UAE के हिन्दू मंदिर में मुस्लिम, ईसाई, पारसी, बौध और जैन धर्म का अद्भुत कनेक्शन, जानकर आप हैरान हो जाएंगे
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की राजधानी अबू धाबी में पहला हिंदू मंदिर बनकर तैयार हो गया है। इस मंदिर का निर्माण बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण (BAPS) ने करवाया है। बुधवार को इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया।
700 करोड़ रुपये की लागत से बना ये मंदिर अपने आप में सर्वधर्म समभाव की अद्भुत मिसाल है। यह मंदिर भले ही हिंदू धर्म का है, मगर इसके बनने में हर धर्म का योगदान है। चाहे वह मुस्लिम धर्म हो, ईसाई धर्म हो, पारसी हो, या फिर जैन और बौध... हर धर्म से इसका गहरा नाता है।

अबू धाबी का यह पहला हिंदू मंदिर सह-अस्तित्व के विचार का प्रतिनिधित्व करता है। ये मंदिर एक मुस्लिम देश में बना है और इसे बनाने के लिए मुस्लिम शासक ने जमीन दान की है। इस मंदिर का मुख्य वास्तुकार एक कैथोलिक ईसाई रहा है। वहीं डायरेक्टर एक जैन धर्म को मनाने वाला व्यक्ति है।
इतना ही नहीं, मंदिर का प्रोजेक्ट मैनेजर एक सिख है और फाउंडेशनल डिजाइनर एक बौद्ध धर्मं का व्यक्ति है। इसके साथ ही इस मंदिर को बनाने वाली कंपनी एक पारसी समुदाय के व्यक्ति की है। इस तरह से इस हिंदू मंदिर में हर धर्म के लोगों के प्रतिनिधित्व की झलक दिखती है।
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, अबु धाबी में बने इस हिंदू मंदिर का सपना 27 साल पहले वर्ष 1997 में देखा गया था। इस सपने को मूर्त रूप देने की शुरुआत 2012 में हुई। 2012 में मंदिर निर्माण के लिए जमीन खोजना शुरू किया गया। इस दौरान मंदिर BAPS के अधिकारी UAE के राष्ट्रपति क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मिले और मंदिर निर्माण के लिए दो-तीन जमीन का प्रस्ताव उनके सामने रखे।
इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी साल 2015 में UAE के दौरे पर गए। इस दौरान ही क्राउन प्रिंस ने मंदिर बनाने की अनुमति पीएम मोदी के सामने ही दे दी और वचन दिया कि वे मंदिर के लिए जमीन भी देंगे।
शेख मोहम्मद बिन जायद ने साल 2018 मंदिर के लिए 13.5 एकड़ जमीन दे दी। जमीन मिलने के बाद मंदिर के डिजाइन समेत बाकी चीजों पर काम शुरू हो गया। इसके बाद BAPS फाइनल प्रस्ताव लेकर प्रिंस के पास पहुंचा तो उन्हें यह 13.5 एकड़ जमीन कम लगी।
उन्होंने कहा कि इतने में तो पूरा मंदिर ही बन जाएगा। मंदिर निर्माण के दौरान सामग्रियों को रखने की भी जरूरत होगी। इसके बाद प्रिंस ने सहृदयता दिखाते हुए बीएपीएस को 13.5 एकड़ जमीन और दे दी। 27 एकड़ में फैले परिसर में भगवान स्वामीनारायण का मंदिर 13.5 एकड़ में बना है। जबकि बाकी के 13.5 एकड़ में पार्किंग बनी है।












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