अमेरिका, रूस और चीन के बाद अब पाकिस्तान ने आतंकवादियों को भी दिया धोखा, क्यों है ऐसी फितरत?
पाकिस्तान अगर अमेरिकी ड्रोन को अपने एयरस्पेस का इस्तेमाल करने की इजाजत दे रहा है, तो फिर उसकी अनुमति पाकिस्तानी आर्मी के चीफ कमर जावेद बाजवा ने दी होगी।
इस्लामाबाद, अगस्त 28: धरती पर शायद पाकिस्तान ही एक ऐसा मुल्क है, जो अपनी धोखा देने की फितरत के लिए बुरी तरह से बदनाम है और अब उसके जिगरी दोस्त तालिबान, जिसे उसने अफगानिस्तान पर जीत हासिल करने में भरपूर मदद दी, जिसके लिए पाकिस्तान ने अमेरिका को जमकर धोखा दिया, उसने भी पाकिस्तान पर धोखा देने का आरोप लगाया है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं, कि पाकिस्तान हर किसी को धोखा क्यों देते रहता है और जिन्ना ने जिस 'पाक राज्य' की स्थापना की थी, क्या उसके डीएनए में ही गड़बड़ी है।

आतंकवादियों को भी दिया धोखा
अलकायदा ने जब अमेरिका के ट्विन टावर पर हमला किया था, तो अलकायदा के तत्कालीन प्रमुख ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान ने पनाह दी और उसके रहने का बंदोवस्त किया, लेकिन 2011 में अमेरिकी सील कमांडो ने पाकिस्तान में घुसकर ओसामा बिन लादेन को मार डाला। लेकिन, हमले का मास्टरमाइंड अयमान अल जवाहिरी अब तक जिंदा था, लेकिन पाकिस्तान के धोखेबाजी की वजह से वो पिछले महीने मारा गया, ऐसा तालिबान की तरफ से कहा गया है। दरअसल, अमेरिका ने जवाहिरी को मारने के लिए ड्रोन मिसाइल का इस्तेमाल किया था और अब तालिबान के रक्षा मंत्री मुल्ला मोहम्मद याकूब ने बकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पाकिस्तान पर आरोप लगाए हैं और कहा है, कि अमेरिकी ड्रोन को अफगानिस्तान में हमला करने के लिए पाकिस्तान अपने एयरस्पेस का इस्तेमाल करने दे रहा है। इसके साथ ही तालिबान के नेता ने पाकिस्तान को चेतावनी दी है, कि वो ऐसा नहीं करने दे। यानि, पाकिस्तान ने आतंकवादियों को भी धोखा दे दिया है।

पाकिस्तान ने क्यों दिया धोखा?
पाकिस्तान अगर अमेरिकी ड्रोन को अपने एयरस्पेस का इस्तेमाल करने की इजाजत दे रहा है, तो फिर उसकी अनुमति पाकिस्तानी आर्मी के चीफ कमर जावेद बाजवा ने दी होगी और क्यों दी होगी, तो वो पैसों के लिए। दरअसल, पिछले महीने ही पाकिस्तान के वित्त मंत्री मिफ्ता इस्माइल ने दावा किया था कि पाकिस्तान और आईएमएफ के बीच चार बिलियन डॉलर के कर्ज को लेकर समझौता हुआ है और उससे ठीक एक हफ्ते पहले ही कंगाली से जूझ रहे पाकिस्तान को डिफाल्टर बनने से रोकने के लिए सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा ने अमेरिकी विदेश विभाग के एक बड़े अधिकारी से बात की थी और माना जा रहा है, कि अमेरिका ने इस दौरान जनरल बाजवा के साथ बड़ा 'डील' किया है। वहीं, जवाहिरी की मौत के बाद से ही जनरल बाजवा पर आरोप लग रहे हैं, कि उन्होंने ही अमेरिका को जवाहिरी के बारे में जानकारी दी थी और उसके बाद ही अमेरिका ने जवाहिरी को मार गिराया। यानि, पैसों के लिए पाकिस्तान ने अपने आतंकवादी भाई की जान का सौदा कर दिया।

अमेरिका को कैसे दिया धोखा?
अफगानिस्तान जंग में पाकिस्तान वैसे पैसे तो अमेरिका से ले रहा था, लेकिन वो साथ तालिबान का दे रहा था और इस बात का खुलासा खुद पाकिस्तान के पूर्व आईएसआई चीफ ने किया था। हामिद गुल....जो पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के मुखिया थे, उन्होंने रिटायर्ड होने के बाद एक टीवी इंटरव्यू के दौरान कहा था, कि उन्होंने अमेरिका को अमेरिका की मदद से अफगानिस्तान में हराने का प्लान बनाया था। पाकिस्तान उस वक्त अमेरिका से करोड़ों डॉलर्स लेकर तालिबानी लड़ाकों को ट्रेनिंग दे रहा था और उन पैसों से कश्मीर में आतंक फैलाने की कोशिश कर रहा था। 2014 में पाकिस्तान के टीवी चैनल पर इंटरव्यू के दौरान हामिद गुल ने काफी फक्र के साथ कहा था, कि अफगानिस्तान में अमेरिका को अमेरिका की मदद से पाकिस्तान ने हराया, लिहाजा पाकिस्तान की ये धोखेबाजी भी इतिहास में दर्ज है, जिसे अमेरिकी पूरी जिंदगी में कभी भूल नहीं पाएंगे।

अमेरिका को धोखा देने की रणनीति
डिफेंस एक्सपर्ट्स का साफ कहना है कि तालिबान पूरी तरह से आईएसआई और पाकिस्तान के इशारे पर काम करता था, लेकिन पाकिस्तान की धोखेबाज फितरत के बारे में वो जानता है, लिहाजा अब वो पाकिस्तान को धमका रहा है, कि धोखेबाजी करना बंद करो। दरअसल, पाकिस्तान हमेशा से अमेरिका से पैसे एंठने के लिए अफगानिस्तान को जंग का मैदान बनाए रखना चाहता था। इससे पाकिस्तान को दूसरा फायदा ये होता था कि वो भारत में आतंकवादियों को आसानी से भेज पाता था। पाकिस्तान के ऊपर पहले अमेरिका ने काफी विश्वास किया था और अरबों डॉलर की मदद थी, लेकिन धीरे-धीरे अमेरिका को पाकिस्तान के डबल गेम के बारे में पता चलता गया और फिर अब स्थिति ये हो गई है कि राष्ट्रपति बनने के बाद अभी तक जो बाइडेन ने ना ही पूर्व पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान को ही फोन किया और ना ही मौजूदा प्रधानंमत्री शहबाज शरीफ को ही फोन किया।

चीन को कैसे दिया धोखा?
अमेरिका के अलावा पाकिस्तान ने चीन को भी जमकर धोखा दिया है और सीपीईसी प्रोजेक्ट के नाम पर पाकिस्तानी जनरलों और नेताओं ने चीन को जमकर चूना लगाया है। पाकिस्तान सीपीईसी प्रोजेक्ट के लिए चीन से अरबों डॉलर ले चुका है, लेकिन उन पैसों को डकार गया है, जिसकी वजह से सीपीईसी प्रोजेक्ट का काम बंद हो गया है। वहीं, जब चीन की तरफ से पाकिस्तान पर सीपीईसी प्रोजेक्ट का काम आगे बढ़ाने के लिए दबाव बनाया जाता है, तो पाकिस्तान की तरफ से और पैसे मांगे जाते हैं, जिसे देने से चीन इनकार कर चुका है और यही वजह थी, कि शी जिनपिंग ने पूर्व पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान से बात तक करना बंद कर दिया था।












Click it and Unblock the Notifications