Afghanistan Row: तालिबान के बयान पर तसलीमा नसरीन का तंज, कहा-'शरिया में तो महिलाओं के लिए अधिकार ही नहीं'
ढाका, 16 अगस्त। अफगानिस्तान पर अब तालिबान का कब्जा हो गया है। रविवार रात को ही तालिबान के लड़ाकों ने राष्ट्रपति भवन को अपने कब्जे में ले लिया, जिसके बाद से वहां के स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई है। तो वहीं तालिबान ने कहा है कि वह अफगानिस्तान में खुली और समावेशी इस्लामी सरकार चाहता है। हम महिलाओं और अल्पसंख्यकों के अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान करेंगे, किसी को डरने की जरूरत नहीं है, जिस पर अब मशहूर लेकिन विवादास्पद बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन ने तंज कसा है।

उन्होंने ट्वीट किया है कि 'तालिबान ने कहा कि वे शरिया कानून के तहत महिलाओं और अल्पसंख्यकों के अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान करेंगे। लेकिन समस्या यह है कि शरिया कानून में महिलाओं और अल्पसंख्यकों के अधिकार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं है।' नसरीन का ये ट्वीट इस वक्त सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग जमकर इस पर कमेंट कर रहे हैं।
महिलाओं के स्कूल जाने से रोका नहीं गया है: तालिबान प्रवक्ता
हालांकि इससे पहले तालिबान के प्रवक्ता मोहम्मद सोहेल ने एक बयान जारी किया था और उसमें कहा था कि 'तालिबान के कब्जे वाले इलाकों में कहीं पर भी महिलाओं को स्कूल जाने से रोका नहीं गया है, बस उन्हें हिजाब पहनना होगा। हम महिलाओं की शिक्षा के खिलाफ नहीं है लेकिन हम अपने नियमों के खिलाफ भी नहीं जा सकते हैं।'

अशरफ गनी ने छोड़ा अफगानिस्तान, लिखी FB पोस्ट
तालिबान के कब्जे के बाद राष्ट्रपति अशरफ गनी ने देश छोड़ दिया है, हालांकि अभी तक ये नहीं मालूम कि वो हैं कहां। उन्होंने एक फेसबुक पोस्ट लिखी है, जिसमें उन्होंने कहा है कि 'खून-खराबा टालने के लिए देश छोड़ा है ताकि काबुल के लाखों लोगों की जान खतरे में ना पड़े।' लेकिन सोशल मीडिया पर लोग उनसे काफी नाराज चल रहे हैं और उन्हें कायर करार दे रहे हैं।
क्या है शरिया कानून
इस्लामी कानून यानी शरिया अक्सर आलोचना के केंद्र में रहता है क्योंकि ये कानून काफी सख्त है। समाज में हर धर्म और जाति के लोग हैं, जिनके अपने-अपने नियम-कानून हैं। ये नियम समाज में एक अनुशासन मेंटन रखने के लिए बनाए गए हैं। शरिया भी मुस्लिम समाज के भीतर रहने के उन्हीं नियमों का एक समूह है, जिसे इस्लामिक लोग मानते हैं।

मालूम हो कि सातवीं शताब्दी से पहले अरब में 'कबीलाई समाज' राज करता था लेकिन जब इस्लाम की स्थापना हुई तो 'कबीलाई समाज' भी इस्लाम के नियम धीरे-धीरे मानने लगा। मोटे तौर पर कह सकते हैं कि कुरान की उल्लेखित रिवाजों को शरिया कहते हैं, जो कि एक मुसलमान की आर्थिक,व्यवाहरिक, सांस्कृतिक जीवन के नियम बनाता है। इसके अपने कानून है, लेकिन विश्व के देशों ने अपने-अपने हिसाब से इसके कानून बना लिए, जो कि कहीं-कहीं काफी सख्त हैं, जिनका पालन करना काफी कठिन है।












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