पाकिस्तान में अहमदिया समुदाय पर अत्याचार जारी, पुलिस के सामने कट्टरपंथियों ने तोड़ डालीं तीन मस्जिदें
पाकिस्तान में पिछले कुछ महीनों में अहमदिया समुदाय की इबादतगाहों से मीनार हटाने की मुहिम जारी है। पाकिस्तान में एक बार फिर से पंजाब प्रांत के विभिन्न जिलों में अहमदिया समुदाय के तीन मस्जिदों को तोड़ दिया गया है।
पाकिस्तान में अहमदिया समुदाय पर हमले की ये ताजा घटना है। एक सप्ताह पहले भी अहमदिया समुदाय के एक पूजा स्थल के मेहराब को नष्ट कर दिया गया था। ये घटनाएं हाई कोर्ट के उस आदेश की अनदेखी हैं जिसमें 1984 से पहले बने अल्पसंख्यक समुदायों के धर्मस्थलों की तोड़फोड़ पर प्रतिबंध लगा हुआ है।

आपको बता दें कि इस वर्ष पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों में अहमदियों के इबादत स्थलों पर कट्टरपंथी इस्लामवादियों द्वारा किए गए हमले या पुलिस द्वारा ध्वस्त किए गए हमलों की संख्या बढ़कर 31 हो गई है।
जमात-ए-अहमदिया पाकिस्तान के आमिर महमूद ने कहा कि,'अहमदी पूजा स्थलों की मीनारों की पहचान मुस्लिम मस्जिद से करते हुए तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) के कार्यकर्ताओं ने पंजाब के शेखूपुरा, बहावलनगर और बहावलपुर जिलों में तीन अहमदी पूजा स्थलों पर धावा बोल दिया और उनकी मीनारों को ध्वस्त कर दिया।'
महमूद ने कहा कि लाहौर उच्च न्यायालय के हालिया फैसले में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि 1984 से पहले बने अहमदी इबादत स्थलों की मीनारों में किसी बदलाव की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि ये मस्जिद 1984 से पहले के बनाए हुए हैं।
महमदू ने आगे कहा, "टीएलपी के लोग अहमदी इबादत स्थलों पर हमला करते रहे मगर वहां पर मौजूद पुलिस ने इसे रोकने के लिए कुछ नहीं किया। ये दुखदा है कि अहमदियों को पाकिस्तान में रहने वाले नागरिक के रूप में उनके बुनियादी अधिकारों से वंचित किया जा रहा है। और पुलिस भी इनमें मौन सहयोग दे रही है।
पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग (एचआरसीपी) ने कहा कि अहमदिया पूजा स्थलों के एक हिस्से को नष्ट करना अहमदिया पूजा स्थलों की सुरक्षा के संबंध में लाहौर उच्च न्यायालय के हालिया फैसले का खुला उल्लंघन है।
आपको बता दें कि अहमदिया खुद को मुसलमान बताते हैं, लेकिन पाकिस्तान में उन्हें मुसलमान नहीं माना जाता है। पाकिस्तान एकमात्र ऐसा देश था जहां पाकिस्तान की संसद ने बकायदा कानून बनाकर 1974 में अहमदी समुदाय को गैर-मुस्लिम घोषित कर दिया। यहां तक कि उन्हें खुद को मुस्लिम कहने पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है।
अहमिया समुदाय पर धर्म उपदेश देने और सऊदी अरब जाकर हज करने पर रोक लगी हुई है, जबकि पाकिस्तान में इनकी तादाद करीब दस लाख है। इतनी बड़ी आबादी होने के बावजूद पाकिस्तान में अहमदिया समुदाय के लोग अपनी पहचान गोपनीय रखने की कोशिश करते हैं और किसी धार्मिक विवाद में पड़ने से बचते हैं।
अहमदिया समुदाय के डेटा से संकेत मिलता है कि पंजाब में इस समुदाय के खिलाफ धार्मिक आधार पर 100 से अधिक मामले दर्ज किए गए थे, जिसमें मुस्लिम के रूप में खुद को पेश करना, उनके धर्म का प्रचार करना और ईशनिंदा के आरोप शामिल थे।












Click it and Unblock the Notifications