Ayatollah Alireza Arafi Iran: खामेनेई युग का अंत! कौन हैं अयातुल्लाह अराफी जो बने ईरान के अंतरिम सुप्रीम लीडर
Ayatollah Alireza Arafi Iran: ईरान की राजनीति में 37 साल बाद एक युग का अंत हो गया है। शनिवार, 28 फरवरी को जब तेहरान का आसमान धमाकों से गूंज रहा था, तब किसी ने नहीं सोचा था कि कुछ ही घंटों में ईरान के सबसे ताकतवर शख्स का अंत हो जाएगा।
अमेरिका और इजरायल के विनाशकारी हवाई हमले में अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद तेहरान ने अपने नए 'अस्थायी' कप्तान का ऐलान कर दिया है। 67 वर्षीयअयातुल्लाह अलीरेजा अराफी (Ayatollah Alireza Arafi) को ईरान का अंतरिम सुप्रीम लीडर नियुक्त किया गया है।

ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी ISNA और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अराफी अब एक शक्तिशाली 'लीडरशिप काउंसिल' के जरिए देश की कमान संभालेंगे।
Who is Ayatollah Alireza Arafi: कौन हैं अयातुल्लाह अलीरेजा अराफी?
अराफी को खामेनेई का सबसे भरोसेमंद और 'सिस्टम' का वफादार माना जाता है। 1959 में यज़्द में जन्मे अराफी ने ईरान के पवित्र शहर कोम (Qom) में अपनी शिक्षा पूरी की। उनके पिता भी एक बड़े धर्मगुरु और खोमैनी के दोस्त थे। अराफी अरबी और अंग्रेजी के जानकार हैं और उन्होंने दर्शनशास्त्र (Philosophy) और न्यायशास्त्र पर 24 से अधिक किताबें लिखी हैं।
वे वर्तमान में ईरान के सभी मदरसों Seminaries के नेटवर्क के प्रमुख हैं और 2019 से गार्जियन काउंसिल के सदस्य हैं। उन्हें 'क्रांतिकारी' शिया विचारधारा का अंतरराष्ट्रीय प्रचारक माना जाता है। मजबूत प्रशासनिक पकड़, धार्मिक विद्वता और संस्थागत समर्थन के कारण अराफी को भी स्थायी सुप्रीम लीडर का मजबूत दावेदार माना जा रहा है।
Iran Leadership Council: कौन संभालेगा देश? अंतरिम परिषद का गठन
अल जज़ीरा की रिपोर्ट के अनुसार, अयातुल्लाह अलीरेजा अराफी, जो गार्जियन काउंसिल के सीनियर धर्मगुरु सदस्य हैं, को ईरान की लीडरशिप काउंसिल में विधि विशेषज्ञ (Jurist Member) के तौर पर नियुक्त किया गया है। यह परिषद तब तक सुप्रीम लीडर की सभी संवैधानिक जिम्मेदारियां निभाएगी, जब तक कि असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स नए स्थायी नेता का चुनाव नहीं कर लेती।
ईरानी संविधान के मुताबिक, इस तीन सदस्यीय अंतरिम नेतृत्व परिषद में शामिल हैं:
अयातुल्लाह अलीरेजा अराफी - धार्मिक व विधिक विशेषज्ञ
मसूद पेजेशकियन - ईरान के राष्ट्रपति
घोलाम-होसैन मोहसिनी-एजेई - ईरान के मुख्य न्यायाधीश
खामेनेई की मौत के बाद यह परिषद मिलकर देश की सत्ता संभालेगी, क्योंकि ईरान इस समय युद्ध और राजनीतिक संक्रमण दोनों के दौर से गुजर रहा है। यह परिषद तब तक शासन करेगी जब तक कि 'असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स' (88 धर्मगुरुओं की सभा) एक नए स्थायी सुप्रीम लीडर का चुनाव नहीं कर लेती।
कौन बनेगा खामेनेई का उत्तराधिकार? रेस में बेटा मोजतबा या अराफी?
हालांकि अयातुल्लाह अलीरेजा अराफी को 'अंतरिम' पद मिला है, लेकिन ईरान के भीतर सत्ता संघर्ष की खबरें भी तेज हैं। अली खामेनेई के बेटे मोजतबा को लेकर भी कयास लगाए जा रहे हैं कि वे स्थायी सर्वोच्च नेता बन सकते हैं। लेकिन वंशानुगत शासन के खिलाफ इस्लामी क्रांति के सिद्धांतों के कारण उनके नाम पर विरोध भी हो सकता है। अराफी की प्रशासनिक पकड़ और धार्मिक विद्वता उन्हें एक मजबूत 'स्थायी' उम्मीदवार भी बना सकती है।
मोजतबा खामेनेई
खामेनेई के बेटे मोजतबा को संभावित उत्तराधिकारी माना जा रहा है। हालांकि इस्लामिक क्रांति वंशानुगत शासन के खिलाफ रही है। ऐसे में उनके नाम पर आंतरिक विरोध भी संभव है
अयातुल्लाह अलीरेजा अराफी
अराफी भले ही अभी अंतरिम भूमिका में हैं, लेकिन वे स्थायी रेस में सबसे आगे माने जा रहे हैं। उनके सामने दो चुनौतियां हैं। अली खामेनेई के बेटे मोजतबा को लेकर चर्चाएं तेज हैं, लेकिन ईरान में 'वंशवाद' का विरोध करने वाले गुट उनके रास्ते में रोड़ा बन सकते हैं। अराफी के पास कोई स्वतंत्र राजनीतिक आधार नहीं है, लेकिन वे धार्मिक संस्थानों और गार्जियन काउंसिल के चहेते हैं, जो उन्हें एक 'सुरक्षित' उम्मीदवार बनाता है।
अयातुल्लाह अलीरेजा अराफी के सामने युद्ध के बीच क्या रहेगी बड़ी चुनौती
अराफी ऐसे समय में सत्ता संभाल रहे हैं जब ईरान पांच मोर्चों पर युद्ध लड़ रहा है और ईरान के कई वरिष्ठ जनरल (जैसे IRGC चीफ मोहम्मद पाकपुर) मारे जा चुके हैं। अमेरिका और इजरायल ने चेतावनी दी है कि वे ईरान के परमाणु कार्यक्रम और सैन्य ठिकानों को पूरी तरह नष्ट करने तक नहीं रुकेंगे।
वहीं, ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने अपने नए कमांडर अहमद वाहिदी के नेतृत्व में खामेनेई की मौत का बदला लेने की कसम खाई है। अयातुल्लाह अराफी का नेतृत्व यह तय करेगा कि ईरान इस भीषण युद्ध में किस दिशा में आगे बढ़ता है समझौते की ओर या फिर पूर्ण महायुद्ध की ओर।
पूरी दुनिया की नजरें अब तेहरान की अगली रणनीतिक चाल पर टिकी हैं। अब अराफी को यह तय करना है कि वे खामेनेई की मौत का बदला लेने के लिए 'महायुद्ध' का रास्ता चुनेंगे या फिर देश को विनाश से बचाने के लिए कूटनीति का सहारा लेंगे।
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