'अजी सुनती हो' के खिलाफ महिलाओं ने खोला मोर्चा, शुरू किया कैंपेन
अफगानिस्तान में महिला अधिकारों के लिए काम करने वाली सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया पर #WhereIsMyName अभियान की शुरुआत की है।
नई दिल्ली। कट्टरपंथ को लेकर पहचाने जाने वाले अफगानिस्तान में महिलाओं की स्थिति बेहद गंभीर है। यहां महिलाओं का नाम लेने की संस्कृति नहीं है। महिलाओं को यहां के समाज में किसी की बेगम, मां, बेटी या फिर बहन के नाम से पहचाना जाता है। हालांकि अब अफगानिस्तान की महिलाओं ने अपनी पहचान बनाने के लिए आवाज उठाई है। अपने नाम से अपनी पहचान बनाने के लिए यहां की महिलाओं ने खास कैंपेन शुरू किया है।

#WhereIsMyName अभियान की शुरुआत
अफगानिस्तान में महिला अधिकारों के लिए काम करने वाली सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया पर #WhereIsMyName अभियान की शुरुआत की है। इस अभियान के जरिए महिला सामाजिक कार्यकर्ताओं की कोशिश अफगानिस्तान की महिलाओं को पहचान दिलाने की है। सोशल मीडिया पर उनके कैंपेन को खासी लोकप्रियता मिल रही है। दरअसल अफगानिस्तान में महिलाओं के नाम लेने की परंपरा नहीं रही है। अगर कोई किसी महिला का नाम लेता है तो इसे नाराजगी के तौर पर देखा जाता है।
हालात ये हैं कि अफगानिस्तान में महिलाओं को शायद ही कभी नाम से बुलाया जाता हो। रॉयटर्स की रिपोर्ट की मानें तो यहां लोगों के जन्म प्रमाण पत्र में उनकी माता के नाम का जिक्र नहीं होता है। इतना ही नहीं अगर महिला की मौत हो जाए तो उनकी कब्र के पत्थर पर भी उनका नाम नहीं लिखा जाता है। एक तरह से देखा जाए तो अफगान महिलाएं गुमनामी की जिंदगी जीती हैं। जिसके खिलाफ अब कुछ महिला सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मोर्चा संभाला है। उनकी कोशिश है कि महिलाओं को उनकी पहचान मिले। उन्हें खुद उनके नाम से जाना जाए। इसी के मद्देनजर #WhereIsMyName की शुरुआत की गई। इसका सोशल मीडिया पर असर भी देखा जा रहा है। पिछले कुछ दिनों में #WhereIsMyName अभियान का इस्तेमाल 1000 से भी अधिक बार किया जा चुका है।











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