9/11 के 13 वर्ष के बाद और खतरनाक हो गया आतंकवाद का चेहरा

वाशिंगटन। बुधवार को जब अमेरिका के राष्‍ट्रपति बराक ओबामा व्‍हाइट हाउस से आईएसआईएस के खिलाफ अपनी रणनीति का ऐलान कर रहे थे तो दुनिया में एक व्‍यक्ति ऐसा था, जो इस रणनीति को जानने के लिए काफी बेकरार था। यह व्‍यक्ति कोई और नहीं बल्कि अल कायदा का प्रमुख अयमान-अल-जवाहिरी था।

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जब अलकायदा ने दहला दिया अम‍ेरिका को

वही अलकायदा जिसने आज से 13 बरस पहले अमेरिका और पूरी दुनिया को 9/11 के हमलों से दहला दिया था। एक ऐसा हमला जिसने अमेरिका को 200 बिलियन डॉलर का आर्थिक नुकसान पहुंचाया और जिसने करीब 3,000 मासूम लोगों की जान ले ली थी।

भले ही इस हमले को 13 बरस हो चुके हों, लेकिन जब हम इस 13वें बरस पर नजर डालते हैं तो हम देखते हैं आज भी शायद बारुद के उसी ढेर पर बैठी है, जहां पर वह 13 बरस पहले थे।

और तो और 13वें बरस पर दुनिया के अंदर खून-खराबा और बढ़ने की आशंका बढ़ गई है। 13 बरस पहले जहां अलकायदा दुनिया को दहला रहा था तो आज आईएसआईएस दुनिया को डराने के लिए काफी है।

डालिए इस लेख में उन खास बिंदुओं पर नजर जिसके बाद इस बात में जरा भी शक नहीं है कि दुनिया को अब आतंक का मुकाबला करने के लिए पहले से ज्‍यादा तैयारी करनी होगी।

आईएसआईएस और अलकायदा में होड़

आज आईएसआईएस, अलकायदा के सामने एक ऐसा संगठन बनकर उभरा है, जिसने अलकायदा की बादशाहत को चुनौती दे डाली है। विशेषज्ञों की मानें तो अलकायदा कभी भी आईएसआईएस को अपने से आगे निकलते नहीं देख सकता है। खुद को आज भी आतंकी दुनिया का सरताज साबित करने के लिए वह फिर से सक्रिय हो गया है।

लादेन की जगह बगदादी

वर्ष 2001 में ओसामा बिन लादेन के निर्देशन में अमेरिका के वर्ल्‍ड ट्रेड सेंटर और पेंटागन पर हमले किए गए थे। आज कहीं न कहीं लादेन की जगह अबु बकर अल बगदादी ने ले ली है। लादेन से कहीं ज्‍यादा खतरनाक और कहीं ज्‍यादा निर्दयी, बगदादी के लड़ाकों ने अमेरिका की इंटेलीजेंस को भी फेल कर दिया है।

आईएसआईएस से परेशान अलकायदा

इराक में अलकायदा ने कुछ वर्षों पहले अपनी गतिविधियों को बंद कर दिया था। अब वह इस बात को लेकर खासा परेशान है कि आईएसआईएस यहां पर अपनी मजबूत पैठ बना चुका है। अल कायदा आईएसआईएस को कमजोर करने के मकसद से आतंकी हमलों को बढ़ावा दे सकता है।

आईएसआईएस के नए जेहादी

अल कायदा से अलग आईएसआईएस में इस समय उन लड़ाकों को शामिल किया जा रहा है जिनकी उम्र ज्‍यादा नहीं है और जो आईएसआईएस के ग्‍लोबल जे‍हादी मूवमेंट का हिस्‍सा बनने से जरा भी नहीं हिचकिचाते हैं। अलकायदा से अलग आईएसआईएस के पास कई ऐसी रणनीतियां हैं, जिसका पता अमेरिका और ब्रिटेन जैसे किसी भी देश को अभी तक नहीं लग सका है।

अलकायदा की नई फौज हो रही तैयार

अलकायदा ने यमन, लीबिया, सऊदी अरब और दूसरे हिस्‍सों में रहने वाले उन नौजवान मुसलमानों से संगठन में शामिल होने की अपील की है जो बगदादी की सत्‍ता को चुनौती देने की ख्‍वाहिश रखते हैं। अलकायदा अपने लड़कों की वही फौज तैयार कर रहा है जिसके लिए इस समय आईएसआईएस जाना जाता है।

आईएसआईएस और अलकायदा दोनों का टारगेट भारत

आईएसआईएस और अलकायदा दोनों भारत में आतंक की नई इबारत लिखने को बेकरार हैं। हाल ही में जवाहिरी का नया वीडियो जहां इस बात को साबित करने के लिए काफी है तो वहीं भारत से आईएसआईएस का हिस्‍सा बनने के लिए इराक गए 300 भारतीय, भारत में आईएसआईएस की गतिविधियों का साफ सुबूत है।

सोशल मीडिया में महारत

वर्ष 2001 में जब अमेरिका पर हमला हुआ तो उस समय सोशल मीडिया इस कदर पॉपुलर नहीं था, लेकिन अब आतंकी संगठन सोशल मीडिया के जरिए अपनी गतिविधियों को संचालित करने लगे हैं। उनके बीच सोशल मीडिया का प्रयोग इस तरह की कोड भाषा में हो रहा है कि किसी को भी उनकी गतिविधियों को पता नहीं लग पाता है।

गैर मुस्लिमों के लिए नफरत

13 वर्ष के बाद अगर आतंकी संगठनों की एक मानसिकता नहीं बदली है तो वह है गैर-मुस्लिम समुदाय के लिए बढ़ती नफरत। पिछले दिनों जेम्‍स फॉले और स्‍टीफन सोटोलॉफ की निर्ममता से हुई हत्‍या इस बात को साबित करती है।

सामने आते नए आतंकी संगठन

नाइजीरिया, सोमालिया और सूडान जैसे देशों में सक्रिय बोको हराम के एक प्रमुख नेता की ओर से पिछले दिनों घोषणा की गई है कि वह खुद को अफ्रीकी देशों का खलीफा घोषित करने की तैयारी में है। आईएसआईएस ने बोको हराम को अपना समर्थन देने का ऐलान कर डाला है।

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