फेल हो गई पीएम मोदी की विदेश नीति, चीन की ओर बढ रहे नेपाल के कदम
काठमांडू। जब से नेपाल में नया संविधान लागू हुआ है तब से ही भारत के साथ इसके संबंधों पर असर पड़ने लगा है। नतीजा नेपाल अब चीन के साथ अपनी करीबियां बढ़ा रहा है। नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड चीन की यात्रा पर रवाना होंगे।

भारत और नेपाल के बीच बिगड़ते रिश्तों की अहम वजह है भारत से सटी नेपाल की सीमा पर जारी मधेसियों के विरोध प्रदशर्न। इन प्रदर्शनों के बाद सीमाओं को बंद कर दिया गया।
इसकी वजह से दोनों देशों के बीच जारी व्यापार पर खासा असर पड़ा था। नेपाल ने भारत पर आरोप लगाया था कि भारत ने जानबूझकर सीमाओं पर ट्रकों को रोक लिया है।
जबकि भारत का कहना था कि मधेसी नागरिका नेपाल सीमा के अंदर ट्रकों के जाने नहीं दे रहे हैं। इसके बाद नेपाल ने चीन ने अपनी सीमाएं खोलने और उसकी मदद करने को कहा था।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद पूर्व पीएम प्रचंड ने भारत को आड़े हाथ लेते हुए कहा था कि वह कभी किसी के आगे नहीं झुकते हैं। यह नेपाल के आत्मसम्मान की बात है। प्रचंड 15 अक्टूबर को रवाना होंगे और बताया जा रहा है कि वह चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी मुलाकात कर सकते हैं।
इससे पहले जब नेपाल का संविधान लागू हुआ था और भारत ने इस पर कोई भी प्रतिक्रिया नहीं दी थी, तो भी राजनीति के पंडितों को काफी हैरानी हुई थी।
उनका कहना था कि पाकिस्तान ने नेपाल के नए संविधान का स्वागत किया है और इस पर भारत की चुप्पी हैरान करने वाली है।नेपाल में पिछले 53 दिनों से प्रदर्शन जारी हैं और इस बीच प्रचंड की चीन यात्रा काफी अहम मानी जा रही है।












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