अमेरिका ने अफगानिस्तानी बैंक के अरबों डॉलर किए जब्त, बाइडेन ने तालिबान को दिया बहुत बड़ा झटका
अमेरिका ने कहा है कि वो तालिबान की सरकार को मान्यता नहीं देगा और इसके साथ ही अफगानिस्तान सरकार की अमेरिका में स्थिति सारी संपत्ति और अमेरिकन बैंक में रखे सारे पैसों को फ्रीज कर दिया है।
वॉशिंगटन, अगस्त 18: तालिबान ने भले ही अफगानिस्तान में नई सरकार बनाने की कवायद शुरू कर दी हो, लेकिन उसे अमेरिका की तरफ से बहुत बड़ा झटका लगा है। एक तरफ पाकिस्तान और चीन ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से अफगानिस्तान को आर्थिक मदद देने की अपील की है तो दूसरी तरफ अमेरिका ने अफगानिस्तान के 'खजाने' को जब्त कर लिया है।

तालिबान को बहुत बड़ा झटका
अमेरिका ने कहा है कि वो तालिबान की सरकार को मान्यता नहीं देगा और इसके साथ ही अफगानिस्तान सरकार की अमेरिका में स्थिति सारी संपत्ति और अमेरिकन बैंक में रखे सारे पैसों को फ्रीज कर दिया है। यानि, अब अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार जब बन जाएगी तो तालिबान के लोग अमेरिकी बैंक में रखे रुपयों का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। बाइडेन प्रशासन के एक अधिकारी ने अलजजीरा को इसकी पुष्टि कर दी है। अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबकि, अमेरिकी बैंकों में अफगान सरकार के 9.5 अरब डॉलर की संपत्ति को फ्रीज कर दिया गया है। इसके साथ ही अमेरिका ने अफगानिस्तान को नकदी के शिपमेंट को भी रोकने का फैसला किया है। जो बाइडेन प्रशासन ने साफ कर दिया है कि अमेरिका में अफगान सरकार की कोई भी केंद्रीय बैंक संपत्ति तालिबान के लिए उपलब्ध नहीं होगी और सरकार की सारी संपत्ति को ट्रेजरी विभाग ने फ्रीज कर दिया है।

9.5 अरब डॉलर की संपत्ति फ्रीज
अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, अफगानिस्तान की केंद्रीय बैंक द अफगान बैंक के कार्यवाहक प्रमुख अजमल अहमदी ने सोमवार सुबह इस बाबत ट्वीट किया था और उन्होंने कहा कि अभी अभी पता चला है कि अमेरिका ने अफगानिस्तान को डॉलर का शिपमेंट रोक दिया है। द अफगान बैंक के एक्टिंग गवर्नर के मुताबिक बैंक का करीब 9.5 अरब डॉलर की संपत्ति न्यूयॉर्क फेडरल रिजर्व और अमेरिका के दूसरे वित्तीय संस्थानों में जमा है, जिसे अमेरिका ने फ्रीज कर दिया है। अमेरिकी प्रशासन ने कहा है कि तालिबान की सरकार उस पैसों का इस्तेमाल नहीं कर सकती है।

अमेरिका के पास ज्यादातर संपत्ति
तालिबान पर अमेरिकी प्रतिबंधों का मतलब है, कि तालिबान किसी भी धन का उपयोग नहीं कर सकते। मामले से परिचित दो विशेषज्ञों के मुताबिक, द बैंक ऑफ अफगानिस्तान की ज्यादातर संपत्ति अफगानिस्तान में है ही नहीं। वहीं, अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। लेकिन, अमेरिका का ये फैसला तालिबान की सरकार के लिए बहुत बड़ा झटका होगा, क्योंकि बिना पैसा तालिबान के लिए सरकार चलाना नामुकिन हो जाएगा। सवाल ये भी हैं कि आखिर तालिबान की सरकार देश के कर्मचारियों को सैलरी कहां से देगी, इसके अलावा सरकार के सौ खर्च होते हैं, वो कहां से आएगा।

...तो इसीलिए पाकिस्तान ने मांगा आर्थिक मदद
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान और विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कल अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से अफगानिस्तान के लोगों से मदद की अपील की है। पहले तो लगा कि तालिबान की मदद के लिए इमरान खान का ये कोई नया पैंतरा है, लेकिन अब पता चल रहा है कि अमेरिकी प्रतिबंध में इमरान खान तालिबान की मदद करना चाहते हैं, लिहाजा उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय संगठनों ने अफगानिस्तान के लोगों की मदद की अपील की है। दरअसल, पाकिस्तान का इरादा तालिबान को एक उदारवादी संगठन साबित करते हुए उसे मान्यता दिलाने की है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा कि ''पाकिस्तान और पूरे क्षेत्र के लिए एक शांतिपूर्ण और स्थिर अफगानिस्तान बेहद महत्वपूर्ण है और वो अफगानिस्तान में बनने वाली समावेशी सरकार का समर्थन करेगा''। इसके लिए पाकिस्तान ने अब अलग अलग देशों से बातचीत कर रहा है। खासकर पाकिस्तान की कोशिश है कि पड़ोसी देश, जैसे ईरान, चीन और तुर्की, जल्द से जल्द तालिबान को कबूल कर लें, और फिर बाकी देशों को मनाने की कोशिश की जाएगी।

पाकिस्तान ने क्यों मागा 'आर्थिक मदद'
पाकिस्तान की सरकार किसी भी हाल में तालिबान की मदद करना चाहती है। जिसके लिए शाह महमूद कुरैशी ने अफगानिस्तान के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से सहायता देने की मांग करते हुए आर्थिक सहायता देने की मांग की है''। विदेश मामलों के जानकारों का कहना है कि अफगानिस्तान में सरकार चलाने के लिए तालिबान को काफी ज्यादा पैसों की जरूरत होनी है और पाकिस्तान खुद कंगाली के दौर से गुजर रहा है और चीन ने आर्थिक मदद देने से मना कर दिया है, लिहाजा पाकिस्तान ने तालिबान की पैरवी अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से करनी शुरू कर दी है और अफगानिस्तान के लिए पैसे मांगना, पाकिस्तान के उसी ग्रेट प्लान का एक हिस्सा है। पाकिस्तानी अखबार के मुताबिक, कुरैशी और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच फोन कॉल अफगानिस्तान की स्थिति पर एक क्षेत्रीय सहमति बनाने की पाकिस्तान की कोशिश है। दरअसल, पाकिस्तान की कोशिश है कि वो अकेले नहीं, बल्कि कई देशों के साथ मिलकर तालिबान को मान्यता, ताकि सिर्फ उसपर ऊंगली ना उठे।












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