अशरफ गनी को किया जा सकता है गिरफ्तार, अफगानिस्तान का 'खजाना' लेकर हुए थे फरार, करीबी ने दिया धोखा?
अफगानिस्तान से खजाना लेकर भागने के आरोप में अशरफ गनी की गिरफ्तारी की मांग की गई है।
काबुल, अगस्त 18: अफगानिस्तान से फरार हो चुके पूर्व राष्ट्रपति को गिरफ्तार किया जा सकता है। उनके खिलाफ इंटरपोल से अपील की गई है। सबसे आश्चर्यजनक बात ये है कि अशरफ गनी की गिरफ्तारी की अपील तालिबान ने नहीं, बल्कि अफगानिस्तान दूतावाल ने की है। वहीं, शक जताया जा रहा है कि क्या अशरफ गनी को उनके ही करीबी ने तो 'धोखा' नहीं दिया है।

इंटरपोल से गिरफ्तारी की अपील
ताजिकिस्तान में अफगानिस्तान दूतावास ने इंटरपोल पुलिस से अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति अशरफ गनी, अफगान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हमदुल्ला मोहिब और अशरफ गनी के पूर्व मुख्य सलाहकार फजल महमूद को गिरफ्तार करने की मांग की है। पूर्व राष्ट्रपति की गिरफ्तारी की मांग तब की गई है, जब अशरफ गनी, हमदुल्ला मोहिब और फजल महमूद फाजली पर अफगानिस्तान के खजाने की चोरी का आरोप लगाया गया है। ताजिकिस्तान की स्थानीय मीडिया ने दावा किया है कि अफगानिस्तान दूतावास ने मांग की है कि, 'अशरफ गनी अफगानिस्तान के लोगों की संपत्ति को लेकर फरार हो गये हैं, लिहाजा उन्हें गिरफ्तार कर संपत्ति वसूल की जाए और वो खजाना खजाना एक अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण को सौंप देना चाहिए।'

मुश्किल में फंस गये अशरफ गनी?
आपको बता दें कि रविवार को जब तालिबान ने राजधानी काबुल पर कब्जा कर लिया था, उसके बाद अशरफ गनी के अफगानिस्तान से बाहर जाने की खबर आई थी। बात में पता चला था कि अशरफ गनी चार कार और काफी ज्यादा पैसों के साथ फरार हो गये हैं। ताजिकिस्तान ने अपने क्षेत्र में अशरफ गनी को उतरने देने से मना कर दिया था, जिसके बाद ओमान में अशरफ गनी का प्लेन उतरा था और बताया जा रहा है कि इस वक्त असरफ गनी संयुक्त अरब अमीरात में हो सकते हैं। हालांकि, अभी तक ठीक-ठीक पता नहीं चल पाया है कि वो कहां हैं। कई मीडिया रिपोर्टों ने अशरफ गनी के अलग अलग जगह मौजूद होने के दावे किए गये हैं। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि अशरफ गनी ताजिकिस्तान या उज्बेकिस्तान भाग गए होंगे। हालांकि, उसका वर्तमान ठिकाना अज्ञात है।

रूस ने लगाया पैसे लेकर भागने का आरोप
दरअसल, काबुल स्थिति रूसी दूतावास ने दावा किया था, कि अशरफ गनी चार कारों और नकदी से भरा एक हेलीकॉप्टर लेकर देश से भाग गए हैं। इतना ही नहीं, रूसी दूतावास ने ये भी दावा किया था कि अशरफ गनी को बहुत सारे पैसे इसलिए छोड़ने पड़े, क्योंकि उसे रखने के लिए हेलीकॉप्टर में जगह नहीं बचा था। अशरफ गनी के साथ उनके कई विश्वस्त सहयोगी भी अफगानिस्तान छोड़कर भाग चुके हैं। वहीं, संकट के समय अफगानिस्तान से भागने के अशरफ गनी के कृत्य की दुनिया भर के लोगों और नेताओं ने आलोचना की। अपने बचाव में गनी ने कहा था कि उन्होंने रक्तपात से बचने के लिए देश छोड़ दिया। रविवार को एक फेसबुक पोस्ट में अशरफ गनी ने कहा कि, उन्हें "हथियारबंद तालिबान" के बीच एक "कठिन विकल्प" को चुनने के लिए मजबूर होना पड़ा। जो राष्ट्रपति भवन में प्रवेश करना चाहते थे।
करीबी ने दिया धोखा?
अशरफ गनी अफगानिस्तान के एक सुलझे हुए नेता माने जाते हैं, लेकिन उनकी गिरफ्तारी की मांग के बाद अब सवाल उठता है कि क्या उनके करीबी ने उन्हें धोखा दिया है। उस करीबी का नाम है, पूर्व राष्ट्रपति अमरूल्ला सालेह। अमरूल्ला सालेह इस वक्त भी अफगानिस्तान में हैं, और वो तालिबान के ऊपर काफी आक्रामक भी हैं। उन्होंने कहा है कि भले अभी तालिबान जीत चुका हो, लेकिन वो तालिबान के खिलाफ लड़ाई जारी रखेंगे। इसी बीच पूरी दुनिया के लोग उस वक्त चौंक गये जब अमरूल्ला सालेह ने खुद को अफगानिस्तान का कार्यवाहक राष्ट्रपति घोषित कर दिया।

खुद को घोषित किया राष्ट्रपति
आपको जानकर हैरानी होगी कि जो ताजिकिस्तान अशरफ गनी को देश में उतरने की इजाजत नहीं देता है, उसी देश में स्थिति अफगानिस्तान का एबेंसी अपने ही देश के पूर्व राष्ट्रपति के खिलाफ इंटरपोल में शिकायत दर्ज करवाता है और गिरफ्तारी की मांग करता है। ऐसे में सवाल ये उठ रहे हैं कि क्या अमरूल्ला सालेह ने अशरफ गनी को धोखा दिया है? हालांकि, अभी तक पुख्ता तौर पर कुछ भी नहीं कहा जा सकता है और अमरूल्ला सालेह की तरफ से इस मुद्दे पर कोई बयान नहीं आया है और ना ही तालिबान की तरफ से ही कोई प्रतिक्रिया सामने आई है। अमरूल्ला सालेह ने भले ही खुद को अफगानिस्तान का कार्यवाहक राष्ट्रपति घोषित कर दिया हो, लेकिन दूसरी तरफ काबुल में तालिबान ने सरकार बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

अशरफ गनी को पोस्टर फेंका
एक तरफ अमरूल्ला सालेह ने खुद को देश का कार्यवाहक राष्ट्रपति घोषित कर लिया है तो दूसरी तरफ ताजिकिस्तान स्थिति अफगानिस्तान दूतावास से अशरफ गनी की तस्वीर को उखाड़कर फेंक दिया गया है और अशरफ गनी की जगह अमरूल्ला सालेह की तस्वीर लगाई गई है। सबसे दिलचस्प बात ये है कि पोस्टर उखाड़ने और अमरूल्ला सालेह की तस्वीर लगाने का बकायदा फोटो खींच कर ट्वीट किया गया है, जिसके बाद एक तरफ तालिबान का खून खौलना स्वाभाविक माना जा रहा है, तो दूसरी तरफ सवाल ये उठते हैं कि क्या अफगानिस्तान पतन के पीछे पूर्व राष्ट्रपति अशरफ गनी और पूर्व उपराष्ट्रपति अमरूल्ला सालेह के बीच का झगड़ा भी जिम्मेदार है?

ताजिकिस्तान मूल के हैं अमरूल्ला सालेह
आपको ये जानकर हैरानी होगी कि ताजिकिस्तान मूल के अमरूल्ला सालेह को ताजिकिस्तान स्थिति अफगानिस्तान दूतावास का पूर्ण समर्थन प्राप्त है और अमरूल्ला सालेह ने अमेरिका के राष्ट्रपति को इस परिस्थिति के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया था। अमरूल्ला सालेह ने तो यहां तक कहा कि अमेरिका से बहस करने का अब कोई मतलब नहीं है। खुद को देश का राष्ट्रपति घोषित करते हुए अमरूल्ला सालेह ने कहा कि ''अफगानिस्तान के संविधान के मुताबिक, देश के राष्ट्रपति की मृत्यु होने, पलायन करने या आकस्मिक इस्तीफा देने पर देश का उप-राष्ट्रपति देश का कार्यवाहक राष्ट्रपति बन जाता है, लिहाजा देश का कार्यवाहक राष्ट्रपति मैं हूं। हालांकि, अब सवाल ये उठ रहे हैं कि क्या अशरफ गनी को गिरफ्तार किया जाएगा?
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