चीन की आक्रामक रवैये से दहशत में ताइवान, ऑस्ट्रेलिया से मांगी आपातकालीन मदद, युद्ध की आशंका?
पिछले तीन दिनों में चीन ने ताइवान के हवाई क्षेत्र में रिकॉर्ड संख्या में मिलिट्री वारक्राफ्ट्स भेजे हैं। जिसको लेकर आशंका जताई जा रही है कि चीन कभी भी ताइवान पर हमला कर सकता है।
ताइपे, अक्टूबर 04: चीन की आक्रामक नीति ने ताइवान को बुरी तरह से डरा दिया है और अब आशंका इस बात को लेकर जताई जा रही है कि कभी भी चीन ताइवान के ऊपर हमला कर सकता है, जिसे देखते हुए ताइवान ने ऑस्ट्रेलिया से मदद की गुहार लगाई है। ताइवान ने ऑस्ट्रेलिया से मदद की अपील करते हुए कहा है कि चीन से उसे आक्रमण का खतरा है।

ताइवान की ऑस्ट्रेलिया से अपील
ताइवान के विदेश मंत्री ने ऑस्ट्रेलिया से मदद की अपील की है और कहा है कि उसे चीन से कभी भी हमले का डर है। ताइवान के विदेश मंत्री जोसेफ वू ने कहा कि, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों को ताइवान के साथ घनिष्ठ संबंध विकसित करने चाहिए, क्योंकि उसे अपने 'विशाल पड़ोसी' से बढ़ते खतरे का सामना करना पड़ रहा है, जिसने हमेशा ताइवान को अपने क्षेत्र का हिस्सा माना है न कि एक स्वतंत्र राष्ट्र। ताइवान ने कहा है कि पिछले एक साल से चीन लगातार अपने मिलिट्री एयरक्राफ्ट और फाइटर जेट्स को ताइवान के क्षेत्र में भेज रहा है और पिछले तीन दिनों में तो चीन ने रिकॉर्ड बनाते हुए 100 से ज्यादा फाइटर जेट्स ताइवान भेजे हैं। ताइवान रक्षा मंत्रालय ने कहा कि, 39 पीएलए विमानों ने पिछले शनिवार को उसके क्षेत्र में प्रवेश किया था और इन चीनी एयरक्राफ्ट्स को देखकर ऐसा लग रहा था, मानो ये कभी भी ताइवान पर हमला करने वाले हों।

''अंत तक लड़ेगा ताइवान''
ताइवान सरकार के वरिष्ठ सदस्य जोसेफ वू ने कहा कि, "अगर चीन ताइवान के खिलाफ युद्ध शुरू करने जा रहा है तो हम अंत तक लड़ेंगे, और यह हमारी प्रतिबद्धता है।" उन्होंने कहा कि, ''मुझे यकीन है कि अगर चीन ताइवान के खिलाफ हमला करने जा रहा है, तो उसे भी बहुत नुकसान होगा।'' ऑस्ट्रेलिया से मदद की अपील करते हुए जोसेफ वू ने कहा कि, संयुक्त राज्य अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे 'समान विचारधारा वाले' देशों के समर्थन की आवश्यकता है, जो ताइवान को एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में औपचारिक रूप से मान्यता नहीं देते हैं, लेकिन इस क्षेत्र में चीन की क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाओं को रोकने के लिए इनके साथ की काफी आवश्यकता है।

चीन के खिलाफ मदद की अपील
उन्होंने कहा कि, "हम ऑस्ट्रेलिया सहित अन्य समान विचारधारा वाले भागीदारों के साथ सुरक्षा या खुफिया सुचनाएं आदान-प्रदान करना चाहते हैं, इसलिए ताइवान युद्ध की स्थिति से निपटने के लिए बेहतर तरीके से तैयार है और अब तक ऑस्ट्रेलिया के साथ हमारे संबंध बहुत अच्छे हैं और हम इसकी सराहना करते हैं।'' आपको बता दें कि, 2 अक्टूबर को चीन ने रिकॉर्ड संख्या में मिलिट्री फाइटर जेट्स को ताइवान के क्षेत्र में भेजा था, जिसपर प्रतिक्रिया देते हुए जोसेफ वू ने कहा था कि, ''धमकी? बेशक। यह अजीब बात है कि #PRC अब बनावटी बहाने नहीं बनाता है।'

ऑकस का ताइवान ने किया स्वागत
ताइवान ने हाल ही में अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के बीच परमाणु पनडुब्बियों के समझौते, AUKUS की घोषणा का स्वागत किया है। जोसेफ वू ने कहा कि, "हमें यह देखकर खुशी हो रही है कि ताइवान के समान विचारधारा वाले साझेदार, संयुक्त राज्य अमेरिका, यूके और ऑस्ट्रेलिया, एक मजबूत डिफेंस सिस्टम विकसित करने के लिए एक साथ मिलकर काम कर रहे हैं ताकि हम इंडो-पैसिफिक की रक्षा कर सकें।" उन्होंने इस तथ्य का स्वागत किया कि, ऑस्ट्रेलिया 'इंडो-पैसिफिक में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए अधिक जिम्मेदारी निभाएगा'।

ताइवान पर ऑस्ट्रेलिया के विचार
ऑस्ट्रेलिया ने पारंपरिक रूप से चीन-ताइवान संबंधों के लिए एक कूटनीतिक दृष्टिकोण अपनाया है। और अब तक खुल तौर पर ना तो ऑस्ट्रेलिया चीन का समर्थन करता और ना ही ताइवान का समर्थन करता है। इसके साथ ही ऑस्ट्रेलिया कहता आया है कि चीन और ताइवान को आपसी बातचीत के जरिए अपने विवादों को सुलझाना चाहिए, ना कि लड़ाई के जरिए। ऑस्ट्रेलिया कई बार दोनों देशों को बातचीत करने का आग्रह करता आया है। लेकिन, अब चीन को लेकर ऑस्ट्रेलिया आक्रामक हो रहा है और हाल अमेरिका के साथ महत्वपूर्ण करार के बाद ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका ने एक सुर में कहा कि, ताइवान के साथ संबंधों को मजबूत करने पर दोनों ही देश जोर देंगे, जो एक प्रमुख लोकतंत्र है और दोनों ही देशों के लिए एक महत्वपूर्ण भागीदार है। वहीं, ऑस्ट्रेलिया और चीन के संबंध ऐतिहासिक स्तर तक खराब हो चुके हैं, लिहाजा माना जा रहा है कि अब ऑस्ट्रेलिया खुलकर ताइवान का साथ दे सकता है।












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