एग्नेस सिथोल: दक्षिण अफ़्रीका की हज़ारों काली महिलाओं के लिए कैसे बनीं हीरो?
एग्नेस सिथोल को दक्षिण अफ्रीका की सैकड़ों-हजारों अश्वेत महिलाएं एक हीरो की तरह देखती हैं.
एग्नेस ने 72 साल की उम्र में अपने पति पर केस किया. वो उनकी इच्छा के विरुद्ध घर बेचने जा रहे थे, जिसे रोकने के लिए उन्होंने क़ानूनी रास्ता चुना और इस प्रक्रिया में क़ानूनन उन्हें उनका अधिकार मिला.

एग्नेस सिथोल ने साल 1972 में गिदोन से शादी की थी. वो हाईस्कूल में उनके साथ पढ़ते थे. लेकिन जल्दी ही उनकी बेवफाई एग्नेस के सामने आने लगी.
एग्नेस बताती हैं, "उनके हमेशा अफ़ेयर रहे. कभी कोई, तो कभी कोई. लेकिन साल 2016-2017 तक इसका मुझ पर कोई असर नही पड़ा. लेकिन जब वह हमारी संपत्ति बेचने पर उतारू हो गए तो मुझे फ़र्क पड़ा."
उनका हमेशा की तरह एक ही जवाब था," यह उनका घर है, उनकी संपत्ति और मेरा उस पर कोई अधिकार नहीं."
घर गंवाने का ख़तरा था और तब एग्नेस ने 2019 में अपने पति के ख़िलाफ़ कानूनी रास्ता चुनने का फ़ैसला किया.
उनकी पीढ़ी की किसी अश्वेत महिला के लिए ऐसा क़दम उठाना सामान्य नहीं था.
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वह कहती हैं, "मैं उस समय 72 वर्ष की थी. मैं कहाँ जा सकती थी और मैं कहाँ से शुरुआत करती? इसलिए मेरे पास एकमात्र विकल्प दक्षिणी अफ्रीकी कोर्ट में उनके ख़िलाफ़ खड़ा होना ही था."
एग्नेस कहती है कि संभव है कि परिस्थितियों ने उन्हें बहादुर बना दिया.
वह कहती हैं कि अगर ऐसी परिस्थितियां पैदा नहीं हुई होतीं तो वह कभी भी ऐसा करने के बारे में सोचतीं भी नहीं.
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'महिलाओं के पास नहीं था विकल्प'
एग्नेस की शादी ऐसे समय में हुई थी जब दक्षिण अफ्रीका गोरों का शासन था. वहीं शादीशुदा काले लोगों के लिए एक ही था जिसमें संपत्ति पर पुरुषों का सर्वाधिकार था.
एग्नेस बताती हैं, "उस समय महिलाओं को कोई विकल्प नहीं दिया जाता था. या तो महिलाओं को इसी सिस्टम का पालन करते हुए शादी करनी होती थी या फिर उनकी शादी नहीं होती थी."
साल 1988 में वैवाहिक संपत्ति अधिनियम में संशोधन किया गया. जिसमें महिलाओं को समान संपत्ति का अधिकार दिया गया.
हालाँकि, इसके लिए काली महिलाओं के पति का राज़ी होना ज़रूरी था. आवेदन के लिए भुगतान करना होता था और दो साल की अवधि के भीतर इसे जमा करना होता था.
एग्नेस बताती हैं, "हम जानते थे कि क़ानून बदल गया था और सोचा था कि यह सभी के लिए बदल गया है."
लेकिन बाद में एहसास हुआ कि ऐसा नहीं है और इसी के बाद उन्होंने क़ानूनी लड़ाई लड़ने का फ़ैसला किया. "
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बेहतर जीवन की थी उम्मीद
एग्नेस का जन्म क्वाज़ुलु-नताल के कोयला-खनन के लिए मशहूर शहर व्रहीद में हुआ था.
1940 के दशक में पूरे देश में जातियों के बीच एक स्पष्ट आर्थिक अंतर था.
एग्नेस के पिता ट्रेनों की सफाई का काम करते थे. वो रेलवे के गोरे अधिकारियों के लिए चाय बनाते थे. उनकी माँ रसोईघर में काम करती थीं.
एग्नेस बताती हैं, "मैं एक बेहद ग़रीब परिवार पैदा हुई थी. मेरे माता-पिता मजदूर थे लेकिन वे हमारे लिए एक मिसाल थे. ""हफ़्ते के आखिर में हम चर्च जाते थे. जब मैं बड़ी हुई तो मुझे पता चला कि कैथोलिकों को वास्तव में तलाक की अनुमति नहीं थी, भले ही रिश्ता ठीक ना चल रहा हो.मैं भी दोबारा शादी नहीं करना चाहती थी और ना ही ये चाहती थी कि मेरे बच्चे एक ऐसे माहौल में बड़े हों जहां मां-बाप में से कोई भी एक ना हो.उस समय तक जो एक बात मुझे पता थी वो बस यही थी."
एग्नेस ने अपने माता-पिता को तमाम विपरित परिस्थितियों के हंसते-खेलते देखा था और उन्हीं को देखकर एग्नेस ने ठाना की वे अपना जीवन बेहतर बनाकर रहेंगी.
चार बच्चों की ज़िम्मेदारी
गिदोन से शादी करने से पहले एग्नेस ने एक नर्स के रूप में प्रशिक्षण ले रखा था. उसके बाद उन्होंने कपड़े बेचने का काम किया. इसके अलावा उन्हें कई और काम किये ताकि घर की ज़रूरतों को पूरी कर सकें.
एग्नेस बताती हैं, "मुझे जल्दी ही यह एहसास हो गया था कि मैं बिल्कुल अकेली हूं."
उस समय तक एग्नेस चार बच्चों की मां बन चुकी थीं.
वह बताती हैं, "मैं काम करके ही घर लौटती थी और फिर घर आकर सिलाई, कपड़े खरीदना और बेचना शुरू करती थी. मैं उस समय बहुत सी चीजें कर रही थी क्योंकि मैंने ठान लिया था कि चाहे कुछ हो जाए मैं मेरे बच्चों को स्कूल भेजूंगी ही."
वो कहती हैं, "मैं स्वभाव से परिश्रमी हूं. मैंने अपने पूरे जीवन में श्रम किया है. किसी से इस बात के लिए लड़ना कि वो मेरे लिए कुछ करे, उससे कहीं अधिक मुझे यह पसंद है कि मैं खुद के लिए ही करूं."
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एग्नेस की शादी नौ साल पहले ही ढलान पर आ चुकी थी. एक शाम काम से वापस आने के बाद उन्होंने देखा कि गिदोन बिना कुछ कहे दूसरे कमरे में रहने चले गये थे. वे एक ही छत के नीचे रहते थे लेकिन एक-दूसरे से पूरी तरह से अलग.
"हम गलियारों में, सीढ़ियों पर या फिर पार्किंग की जगह पर एक-दूसरे से टकरा जाते थे लेकिन बात नहीं करते थे."
एग्नेस का कहना है कि गिदोन ने कभी भी घर बेचने की अपनी योजना के बारे में उनसे बात नहीं की और जब उन्हें इसके बारे में पता चला तो उनके लिए यह एक सदमा था.
केस जीता, पति को किया माफ
जब ये एहसास हुआ कि अगर घर बिक गया तो वह बेघर हो सकती है, उन्होंने 2019 की शुरुआत में वित्तीय दुरुपयोग का हवाला देते हुए गिदोन के ख़िलाफ़ एक केस दायर करवाया.
उन्होंने अपने पक्ष में यह तर्क दिया कि इस घर को बनाने और परिवार के पालन में उन्होंने भी भरपूर योगदान किया है.
दो साल बाद, दक्षिण अफ्रीका के संवैधानिक न्यायालय ने उच्च न्यायालय के एक फ़ैसले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि मौजूदा कानूनों में काले जोड़ों और विशेष रूप से काली महिलाओं के साथ भेदभाव किया गया था.
इसके तहत फैसला सुनाया गया कि 1988 से पहले के सभी विवाहों को "इन कम्यूनिटी फ्रॉम प्रॉपर्टी" में बदल दिया जाएगा. जिसका मतलब, महिलाओं को संपत्ति में समान अधिकार देना होगा.
जब यह फ़ैसला आया तो एग्नेस और उनकी सबसे छोटी बेटी बेडरूम में बैठकर ऑनलाइन यह कार्रवाई देख रहे थे.
शुरू में, उन्हें एहसास नहीं हुआ कि उन्होंने केस जीत लिया है.जब उनके वकील ने उन्हें फ़ोन करके इस आदेश के बारे में बताया तब जाकर उन्हें यक़ीन हुआ.
वह कहती हैं, "मैं खुशी से रो रही थी. मुझे लगा कि मेरी लड़ाई के साथ ही आज उन सैकड़ों-हज़ारों महिलाओं को भी उनका हक़ मिल गया."
एग्नेस का कहना है कि यह फ़ैसला निश्चित रूप से संस्कृति के लिहाज़ से और उनकी पीढ़ी की महिलाओं के लिए असामान्य है.
"मेरे लिए, केस जीतना मेरे लिए अब तक की सबसे अच्छी चीजों में से एक है." एग्नेस ने गिदोन को भी माफ़ कर दिया. हालांकि कोर्ट की कार्रवाई अभी जारी ही थी, इसी बीच गिदोन की कोविड-19 के कारण मौत भी हो गई.
अपने निधन से दो दिन पहले, उन्होंने अपनी पत्नी और अपनी बेटियों से माफी मांगी थीं.
एग्नेस कहती हैं, "हमने उन्हें माफ कर दिया है और मैं शांति से हूं. मुझे कुछ भी पछतावा नहीं है और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मैंने अपनी शादी पूरी निभाई."
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