वैज्ञानिकों का बड़ा दावा, एलियन और अलौकिक प्राणियों से संपर्क साधना सैद्धांतिक तौर पर संभव है
पिछले हफ्ते फ्रांस में सर्न के वैज्ञानिकों ने लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर मशीन को चार सालों के बाद चलाया था, जिससे जरिए गॉड पार्टिकिल की खोज की गई थी।
नई दिल्ली, जुलाई 10: पृथ्वी के अलावा किसी और ग्रह पर जीवन है या नहीं या फिर क्या एलियन वास्तव में होते हैं या नहीं, इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए दुनियाभर के वैज्ञानिक पिछले कई सालों से कोशिश कर रहे हैं और अब एडिनबर्ग विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने गणितीय गणनाओं का उपयोग यह दिखाने के लिए किया है, कि क्वांटम कम्युनिकेशन का उपयोग करके इंटरस्टेलर स्पेस में सिग्नल भेजना सैद्धांतिक रूप से संभव है और इसके जरिए एलियंस से संपर्क साधना संभव है।

क्वांटम फिजिक्स रिसर्च क्या है?
शोध करने वाले वैज्ञानिकों की टीम ने कहा है कि, सिर्फ इंसान ही नहीं, बल्कि इसी तरह के कम्युनिकेशन चैनल का इस्तेमाल एलियंस भी इंसानों से संपर्क स्थापित करने के लिए कर रहे हैं और टीम ने दावा किया है, कि इस तरीके से अलौकिक प्राणियों से संपर्क साधना संभव है। क्वांटम कम्युनिकेशन डेटा की सुरक्षा के लिए क्वांटम भौतिकी के नियमों का लाभ उठाता है। क्वांटम लॉ प्रकाश के कणों को एक साथ कई जगहों पर भेजने की इजाजत देता है और ये डेटा काफी ज्यादा सीक्रेट होता है और अगर किसी भी टेक्नोलॉजी के जरिए उस संदेश को खोलने की कोशिश की जाएगी, तो वो संदेश ढह जाएगा और किसी के लिए भी इसे हैक करना संभव नहीं होगा। फिलहाल, इस टेक्नोलॉजी का परीक्षण अमेरिका और चीन के साथ भारतीय स्पेस एजेंसी इसरो ने भी कर लिया है और चीन और अमेरिका की कोशिश क्वांटम टेक्नोलॉजी से लैस सैटेलाइट लांच करने की है और भारत भी इसी दिशा में काम कर रहा है।

वैज्ञानिकों का रिसर्च क्या कहता है?
एडिनबर्ग विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की टीम यह पता लगाना चाहती थी, कि क्या इंटरस्टेलर स्पेस में इसी तरह के कम्युनिकेशन संभव हो सकते हैं। उन्होंने इंटरस्टेलर माध्यम में एक्स-रे की गति का अध्ययन करने के लिए गणित का उपयोग किया। शोधकर्ता बताते हैं, कि चूंकि अंतरिक्ष खाली है, लिहाजा एक्स-रे फोटॉन बिना किसी हस्तक्षेप के सैकड़ों हजारों प्रकाश वर्ष की यात्रा कर सकते हैं।

CERN वैज्ञानिकों को क्या पता लगा?
पिछले हफ्ते फ्रांस में सर्न के वैज्ञानिकों ने लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर मशीन को चार सालों के बाद चलाया था, जिससे जरिए गॉड पार्टिकिल की खोज की गई थी। ये दुनिया का सबसे शक्तिशाली मशीन माना जाता है और इस मशीन को चलाकर प्रोटोन के बीच टक्कर करवाई गई। इस दौरान भौतिकविदों ने तीन नए उप परमाणु कणों स्ट्रेंज पेंटाक्वार्क, एक डबल चार्ज टेट्राक्वार्क, और इसका तटस्थ साथी, की खोज की है। क्वार्क प्राथमिक कण हैं और छह 'फ्लेवर्स' में आते हैं, ऊपर, नीचे, आकर्षण, अजीब, ऊपर और नीचे। वे आम तौर पर दो और तीन के समूहों में एक साथ मिलकर कण बनाते हैं, जिन्हें हैड्रॉन के रूप में जाना जाता है, जैसे प्रोटॉन और न्यूट्रॉन जो परमाणु नाभिक बनाते हैं। हालांकि, अत्यंत दुर्लभ स्थिति में वे चार-क्वार्क और पांच-क्वार्क कणों, या टेट्राक्वार्क और पेंटाक्वार्क में भी मिल सकते हैं। और यहां आपको जानकर हैरानी होगी, कि करीब 60 साल पहले इन हैड्रॉन कणों को कैप्चर किया गया था, लेकिन टेक्नोलॉडजी नहीं होने की वजह से उन्हें पढ़ा नहीं जा सका और पिछले 20 सालों में उन्हें एलएचसीबी और अन्य प्रयोगों द्वारा पढ़ने की कोशिश की जा रही है।

कई विदेशी सिग्नल्स को वैज्ञानिकों ने पकड़ा
पिछले दो दशकों में खोजे गए ज्यादातर विदेशी सिग्नल्स, हैड्रॉन टेट्राक्वार्क या पेंटाक्वार्क हैं जिनमें एक आकर्षण क्वार्क और एक आकर्षण एंटीक्वार्क होता है, शेष दो या तीन क्वार्क ऊपर, नीचे या अजीब क्वार्क या उनके एंटीक्वार्क होते हैं। खोजों में नए विदेशी हैड्रॉन शामिल हैं, स्ट्रेंज पेंटाक्वार्क PΛψs(4338)0, डबल चार्ज टेट्राक्वार्क Tacs0(2900)++ और इसका तटस्थ साथी Tacs0(2900)0। यानि, वैज्ञानिकों का मानना है कि, अगर हमारे पास ऐसी टेक्नोलॉजी हो, तो हम इन संदेश को ब्रेक कर सकते हैं और फिर उन्हें पढ़ सकते हैं, अगर वास्तव में वो संदेश हुए तो, और फिर हम उनसे संपर्क भी साध सकते हैं। लेकिन, फिलहाल इस टेक्नोलॉजी पर इंसानों ने प्रगति करनी शुरू ही की है और भारत ने पिछले साल 100 मीटर की दूरी के बीच अपना ऑडियो संदेश भेजकर परीक्षण किया था, जो कामयाब रहा था। लिहाजा आने वाले वक्त में क्वांटम फिजिक्स के जरिए अलौकिक प्राणियों से संपर्क साधना संभव हो सकता है।

एलियंस पर खुफिया प्रमुखों के दावे
एक सवाल ये भी हमारे मन में उठता है, कि हम कौन हैं, हम कहां से आए हैं और क्या पृथ्वी के अलावा भी किसी और ग्रह पर कोई जिंदगी रहती है? अब तक वैज्ञानिकों ने पृथ्वी ग्रह से 30 अरब प्रकाश वर्ष तक के दायरे की खोज की है और कुछ भी नहीं मिला है, लेकिन अभी भी काफी कुछ मौजूद है, जहां हमने अभी तक खोज नहीं की है। फिर भी पांच खुफिया और अंतरिक्ष एजेंसी के प्रमुख, जो अमेरिका, ब्रिटेन, इज़राइल और रूस से हैं, उन्होंने कहा है कि वे पहले से ही विश्वास करने के लिए पर्याप्त सबूत देख चुके हैं, कि एलियंस मौजूद हैं, संभवतः हमें आने वाले वक्त में उनको लेकर काफी खतरनाक जानकारियां मिली हैं।

पूर्व सीआईए निदेशक जेम्स वूल्सी के दावे
अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के पूर्व डायरेक्टर जेम्स वूल्सी, जिन्होंने 1993 से 1995 के बीच सीआईए के प्रमुख के रूप में काम किया, उन्होंने 2021 में ब्लैक वॉल्ट को बताया कि, उन्हें 40 हजार फीट पर उड़ान भरते वक्त उन्होंने एयरफ्रेम को देखा था और फिर हमने उसका पीछा किया था, लेकिन हम उसका पीछा नहीं कर पाए। उन्होंने कहा था कि, उस वक्त उनके साथ एयरक्राफ्ट में उनका दोस्त भी मौजूद था। उन्होंने दावा करते हुए कहा था कि, 'इस तरह की पर्याप्त चीजें हुई हैं, जो मुझे लगता है कि कई महीनों या वर्षों के दौरान क्या हो रहा है, इसकी बहुत जांच होनी चाहिए'। उन्होंने कहा कि, अब मैं पिछले कुछ साल पहले की तरह इस मामले में संशय में नहीं हूं। क्योंकि, अमेरिका के कई बुद्धमान और अनुभवी पायलट्स ने भी इस आश्चर्य को देखा है।

एलियंस पर इजरायल के पूर्व स्पेस चीफ का दावा
इजरायली रक्षा मंत्रालय के स्पेस स्टेशन के पूर्व डायरेक्टर हैम ईशेड, जिन्होंने साल 2007 से 2011 तक अपने देश के लिए काम किया है, जो दिसंबर 2020 से इजरायली वैमानिकी इंजीनियरिंग के प्रोफेसर हैं, उन्होंने एलियंस के अस्तित्व होने का दावा किया है। उन्होंने ना केवल एलियंस के होने, बल्कि यहां तक दावा किया है, कि जितना इंसानों को एलियंस के बारे में जानने, देखने और उन्हें समझने की दिलचस्पी है, उतनी ही दिलचस्पी एलियंस में भी इंसानों को लेकर है। उन्होंने येडियट अहरोनोट अखबार को बताया था कि, मानव और एलियंस ने पहले से ही एक गुप्त समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें "मंगल की गहराई में भूमिगत आधार" शामिल है, जहां अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री और विदेशी प्रतिनिधि हैं। उन्होंने सनसनीखेज दावा करते हुए यहां तक कहा कि, अभी तक एलियंस और इंसानों के बीच आखिरी समझौता नहीं हुआ है, जहां वो इस सौदे के बारे में घोषणा कर सकें।












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