पाकिस्तान में अहमदिया मुसलमानों की क्या स्थिति है? यूएस एक्सपर्ट ने जताई गहरी चिंता

अमेरिका के पूर्व सलाहकार और एशिया में धार्मिक अल्पसंख्यक मामलों पर नजर रखने वाले अधिकारी नॉक्स थेम्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पाकिस्तान के अहमदिया मुसलमानों को बुरी तरह से टार्गेट किया जाता है

इस्लामाबाद/लंदन, जून 22: पाकिस्तान की सत्ता की शिखर पर जो भी नेता आए, अपनी गद्दी बचाने के लिए अपने देश की अवाम को लगातार बांटते रहे। पाकिस्तान में हिंदू तो नाममात्र ही बचे हैं, लिहाजा पाकिस्तान में मुसलमानों ने मुसलमानों को ही अपना दुश्मन चुना और सियासतदानों ने उसे खून-पसीने से सींचा। यही वजह है कि आज पाकिस्तान में रहने वाले अहमदिया मुसलमानों की स्थिति बद से बदतर हो चुकी है और अमेरिकी एक्सपर्ट्स ने उनकी स्थिति पर गहरी चिंता जताई है। अमेरिकन एक्सपर्ट्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पाकिस्तान में अहमदिया समुदाय को चुन- चुनकर निशाना बनाया जाता है।

निशाने पर अहमदिया मुसलमान

निशाने पर अहमदिया मुसलमान

अमेरिका के पूर्व सलाहकार और एशिया में धार्मिक अल्पसंख्यक मामलों पर नजर रखने वाले अधिकारी नॉक्स थेम्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पाकिस्तान के अहमदिया मुसलमानों को बुरी तरह से टार्गेट किया जाता है। उन्हें ईशनिंदा कानून में झूठा फंसाया जाता है और फिर सालों तक जेल में बंद रखा जाता है। नॉक्स थेम्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि बतौर अहमदिया मुसलमान पाकिस्तान में रहना खतरनाक है। लंदन में एक पॉडकास्ट में थेम्स ने कहा कि 'पाकिस्तान में रहने वाले अहमदिया समुदाय के लोग खुद को मुसलमान तो मानते हैं, लेकिन बतौर मुस्लिम होकर उनका पाकिस्तान में रहना बेहद खतरनाक है। उनकी आबादी लगातार कम हो रही है।' उन्होंने कहा कि 'इस्लामिक विचारधारा में अहमदियाओं को मुस्लिम नहीं माना जाता है। अहमदिया विचारधारा को इस्लाम से बाहर का हिस्सा माना जाता है, लेकिन पाकिस्तान के अंदर तो उनके अस्तित्व को ही खत्म किया जा रहा है। उनके साथ बेहद खराब सलूक किया जाता है और उन्हें ईशनिंदा के झूठ आरोपों में फंसाना बेहद आसान है।'

लाहौर में अहमदिया मुस्लिमों का नरसंहार

लाहौर में अहमदिया मुस्लिमों का नरसंहार

अमेरिका के एशिया मामलों के पूर्व राजनयिक नॉक्स थेम्स ने पाकिस्तान के लाहौर में 1953 में हुए दंगे का हवाला देते हुए कहा कि उस दंगे में हजारों अहमदिया मुस्लिमों को मारा गया था और हजारों अहमदियाओं को पूरी तरह से उजाड़ दिया गया था। उन्होंने कहा कि '1953 में अहमदियाओं के साथ हुए नरसंहाग के बाद हम लगातार देख रहे हैं कि उनके साथ भयानक भेदभाव किया जाता है, उन्हें झूठे मामलों में फंसाया जाता है और उन्हें खत्म करने की कोशिश हो रही है। वहीं, पाकिस्तान के कपड़ा उद्योग में एक तरह से अहमदिया मुस्लिमों का बहिष्कार कर दिया गया है'। उन्होंने कहा कि 'पाकिस्तान में अहमदिया मुस्लिमों को ना बोलने का अधिकार है और ना ही अपनी आवाज उठाने का। उन्हें समाज से अलग रखा जाता है, उनके साथ बेहद बुरी सलूक किया जाता है और सबसे खतरनाक बात ये है कि पाकिस्तान की संसद ने ही अहमदियाओं को मुस्लिम होंने का दर्जा छीना है और उनके पास कई संवैधानिक अधिकार नहीं हैं'

संविधान में ही अहमदियाओं से भेदभाव

संविधान में ही अहमदियाओं से भेदभाव

एक्सपर्ट्स का मानना है कि पाकिस्तान में अहमदिया मुसलमानों को राजनीतिक और सामाजिक, दोनों तरह से प्रताड़ित किया गया है। जब पाकिस्तान में जुल्फीकार अली भुट्टो की सरकार थी, तो उन्होंने पाकिस्तान में दंगाई विचारधारा को काफी हवा दी और उन्होंने पाकिस्तान की संविधान में परिवर्तन करते हुए लिखवाया कि अहमदिया को इस्लाम से बाहर किया जाता है और अहमदिया को पाकिस्तान में मुसलमान नहीं माना जाएगा। नॉक्स थेम्स ने पॉडकास्ट के दौरान नोबेल पुरस्कार विजेता अब्दुस सलम का हवाला देते हुए कहा कि 'अब्दुस सलम पहले पाकिस्तानी थी, जिन्हें प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कार दिया गया था, लेकिन उन्होंने अपने घर के अंदर ही अपनी खुशी मनाई। ऐसा इसलिए, क्योंकि वो अहमदिया मुस्लिम थे।' उन्होंने कहा कि 'पाकिस्तान में रहने वाला हर अहमदिया मुसलमान काफी ज्यादा देशभक्त होते हैं, वो अपने संविधान और समाज को मानते हैं, लेकिन पाकिस्तान में उनकी ना इज्जत है और ना ही उन्हें सम्मान दिया जाता है। उन्हें हर जगह दुत्कार दिया जाता है।'

इमरान खान भी कट्टरपंथी मुस्लिम

इमरान खान भी कट्टरपंथी मुस्लिम

उन्होंने कहा कि 'जब इमरान खान प्रधानमंत्री बने थे तो हमें लगा था कि शायद वो कट्टरपंथ से दूर हैं लेकिन बाद में हमें पता चला कि वो भी कट्टरपंथी मानसिकता के हैं। इमरान खान ने जो आर्थिक कमेटी का निर्माण किया था, उसमें पहले एक बहुत बड़े अर्थशास्त्री और प्रिंसटन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर को शामिल किया गया था, लेकिन जब पता चला कि वो अहमदिया विचारधारा से ताल्लुक रखते हैं, तो इमरान खान ने उन्हें अपनी कमेटी से निकाल दिया।' नॉक्स थेम्स ने कहा कि 'आप पाकिस्तान में रहते हुए किसी तरह की बदलाव की उम्मीद नहीं कर सकते हैं या पाकिस्तान में रहकर इस तरह की मानसिकता को बदल नहीं सकते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि, पाकिस्तान में कट्टरपंथी के खिलाफ आप नहीं बोल सकते हैं। पाकिस्तान की बहुत बड़ी आबादी कट्टरपंथियों की मदद करती है या यूं कहें कट्टरपंथी ही है और ऐसी विचारधारा के खिलाफ बोलना मतलब अपनी जान जोखिम में डालना होता है।' उन्होंने कहा कि 'पाकिस्तान के अंदर शासन और प्रशासन में कट्टरपंथी काफी ज्यादा शक्तिशाली हैं और जो लोग अल्पसंख्यकों को या अहमदिया मुस्लिमों का कत्ल करते हैं, उन्हें कानूनन कुछ नहीं होने देते है। पुलिस अहमदिया को मारने वाले किसी आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर सकती है।'

यूरोपीयन यूनियन ने जताई चिंता

यूरोपीयन यूनियन ने जताई चिंता

अप्रैल महीने में यूरोपीयन यूनियन ने पाकिस्तान में रहने वाले धार्मिक अल्पसंख्यकों पर होने वाले हमले और भेदभाव को लेकर गहरी चिंता जताई थी और ईशनिंदा कानून की आलोचना की थी। यूरोपीयन यूनियन ने कहा था कि 'पाकिस्तान के अंदर ईशनिंदा कानून का बहुत बड़े पैमाने पर गलत इस्तेमाल हो रहा है। इसके तहत राजनीतिक और धार्मिक विरोधियों का सफाया किया जाता है। और अहमदिया मुस्लिम ईशनिंदा कानन के सबसे ज्यादा शिकार बनते हैं।' कई दूसरे रिपोर्ट्स में भी कहा गया है कि पाकिस्तान के अंदर अहमदिया मुस्लिमों का अगर कोई कत्ल कर देता है तो पुलिस उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं करती है। ईशनिंदा के आरोप में पाकिस्तान में सैकड़ों अहमदिया जेल में बंद हैं।

पाकिस्तान में अहमदिया मुस्लिमों की स्थिति

पाकिस्तान में अहमदिया मुस्लिमों की स्थिति

पाकिस्तान में करीब 40 लाख अहमदिया मुस्लिम रहते हैं और अलग अलग हिस्से में रहते हैं। जिनके ऊपर अकसर हमले होते हैं, लूटपाट की जाती है, हत्याएं होती हैं और उन्हें इंसाफ नहीं मिलता है। पिछले साल ब्रिटेन स्थिति ऑल पार्टी पार्लियामेट्री ग्रुप यानि एपीपीजी ने पाकिस्तान में अहमदिया मुस्लिमों के साथ होने वाली अत्याचार को लेकर अपनी रिपोर्ट में कहा था कि पाकिस्तान में अहमदियाओं की स्थिति हद से ज्यादा खतरनाक है। रिपोर्ट के मुताबिक अहमदिया को दबा कर रखा जाता है, उन्हें इस्लामिक रीति-रिवाज मानने की आजादी नहीं है, जबकि अहमदिया एक शांतिप्रिय समुदाय है। पाकिस्तान में 1974 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जुल्फीकार अली भुट्टो ने एंटी अहमदिया कार्यक्रम चलाया था और अहमदिया मुसलमानों को राज्य आधारित हिंसा का शिकार बनाया गया था। और फिर उन्हें संविधान से ही मुस्लिम होने का हक छीनते हुए उनके कई अधिकार छीन लिए। जिसके बाद पाकिस्तान में अहमदिया मुस्लिमों की स्थिति और ज्यादा खराब होती चली गई।

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