Afghanistan Row: तालिबान के लड़ाकों के सामने प्रदर्शन करती दिखीं अफगानी महिलाएं, Video
काबुल, 18 अगस्त।अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा होने के बाद से पूरे देश में दहशत और अफरा-तफरी का माहौल है। लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भाग रहे हैं। तालिबान के शासन से सबसे ज्यादा डर महिलाओं को हैं, उन्हें डर सता रहा है कि अब उन से काम का, शिक्षा का और आगे बढ़ने का अधिकार छीन लिया जाएगा और अब उन्हें गुलामों की तरह जिंदगी व्यतीत करनी होगी। एक तरफ जहां तालिबान के डर से अफगानी पुरुष देश छोड़ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ बहादुर महिलाएं अपने अधिकारों के लिए प्रदर्शन करती हुईं आज काबुल की सड़कों पर नजर आईं, जिनकी तस्वीरें और वीडियो इस वक्त सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।
Recommended Video

ईरानी पत्रकार मसीह अलीनेजाद ने ट्विटर पर एक वीडियो शेयर किया है। जिसमें चार अफगान महिलाओं को तालिबान लड़ाकों से घिरे हुए काबुल की एक सड़क पर कुछ पोस्टर पकड़े देखा जा सकता है। जिन्हें तालिबान के लड़ाके बड़े गौर से देख रहे हैं और उनके करीब भी जाते हैं लेकिन महिलाएं बिना डरे अपनी जगह पर खड़ी रहती हैं। इन पोस्टर्स पर महिलाओं की शिक्षा और अधिकार की बातें लिखी हैं।
मसीह अलीनेजाद ने Tweet किया Video
वीडियो को ट्वीट करते हुए मसीह अलीनेजाद ने लिखा है कि 'ये बहादुर महिलाएं तालिबान के विरोध में काबुल में सड़कों पर उतरीं हैं। ये अपने काम का अधिकार, शिक्षा का अधिकार और राजनीतिक भागीदारी का अधिकार मांग रही हैं, उम्मीद करती हूं कि उनके साथ देश के और लोग भी जुड़ेंगे।'
मुल्ला बरादर बनेगा अगला राष्ट्रपति
मालूम हो कि ऐसी खबरें हैं कि मुल्ला बरादर को ही अफगानिस्तान का अगला राष्ट्रपति बनाया जाएगा। हालांकि अफगानिस्तान में शरिया कानून लागू करने के ऐलान के बीच तालिबान ने कहा है कि वे शरिया कानून के तहत महिलाओं और अल्पसंख्यकों के अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान करेंगे।
क्या है शरिया कानून
इस्लामी कानून यानी शरिया की अक्सर आलोचना के केंद्र में रहता है क्योंकि ये कानून काफी सख्त है। समाज में हर धर्म और जाति के लोग होते हैं, जिनके अपने-अपने धर्म और कानून होते हैं। ये नियम समाज में एक अनुशासन रखने के तहत बनाए गए हैं। शरीयत भी मुस्लिम समाज के भीतर रहने के उन्हीं नियमों का एक समूह है, जिससे पूरी दुनिया में इस्लामिक समाज संचालित होता है। सातवीं शताब्दी से पहले अरब में कबीलाई समाज हुआ करता था।
लेकिन जब इस्लाम की स्थापना हुई तो कबीलाई समाज भी इस्लाम के नियम मानने लगा था, मोटे तौर पर कह सकते हैं कि कुरान की उल्लेखित रिवाजों को शरिया कहते हैं, जो कि एक मुसलमान की आर्थिक,व्यवाहरिक, सांस्कृतिक जीवन के नियम बनाता है। इसके अपने नियम और कानून है, लेकिन विश्व के देशों में अपने-अपने हिसाब से इसमें नियम बना लिए, जो कि कहीं-कहीं काफी सख्त हैं।












Click it and Unblock the Notifications