अफगानिस्तान: तालिबान ने अफीम की खेती, नशीली दवाओं के व्यापार पर प्रतिबंध लगाया

काबुल, 04 अप्रैल। तालिबान अफगानिस्तान के अफीम व्यापार को रोकने के लिए कदम उठा रहा है, यह साफ नहीं है कि तालिबान सरकार लाखों किसानों की आय के इस स्रोत को बदलने की क्या योजना बना रही है.
तालिबान ने रविवार को कहा कि वह अफीम की खेती पर प्रतिबंध लगा रहा है. इसका इस्तेमाल हेरोइन जैसे अवैध ड्रग्स के उत्पादन के लिए कच्चे माल के रूप में किया जाता है. अफगानिस्तान के इस्लामिक अमीरात के सर्वोच्च नेता हैबतुल्लाह अखुंदजादा द्वारा जारी एक आदेश के मुताबिक, "सभी अफगानों को सूचित किया जाता है कि अब से पूरे देश में अफीम या अफीम की खेती पर सख्त प्रतिबंध होगा."
प्रतिबंध ऐसे समय पर लगाया गया है जब दक्षिणी अफगानिस्तान में अफीम की कटाई का मौसम है. तालिबान के एक प्रवक्ता ने कहा कि अगर किसानों ने अफीम की कटाई की तो उन्हें जेल हो सकती है और उनकी फसल जलाई जा सकती है. आदेश में हेरोइन, हशीश और शराब के व्यापार को भी प्रतिबंधित किया गया है.
फलती-फूलती अफीम अर्थव्यवस्था
अफीम अफगानिस्तान में रोजगार और आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत है. लाखों किसान जीवित रहने के लिए अफीम की खेती पर निर्भर रहते हैं. जब से तालिबान सरकार पिछले साल अफगानिस्तान में सत्ता में लौटी है, वह अंतरराष्ट्रीय मान्यता हासिल करने पर जोर दे रही है और और खुद पर आर्थिक प्रतिबंध हटवाने की कोशिश कर रही है.
इस संबंध में अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा काबुल सरकार से की गई प्रमुख मांगों में से एक, अफीम की खेती पर प्रतिबंध की रही है. तालिबान सरकार पर लगाए गए प्रतिबंध विशेष रूप से अफगानिस्तान की बैंकिंग प्रणाली और व्यापार विकास के लिए हानिकारक हैं.
अफगान मीडिया टोलो न्यूज ने बताया कि अफीम पर प्रतिबंध के आलोक में, उप प्रधानमंत्री अब्दुल सलाम हनफी ने किसानों के लिए वैकल्पिक व्यवसाय खोजने में मदद करने के लिए अंतरराष्ट्रीय दानदाताओं से सहयोग मांगा है.
संयुक्त राष्ट्र ड्रग्स ऐंड क्राइम कार्यालय के मुताबिक अफगानिस्तान दुनिया में अफीम का शीर्ष स्रोत है, जो दुनिया के अफीम उत्पादों की आपूर्ति का 80 फीसदी से अधिक है. संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के मुताबिक अफगानिस्तान अफीम उत्पादों के उत्पादन से कम से कम 1.8 अरब डॉलर का वार्षिक राजस्व हासिल करता है.
एए/वीके (एपी, डीपीए)
Source: DW












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