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तालिबान ने अफगानिस्तान को किया बर्बाद, UN ने कहा, कष्ट झेल रही हैं महिलाएं

यूएन ने कहा कि,तालिबान के अफगानिस्तान पर कब्जे के बाद से वहां की स्थिति तो खराब है लेकिन उससे भी बदतर हालात से वहां की महिलाएं, लड़कियां गुजर रही हैं।

काबुल, 16 जून : संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार समूह की प्रमुख मिशेल बाचेलेट ने अफगानिस्तान (afghanistan) की स्थिति पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि, अफगान नागरिक अब तक के सबसे बुरे दौर से गुजर रहे हैं। बाचेलेट ने बुधवार को मानवाधिकार परिषद में एक सत्र के दौरान अफगान मसले पर अपनी चिंता जाहिर की।

बुरे दौर से गुजर रहा अफगानिस्तान

बुरे दौर से गुजर रहा अफगानिस्तान

उच्चायुक्त मिशेल बाचेलेट ने चिंता जाहिर करते हुए आगे कहा कि, पिछले साल अगस्त में तालिबान ने अफगानिस्तान की सत्ता पर कब्जा कर लिया था, इसके बाद से देश गहरे आर्थिक, सामाजिक, मानवीय और मानवाधिकार संकट में डूब गया है। संयुक्त राष्ट्र ने अफगानिस्तान में महिलाओं की स्थिति पर चर्चा करते हुए आगे कहा कि, तालिबान के दमनकारी नीतियों के खिलाफ वहां की महिलाओं ने सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और अपने अधिकारों की मांग की। उन्होंने अफगान महिलाओं की साहस की प्रशंसा की।

स्थिति ज्यादा खराब

स्थिति ज्यादा खराब

यूएन ने कहा कि, तालिबान के अफगानिस्तान पर कब्जे के बाद से वहां की स्थिति तो खराब है लेकिन उससे भी बदतर हालात से वहां की महिलाएं, लड़कियां गुजर रही हैं। यूएन के उच्चायुक्त ने कहा कि, तालिबान ने लड़कियों की शिक्षा पर रोक लगा दी है। उसके इस फरमान से 11 लाख लड़कियों की शिक्षा प्रभावित हुईं। इतना ही नहीं महिलाओं को रोजगार से वंचित कर दिया गया। इनमें एनजीओ कार्यकर्ता भी शामिल है। तालिबान शासन ने अफगानिस्तान में महिला अधिकारों को प्रभावित करते हुए उन्हें राजनीति से भी दूर कर दिया गया।

बुनियादी सुविधाओं से दूर महिलाएं

बुनियादी सुविधाओं से दूर महिलाएं

महिलाओं को जिन बुनियादी सुविधाओं की जरूरत होती है, उनसे उन्हें वंचित कर दिया गया। महिलाओं की आवाजाही पर रोक लगा दी गई। तालिबान शासन ने महिला स्वतंत्रता को खत्म कर दिया है । मिशेल ने आगे कहा कि , महिलाओं को मिलने वाली बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं से दूर कर दिया गया है।

तालिबान कर रहा महिलाओं का शोषण

तालिबान कर रहा महिलाओं का शोषण

संयुक्त राष्ट्र की उच्चायुक्त ने स्पष्ट करते हुए कहा कि, अफगानिस्तान में जो आज हम देख रहे हैं, वह महिलाओं का संस्थागत, व्यवस्थित उत्पीड़न है। महिलाएंम तेजी से सबसे खराब स्थिति का सामना कर रही हैं। महिलाओं के खिलाफ सभी प्रकार के भेदभाव के उन्मूलन पर कन्वेंशन सहित अंतर्राष्ट्रीय संधियों की पुष्टि होने के बावजूद, वास्तविक अधिकारी अपने अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का पालन करने से काफी दूर हैं।

UN की अफगानिस्तान पर नजर

UN की अफगानिस्तान पर नजर

उन्होंने कहा, 'मैं वास्तव में अधिकारियों से महिलाओं के अधिकारों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का सम्मान करने, अफगान महिलाओं के साथ एक सार्थक संवाद स्थापित करने और उनकी आवाज सुनने का आह्वान करती हूं। यूएन न्यूज के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पूर्व अधिकारियों और सुरक्षा बलों को दी गई सामान्य माफी पर चिंता व्यक्त की है। अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (यूएनएएमए) की मानवाधिकार सेवा को मनमानी गिरफ्तारी, नजरबंदी, दुर्व्यवहार और अतिरिक्त न्यायिक हत्याएं की विश्वसनीय रिपोर्ट प्राप्त हो रही है। UNAMA ने स्कूलों, बाजारों और सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क सहित नागरिकों पर हो रहे हमलों की रिकॉर्ड रख रहा है।

जातीय और धार्मिक अल्पसंख्यकों पर सीधे हमला

जातीय और धार्मिक अल्पसंख्यकों पर सीधे हमला

मिशेल ने कहा कि, जातीय और धार्मिक अल्पसंख्यकों पर भी सीधे हमला किया गया है। मैं वास्तविक अधिकारियों को उनके नियंत्रण के अधीन सभी अफगानों की रक्षा करने की उनकी (अधिकारियों) जिम्मेदारी की याद दिलाती हूं। बाचेलेट ने उत्तरी प्रांतों में नागरिकों के खिलाफ कथित मानवाधिकारों के उल्लंघन और दुर्व्यवहार पर भी चिंता व्यक्त की।

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