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पाकिस्तान में अग़वा हुईं अफ़ग़ान राजदूत की बेटी ने बताया उनके साथ हुआ क्या था

पाकिस्तान में अफ़ग़ानिस्तान के राजदूत नजीबुल्लाह अलीखिल की बेटी सिलसिला अलीखेल को 16 जुलाई को अज्ञात हथियारबंद हमलावरों ने अग़वा करने की कोशिश की थी और नाकाम होने पर उनके साथ मारपीट करके फ़रार हो गए थे.

उस घटना के लगभग एक महीने बाद अफ़ग़ान राजदूत ने एक ट्वीट करके बताया है कि उनकी बेटी ने इस मामले में क्या कहा है.

https://twitter.com/NajibAlikhil/status/1425375501930176519

अफ़ग़ान राजदूत के ट्वीट में सिलसिला अलीखिल के फेसबुक एकाउंट का लिंक है, जिसमें एक वीडियो में वो अपना परिचय देते हुए घटना का ब्यौरा कुछ इस तरह देती हैं, ''अपहरण की घटना 16 जुलाई को हुई. मैं अपनी माँ के लिए उपहार ख़रीदना चाहती थी. मैंने घर से बाज़ार जाने के लिए एक टैक्सी ली. उपहार लेने के बाद टैक्सी से मैं घर वापस आना चाहती थी, अपहरण की घटना इसी दूसरी टैक्सी में हुई.''

https://www.facebook.com/100069200571861/videos/3016480298588133

वो आगे कहती हैं, ''टैक्सी ड्राइवर ने टैक्सी में एक और व्यक्ति को बैठा लिया. मैंने विरोध किया कि आप इसमें दूसरे मुसाफिर को नहीं बैठा सकते. इस पर दूसरे व्यक्ति ने अपना चेहरा मेरी तरफ़ घुमाकर कहा कि तुम अफ़ग़ान राजदूत की बेटी हो, उसने कई अपशब्द कहे और मेरे साथ मारपीट शुरू कर दी. लगभग तीन से पांच मिनट तक ये सब हुआ और फिर मैं बेहोश हो गई. दोबारा होश में आने पर मुझे शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया. इसके बाद मुझे घर लाया गया और फिर फ़ौरन अस्पताल ले जाया गया जहाँ पाकिस्तान की पुलिस भी मौजूद थी. उन्होंने अगले ही पल अपनी जाँच-पड़ताल शुरू कर दी. उन्होंने बार-बार सवाल दोहराए, मैंने बार-बार वही जवाब दिए.''

घटना के बाद जाँच-पड़ताल और मेडिकल जाँच के तौर-तरीक़ों पर सवाल उठाते हुए सिलसिला अलीखेल कहती हैं, ''चूँकि मुझे प्रताड़ित किया गया था, इसलिए मेरी उम्मीद ये थी कि डॉक्टर मेरी अच्छे से देखभाल करें. अपहरण के मामलों में पीड़ित के शरीर में कई तरह के टेस्ट करने की ज़रूरत होती है ताकि पता चल सके बेहोश करने में किस चीज का इस्तेमाल किया गया था और भी कई जानकारी पता चलती है. लेकिन इसके लिए छह, 12 या 18 घंटे के भीतर ब्लड टेस्ट करना होता है, उसके बाद टेस्ट करने से कुछ पता नहीं चलता है. लेकिन मुझे नहीं पता कि क्यों मेरे ये टेस्ट ठीक से नहीं किए गए.''

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''डॉक्टर भी यही जानना चाहते थे कि हुआ क्या. मसलन हड्डियों की जाँच करने वाले एक डॉक्टर ने मुझसे कहा कि शुरु से आख़िर तक बताइए कि आपके साथ क्या हुआ. मुझे हैरानी हुई कि डॉक्टर क्यों ये जानना चाहता है कि मैं कब घर से निकली, कितने बजे निकली, मैंने टैक्सी ली या कोई और कार. हमने पहले दिन से ही पुलिस की मदद की, तब भी जब मेरी हालत बहुत ख़राब थी, हम पुलिस के साथ इस्लामाबाद में तड़के 3.30 बजे उस जगह गए जहाँ ये घटना हुई थी. दूसरे और तीसरे दिन भी हमने पुलिस की इसी तरह सहायता की. जाँच करने वाली टीम बार-बार वही सवाल पूछ रही थी और हम बार-बार उन्हीं वहीं सब बता रहे थे.''

सिलसिला अलीखेल आगे कहती हैं, ''इसके बाद हम तुर्की चले गए जहाँ इस घटना के तीन-चार दिन बाद भी वो सभी महत्वपूर्ण मेडिकल चेकअप ठीक तरीक़े से किए गए जो अपहरण के मामले में किए जाते हैं. मेरी मेडिकल-फिजिकल रिपोर्ट और सायकॉलॉजिकल टॉर्चर को रिकॉर्ड किया गया. शारीरिक रूप से मैं अब ठीक हूँ लेकिन मानसिक रूप से अभी मुझे और समय चाहिए क्योंकि अभी भी हर रात में दो से तीन बार अचानक जाग जाती हूँ और ये लगता है कि मैं अभी भी उसी जगह पर लेटी हूँ जहाँ ये घटना हुई थी.''

''पूरी तरह से ठीक होने के लिए मुझे अभी और समय चाहिए. मेरी अपनी सरकार, अफ़ग़ानिस्तान की सरकार से ये अनुरोध है कि वो अपहरण के इस मामले को फॉलो करे जिसमें एक युवा अफ़ग़ान लड़की की गरिमा, उसके परिवार की गरिमा, उसके देश अफ़ग़ानिस्तान की गरिमा निहित है. इस मामले को गंभीरता से फॉलो किया जाए और पाकिस्तानी अधिकारियों से मेरी उम्मीद है कि वो ईमानदारी से आपसी सहयोग करें और अपराधियों को बिना किसी देर के गिरफ्तार करके उन्हें सज़ा दिलाएँ. इस्लामाबाद में ये घटना दिन-दहाड़े हुई है.''

सिलसिला अलीखिल ने अफ़ग़ानिस्तान में और अफ़ग़ानिस्तान से बाहर रहने वाले उन तमाम लोगों का शुक्रिया अदा किया है जिन्होंने अपने बयानों, प्रदर्शनों और सोशल मीडिया के ज़रिए इस मामले में उनका समर्थन किया.

उन्होंने कहा, ''अफ़ग़ानिस्तान में बहुत सारी समस्याएँ हैं लेकिन इस मामले में हम अभी भी साथ मिलकर खड़े हुए हैं और एकजुट हैं.''

उन्होंने अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी और फर्स्ट लेडी का भी शुक्रिया अदा किया है. उन्होंने अपने ज्ञान के ज़रिए अपने देश की सेवा करने की इच्छा भी जताई है. सिलसिला अलीखेल ने उम्मीद जताई है कि इस मामले में सत्य की जीत होगी.

पाकिस्तान की पुलिस का क्या कहना है?

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में पुलिस का कहना है कि पाकिस्तान में अफ़ग़ानिस्तान के राजदूत को अज्ञात हथियारबंद हमलावरों ने अग़वा करने की कोशिश की थी.

पुलिस ने उस समय जानकारी दी थी कि हमलावर ऐसा करने में कामयाब नहीं हो सके और राजदूत की बेटी के साथ हिंसा करने के बाद फ़रार हो गए.

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उस समय पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने इस घटना का संज्ञान लेते हुए गृह मंत्रालय, पुलिस और संबंधित एजेंसियों से इस घटना की प्राथमिकता से तहक़ीक़ात करने के लिए कहा था.

पुलिस के मुताबिक़ पाकिस्तान में अफ़ग़ानिस्तान के राजदूत नजीबुल्लाह अलीखिल की बेटी सिलसिला अलीखेल बाज़ार में ख़रीदारी करने गईं थीं, जब उन्हें हथियारबंद हमलावर अग़वा करके अज्ञात जगह पर ले गए.

ये घटना इस्लामाबाद के थाना कोहसार के बिलौर एरिया बाज़ार की है. पुलिस के मुताबिक़ इस घटना के बारे में जानकारी एक ख़ुफ़िया संस्थान ने दी थी कि राजदूत की बेटी अपने भाई के लिए गिफ़्ट लेने बिलौर इलाक़े गईं थीं और वापस लौटने के लिए उन्होंने एक टैक्सी को रोका.

पुलिस के मुताबिक़ जब वो गाड़ी में बैठ रहीं थीं तब एक अज्ञात व्यक्ति भी गाड़ी में बैठ गया. सिलसिला अली ने इसका विरोध किया.

पुलिस का कहना है कि अज्ञात व्यक्ति ने सिलसिला का मुँह ज़बरदस्ती बंद किया और उनके साथ हिंसा की जिसमें वो बेहोश हो गईं.

इस रिपोर्ट के मुताबिक़ अफ़ग़ान राजदूत की बेटी को जब होश आया तो उन्होंने ख़ुद को एक जंगल में पाया और जब उन्होंने एक राहगीर से इस जगह के बारे में पूछा तो उन्हें बताया कि ये सेक्टर एफ़-सेवन का इलाक़ा है.

पुलिस को मिली जानकारी के मुताबिक़ सिलसिला अली ने वहाँ से एक और टैक्सी किराए पर ली और फिर एफ़ 9 पार्क में जाकर अपने एक परिचित को फ़ोन किया और फिर वहाँ से एक सरकारी गाड़ी में अपने घर पहुँचीं.

पाकिस्तान-अफ़ग़ानिस्तान के रिश्ते

इमरान ख़ान और अशरफ़ ग़नी की फाइल फोटो
Getty Images
इमरान ख़ान और अशरफ़ ग़नी की फाइल फोटो

अफ़ग़ान राजदूत की बेटी के अपहरण की घटना ऐसे समय हुई, जब पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के नेताओं में तनाव बढ़ रहा है. अफ़ग़ानिस्तान ने पाकिस्तान पर तालिबान की मदद करने के आरोप लगाए. दोनों देशों के नेताओं में ज़ुबानी जंग भी हुई.

जुलाई में हुए मध्य और दक्षिण एशिया संपर्क सम्मेलन के दौरान अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी अपने पड़ोसी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान से महज़ कुछ फ़ीट की दूरी पर ही बैठे हुए थे. पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति ने कहा था कि पाकिस्तान ने चरमपंथी समूहों से अपने संबंध नहीं तोड़े हैं.

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खुफ़िया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी ने अपने संबोधन में कठोर शब्दों में कहा था कि पिछले महीने 10,000 से अधिक 'जिहादी' लड़ाके अफ़ग़ानिस्तान आए हैं जबकि पाकिस्तान सरकार तालिबान को शांति वार्ता में "गंभीरता से" भाग लेने के लिए मनाने में असफल रही है.

अशरफ़ ग़नी के इस बयान के कुछ मिनट बाद अपने ऊपर लगे इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए पाकिस्तान के पीएम इमरान ख़ान ने कहा कि इन आरोपों से वह "निराश" हुए. उन्होंने कहा कि उन्हें यह सुनकर निराशा हुई कि संघर्ष में पाकिस्तान की "नकारात्मक भूमिका" थी.

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