अफ़ग़ानिस्तान: मुजाहिदीनों की औरतों से जबरन शादी के दावे पर बोला तालिबान

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अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल में इस समय तनाव चरम पर है क्योंकि तालिबान तेज़ी से शहर की ओर बढ़ रहा है.

तालिबान लड़ाकों ने रविवार की सुबह पूर्वी शहर जलालाबाद को अपने क़ब्ज़े में ले लिया था और इस समय सरकार के नियंत्रण में सिर्फ़ काबुल जैसा बड़ा शहर है.

शनिवार को सरकार के नियंत्रण वाले उत्तरी गढ़ मज़ार-ए-शरीफ़ को तालिबान ने अपने क़ब्ज़े में ले लिया था.

सरकारी सुरक्षाबलों के नाकाम रहने के बाद राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी के ऊपर लगातार इस्तीफ़े का दबाव बढ़ रहा है.

राष्ट्रपति पर अब यह चुनने का दबाव है कि वो आत्मसमर्पण करें या राजधानी को बचाने के लिए लड़ाई करें.

हालांकि, अमेरिका ने कहा है कि उसने संकटग्रस्त देश से अपने नागरिकों को निकालने के लिए 5,000 सुरक्षाबलों को तैनात किया है.

राष्ट्रपति जो बाइडन ने अफ़ग़ानिस्तान से अमेरिकी सुरक्षाबलों के बाहर जाने के फ़ैसले का बचाव किया है और कहा है कि वो 'देश के दूसरे नागरिक संघर्ष में अमेरिकी मौजूदगी को' उचित नहीं ठहरा सकते हैं.

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वहीं, दूसरी ओर अफ़ग़ानिस्तान में जैसे-जैसे तालिबान काबुल की ओर आगे बढ़ रहा है वैसे-वैसे अलग-अलग रिपोर्टें सामने आ रही हैं, जिनमें महिलाएं अपनी सुरक्षा को लेकर दुनिया से अपील कर रही हैं.

कुछ रिपोर्टों में यह दावा किया गया है कि तालिबान के मुजाहिदीनों से महिलाओं की ज़बरदस्ती शादी की जा रही है.

क्या बोला तालिबान

तालिबान ने महिलाओं से ज़बरदस्ती शादी करने के दावों को ख़ारिज करते हुए कहा है कि यह सब प्रॉपेगैंडा हैं, जो तालिबान को बदनाम करने के लिए फैलाया जा रहा है.

तालिबान के प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने इस पर सफ़ाई देते हुए ट्वीट किया है, "ये सभी दावे कि अफ़ग़ानिस्तान इस्लामी अमीरात के सुरक्षाबलों के लोग अपनी युवा बेटियों की शादी मुजाहिदीनों से कर रहे हैं ये झूठ है. यह एक ज़हरीला प्रॉपेगैंडा है."

तालिबान पर जबरन संपत्ति छीनने के आरोप भी लग रहे हैं जिसको लेकर भी उसने सफ़ाई दी है.

सुहैल शाहीन ने ट्वीट किया, "अफ़गानिस्तान इस्लामी अमीरात किसी की निजी संपत्ति में रुचि नहीं रखता है, (न किसी की कार, ज़मीन, घर, बाज़ार और दुकानों में), बल्कि वह राष्ट्र की ज़िंदगियों और संपत्तियों की सुरक्षा को अपनी प्राथमिक ज़िम्मेदारी मानता है."

इससे पहले तालिबान के प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने ट्वीट करके कहा था कि 'जबरन शादी करने और लोगों और क़ैदियों को मारने की बातें झूठ हैं जो कि काबुल प्रशासन फैला रहा है.'

इसके साथ ही सुहैल शाहीन ने ट्वीट करके मुजाहिदीनों को लोगों और संपत्तियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने को कहा है.

उन्होंने ट्वीट किया, "मुजाहिदीनों को भंडार, सार्वजनिक सुविधाओं, सरकारी दफ़्तरों, सरकारी दफ़्तरों के साज़ो-सामान, पार्क, सड़कों, पुलों को लेकर ख़ासा ध्यान देना चाहिए. ये राष्ट्र की संपत्ति और भरोसा है, उनके साथ कोई व्यक्तिगत छेड़छाड़ और लापरवाही नहीं की जानी चाहिए बल्कि सख़्ती से बचाव किया जाना चाहिए."

जलालाबाद में क्या चल रहा है?

तालिबान जहाँ एक ओर हिंसा न करने की बात कह रहा है वहीं दूसरी ओर वो धीरे-धीरे राजधानी काबुल की ओर बढ़ रहा है.

रविवार की सुबह ऐसी रिपोर्ट सामने आई हैं जिसमें दावा किया गया है कि तालिबान ने बिना कोई गोली चलाए जलालाबाद शहर को नियंत्रण में ले लिया है.

रॉयटर्स न्यूज़ एजेंसी को शहर में तैनात एक अफ़ग़ान कर्मचारी ने बताया, "जलालाबाद में कोई संघर्ष नहीं हुआ है क्योंकि गवर्नर ने तालिबान के आगे पहले आत्मसमर्पण कर दिया है.

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"तालिबान को जाने के लिए रास्ता देना लोगों की ज़िंदगी बचाने का एकमात्र रास्ता था."

जलालाबाद को नियंत्रण में लेने का अर्थ है कि तालिबान ने पाकिस्तान को देश से जोड़ने वाले रास्ते को भी नियंत्रित कर लिया है.

मज़ार-ए-शरीफ़ को कुछ घंटों में नियंत्रण में लेने के बाद यह शहर उसने क़ब्ज़ा लिया है. मज़ार-ए-शरीफ़ बाल्ख़ प्रांत की राजधानी और देश का चौथा बड़ा शहर है.

बाल्ख़ के एक वकील अब्बास इब्राहिमज़ादा ने समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस से कहा कि राष्ट्रीय सेना ने पहले समर्पण किया जिसके बाद सरकार समर्थित सेनाओं और अन्य मिलिशिया ने भी समर्पण कर दिया.

तालिबान लड़ाकों ने अब तक 34 प्रांतीय राजधानियों में से 23 को अपने क़ब्ज़े में ले लिया है.

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क्या चाह रहे हैं ग़नी

अफ़ग़ान राष्ट्रपति भवन के सूत्रों ने बीबीसी को बाताया कि राष्ट्रपति ग़नी काबुल को तालिबान के हवाले नहीं करेंगे और उन्होंने दावा किया कि अन्य प्रांतों की राजधानी अफ़ग़ान सुरक्षाबलों ने जानबूझकर तालिबान के हवाले की.

हालांकि, बीते चार दिनों में तालिबान कंधार, लश्कर गाह, हेरात और ग़ज़नी समेत कई शहरों पर कंट्रोल हासिल कर चुका है.

तालिबान को इन शहरों पर क़ब्ज़ा किए कुछ ही दिन हुए हैं शायद इसलिए पाबंदियां नज़र नहीं आ रही हैं जो उनके पहले दौर में थीं लेकिन अब भी उन शहरों में जिस चीज़ पर तालिबान पाबंदियां लगाना चाहते हैं वो लगाई जा चुकी हैं.

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सरकारी टीवी और रेडियो 'शरीयत की आवाज़' में तब्दील

लश्कर गाह, हेरात, कंधार और ग़ज़नी में अफ़ग़ानिस्तान के सरकारी टीवी और रेडियो जिसे अब तक 'आरटीए' या 'मिल्ली रेडियो टेलीवज़न' कहा जाता था, तालिबान के कंट्रोल के बाद से 'शरीयत शग़' या 'शरीयत की आवाज़' में तब्दील हो गए हैं.

इन टीवी और रेडियो पर संगीत और ड्रामे भी अब दिखाई और सुनाई नहीं दे रहे.

इसके साथ बीते 20 सालों में अफ़ग़ानिस्तान में कई एफ़एम रेडियो स्टेशन भी क़ायम किए गए थे लेकिन इन शहरों में अब वो एफ़एम रेडियो या तो बंद कर दिए गए हैं या फिर वहां पर भी संगीत प्रसारित नहीं किया जा रहा है और सिर्फ़ इस्लामी भाषण और तालिबान के गीत प्रसारित किए जा रहे हैं.

इन शहरों मे अब संगीत और गाने किसी भी रेडियो से प्रसारित नहीं हो रहे, हालांकि अभी तक गाड़ियों में तालिबान ने पहले की तरह संगीत के ख़िलाफ़ कार्रवाइयां शुरू नहीं कीं.

ग़ौरतलब है कि साल 1996 से 2001 तक अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के दौर में संगीत पर सख़्त पाबंदी लगाई गई थी और उनके अधिकारी यात्रियों और निजी गाड़ियों में संगीत रोकने के लिए सख़्त चेकिंग किया करते थे और लोगों को सज़ाएं भी देते थे.

उस वक़्त तालिबान जिन जिन इलाक़ों पर कंट्रोल हासिल करते थे वहां पर उसी वक़्त टीवी, वीसीआर, ऑडियो कैसेट्स और डिश एंटीना को आग लगा देते थे.

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