, भारत सरकार के एक अधिकारी ने कहा कि, 'रूस हमें भारी छूट पर तेल और अन्य वस्तुओं की पेशकश कर रहा है और हमें इसे लेने में खुशी होगी।' हालांकि, भारतीय अधिकारी ने यह नहीं बताया कि, भारत सरकार रूस से कितनी मात्रा में तेल खरीदेगी।

    भारत को 25 प्रतिशत का डिस्काउंट

    भारत को 25 प्रतिशत का डिस्काउंट

    बिजनेस स्टैंडर्ट अखबार ने सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि, रूसी तेल कंपनियों ने कच्चे तेल की पुरानी कीमतो पर 25-27 प्रतिशत तक छूट देने का ऑफर दिया है। रूसी तेल कंपनियों ने कहा है कि, 'जो प्रस्ताव दिए गये हैं, वो आकर्षक हैं'। लेकिन, भारत के लिए रूसी तेल कंपनियों से मिल इस ऑफर का फायदा उठाना आसान नहीं है। जबकि, रूस पर लगे प्रतिबंधों के बाद भारत के लिए रूस से तेल आयात करना अब आसान नहीं रहा है, क्योंकि यूक्रेन संकट में भारत की 'तटस्थ' नीति के चलते अमेरिका और पश्चिमी देशों का भारी प्रेशर भारत पर है और भारत सरकार की तरफ से भी रूस से तेल खरीदने पर कई मजबूरियों की बात कही गई है।

    भारत के फैसले पर पश्चिमी देशों का रूख

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    इंडो-पैसिफिक सिक्योरिटी अफेयर्स के लिए यूएस असिस्टेंट सेक्रेटरी ऑफ डिफेंस, एली रैटनर ने पिछले हफ्ते अमेरिकी कांग्रेस की सुनवाई में कहा था कि, भारत अपने रक्षा आपूर्तिकर्ताओं में विविधता ला रहा है। उन्होंने कहा कि, 'हम मानते हैं कि भारत का रूस के साथ एक जटिल इतिहास और संबंध है। वे जो हथियार खरीदते हैं उनमें से अधिकांश रूस के हैं। अच्छी खबर यह है कि वे रूस से अलागा भी अब अलग अलग देशों से हथियार खरीदने की प्रक्रिया में विविधता ला रहे हैं, लेकिन इसमें कुछ समय लगने वाला है। लेकिन वे स्पष्ट रूप से ऐसा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जिसमें उनके अपने रक्षा उद्योग का स्वदेशीकरण भी शामिल है और इसका हमें समर्थन करना चाहिए।' वहीं, ब्रिटिश विदेश मंत्री लिज़ ट्रस ने भी पिछले सप्ताह कहा था, कि लंदन को रूस पर अपनी निर्भरता कम करने में मदद करने के लिए भारत के साथ घनिष्ठ आर्थिक और रक्षा संबंधों को आगे बढ़ाने की जरूरत है।

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