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UAE के बाद एक और अरब देश में बनेगा भव्य हिंदू मंदिर, जमीन देने के लिए पीएम मोदी ने कहा शुक्रिया

पीएम मोदी ने बहरीन के प्रधानमंत्री सलमान बिन हमद अल खलीफा से टेलीफोन पर बातचीत के दौरान कई द्विपक्षीय मुद्दों पर बात की।

नई दिल्ली, फरवरी 02: भारत सरकार लगातार अरब देशों के साथ अपने रिश्ते को मजबूत बना रही है और मोदी सरकार की कोशिश मिडिल ईस्ट में स्थिति देशों के साथ भारत के द्विपक्षीय रिश्ते को नये आयाम पर ले जाना है और इसके लिए मोदी सरकार लगातार 'मिडिल ईस्ट' पॉलिसी पर तेजी से काम कर रही है। इसी कड़ी में भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बहरीन के प्रधानमंत्री सलमान बिन हमद अल खलीफा से टेलीफोन पर बात की है और उनका आभार जताया है। लेकिन, सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात ये थी, कि बहरीन सरकार ने भी हिंदू मंदिर बनाने के लिए जमीन दे दी है।

बहरीन में बनेगा हिंदू मंदिर

बहरीन में बनेगा हिंदू मंदिर

पीएम मोदी ने बहरीन के प्रधानमंत्री सलमान बिन हमद अल खलीफा से टेलीफोन पर बातचीत के दौरान कई द्वीपक्षीय मुद्दों पर बात की और क्षेत्रीय राजनीति के साथ साथ व्यापार और इन्वेस्टमेंट समेत कई मुद्दों पर दोनों नेताओं के बीच चर्चा हुई है। इस दौरान पीएम मोदी ने बहरीन के प्रधानमंत्री को हिंदू मंदिर बनाने के लिए जमीन देने के लिए धन्यवाद दिया है। संयुक्त अरब अमीरात के बाद बहरीन ऐसा दूसरा देश है, जिसने हिंदू मंदिर बनाने के लिए जमीन दी है और रिपोर्ट के मुताबिक, बहरीन में भी भव्य और विशालकाय हिंदू मंदिर का निर्माण किया जाएगा। पीएम मोदी के ट्वीट के मुताबिक, बहरीन सरकार ने स्वामीनारायण मंदिर के निर्माण के लिए जमीन का आवंटन कर दिया है।

अबू धाबी में बन रहा है मंदिर

अबू धाबी में बन रहा है मंदिर

बहरीन दूसरा अरब देश है, जहां पर अब हिंदू मंदिर का निर्माण किया जाएगा। अबू धाबी में पहले ही विश्व के सबसे बड़े मंदिर का निर्माण किया जा रहा है, जिसको लेकर इंजीनियरों ने दावा किया है कि, ये मंदिर इतना ज्यादा मजबूत होगा, कि कम से कम एक हजार सालों तक उसकी किसी भी तरह की मरम्मत की भी जरूरत नहीं होगी। सैकड़ों इंजीनियर्स की टीम मंदिर के निर्माण में लगे हुए हैं। वहीं, पिछले साल सितंबर महीने में बीएपीएस हिंदू मंदिर अबू धाबी परियोजना के कोर टीम के सदस्यों ने कहा था कि अबू धाबी में बनने वाले पहले हिंदू मंदिर की उम्र कम से कम एक हजार से होगी। मंदिर बनाने वाली टीम ने एक वीडियो जारी किया था, जिसमें मंदिर के निर्माण कार्य का काम दिखाया गया था। मंदिर के एक प्रतिनिधि ने खलीज टाइम्स को बताया था कि मंदिर के आधार नींव का काम पूरा हो गया है और गुलाबी बलुआ पत्थर लगाने का काम शुरू होने वाला है।

बलुआ पत्थर की मोटी परत

बलुआ पत्थर की मोटी परत

खलीज टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, धार्मिक नेता और बीएपीएस हिंदू मंदिर के प्रवक्ता पूज्य ब्रह्मविहारी स्वामी ने मंदिर निर्माण को लेकर कहा था कि, अबू मुरीखाह स्थित मंदिर की भूमि में बलुआ पत्थर की मोटी परत बिछाई गई है। मंदिर के विकास की देखरेख करने वाले स्वामी ने कहा कि, "यह काफी ज्यादा मजबूत और काफी ज्यादा कठोर है, और सबसे खास बात ये है कि यह सतह से सिर्फ एक मीटर नीचे था।" खलीज टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मंदिर में लगाने के लिए सफेद संगमरमर पत्थरों पर खास डिजाइन बनाया जा रहा है, जिसके लिए भारत से दर्जनों कारीगर अबूधाबी गये हैं। वहीं, मंदिर निर्माण प्रोजेक्ट से जुड़े स्ट्रक्चरल इंजीनियर डॉ. कॉंग साइ ओंग ने कहा कि, वो इस प्रोजेक्ट का हिस्सा बनकर सम्मानित महसूस कर रहे है। मंदिर निर्माण कराने वाली कमेटी बीएपीएस ने कहा है कि मंदिर बनाने में करीब 888 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।

अबू धाबी का मंदिर कैसा होगा?

अबू धाबी का मंदिर कैसा होगा?

एयर प्रोडक्ट्स के प्रिंसिपल सिविल इंजीनियर संदीप व्यास ने मंदिर को लेकर कहा था कि, प्रारंभिक भू-तकनीकी सर्वेक्षण से पता चला है कि जिस भूखंड पर मंदिर बनाई जानी थी, उसके केंद्र में 20 मीटर मोटा पत्थर मिला है। जिसने सभी लोगों को आश्चर्यकित तक दिया। वहीं, आरएसपी के प्रमुख स्ट्रक्चरल इंजीनियर वसियामेद बहलिम ने कहा कि, "हमें मौजूदा जमीनी स्तर के बहुत करीब सक्षम आधार मिला है, जो आश्चर्यजनक है।" वहीं, शापूरजी पल्लोनजी के प्रोजेक्ट मैनेजर टीनू साइमन ने कहा कि, "जब हमने इस परियोजना को शुरू किया, तो मैं वास्तव में आश्चर्यचकित था क्योंकि खुदाई के स्तर तक पहुंचने से पहले, हम उच्च चट्टान पर पहुंच गए थे। 15 से अधिक वर्षों से मैं जीसीसी में काम कर रहा हूं और पहली बार मुझे इतनी अच्छी नींव इतनी सीमा के भीतर मिली है।"

लोहे का नहीं होगा इस्तेमाल

लोहे का नहीं होगा इस्तेमाल

एक हजार साल तक अडिग रहने वाले इस मंदिर के नींव के डिजाइन के बारे में बात करते हुए बीएपीएस के प्लानिंग सेल के संजय पारिख ने बताया कि, "मंदिर का निर्माण पूरी तरह से पत्थरों से हो रहा है और हमारे प्राचीन शास्त्रों के मुताबिक मंदिर निर्माण में लौह धातु का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा"। उन्होंने कहा कि, मंदिर की नींव को काफी ज्यादा मजबूत करने के लिए फ्लाइ एश का इस्तेमाल किया गया है, जिसमें 55 प्रतिशत सीमेंट और कंक्रीट का इस्तेमाल किया गया है, जिसने इसके कार्बन फुटप्रिंट को कम कर दिया है। बीएपीएस के परियोजना निदेशक जसबीर सिंह साहनी ने कहा कि, कंक्रीट को मजबूती देने के लिए बांस की छड़ें और कांच जैसी बुनियादी सामग्री का उपयोग करने की अनूठी भारतीय तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।

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