अपहरण किए गये विमान के पास भारतीय अधिकारी को जाने से रोका था, अब PM मोदी करेंगे UAE में भव्य मंदिर का उद्घाटन
Hindu Temple In Abu Dhabi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत-यूएई संबंध इतने मजबूत हो गये हैं, कि इस्लाम का गढ़ माने जाने वाले इस देश में पीएम मोदी 14 फरवरी को भव्य हिंदू मंदिर का उद्घाटन करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।
प्रधानमंत्री मोदी 13 फरवरी को यूएई के शेख जायद स्टेडियम में भारतीय समुदाय के कार्यक्रम 'अहलान मोदी' को भी संबोधित करेंगे। इस दौरान कई आर्थिक समझौतों पर भी हस्ताक्षर होने की उम्मीद है।

प्रधानमंत्री मोदी का यूएई दौरा उस वक्त हो रहा है, जब पिछले महीने ही संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने वाइब्रेंट गुजरात शिखर सम्मेलन में एक दुर्लभ भाषण दिया था। अमूमन यूएई के राष्ट्रपति ऐसे कार्यक्रमों में अपना संबोधन नहीं देते हैं, लेकिन उन्होंने वाइब्रेंट के मंच से उद्यमियों को संबोधित किया।
लिहाजा, जानना दिलचस्प हो जाता है, कि भारत ने संयुक्त अरब अमीरात के साथ अपने संबंधों को कैसे बदला? पीएम मोदी की यूएई यात्रा के दौरान किन प्रमुख सौदों पर हस्ताक्षर होने की संभावना है? भारत और यूएई के बीच संबंध बेहद महत्वपूर्ण क्यों हैं?
आइये समझते हैं।
आबूधाबी में तैया हुआ हिंदू मंदिर, भारत के बाहर बना दुनिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर है। यह वह मंदिर है, जिसकी योजना दो नेताओं - संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति और प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने बनाई थी। ये मंदिर 27 एकड़ भूमि में फैला हुआ है और इसमें बेहद नाजुक नक्काशी की गई है।
जब प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी 2015 में पहली बार संयुक्त अरब अमीरात में उतरे थे, तो एक इस्लामी अमीरात देश में एक मंदिर का आधार रखा है। वह उस मस्जिद में गए, जिसका नाम संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति के पिता के नाम पर रखा गया था। वह मस्जिद मक्का मदीना के बाद सबसे बड़ी मस्जिद है। इसलिए, संयुक्त अरब अमीरात में बड़ी संरचनाएं बनाने की परंपरा रही है।
आबू धाबी का मंदिर उस श्रृंखला का एक हिस्सा है, और इस बात का प्रदर्शन है, कि पिछले कुछ वर्षों में भारत-यूएई संबंध कैसे आगे बढ़े हैं। मंदिर समय पर बने, इसका काम वक्त पर पूरा हो, इसकी जिम्मेदारी भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर को दी गई थी, जिसे उन्होंने बखूबी निभाया है। जिससे यह मंदिर भारत-यूएई संबंधों का प्रतीक बन गया है।

खाड़ी देशों पर पीएम मोदी का फोकस
2014 में जब पीएम मोदी ने सत्ता संभाली थी, तो उनका एक प्रोजेक्ट खाड़ी देशों तक भारत की मजबूत पहुंच बनाना था। प्रवासी भारतीय बड़े पैमाने पर धन भारत भेज रहे थे, लिहाजा ये प्रोजेक्ट भारत के लिए काफी अहम था।
शुरुआती प्रयास खुफिया अधिकारियों के स्तर पर किया गया, फिर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के स्तर पर, और उसके बाद तत्कालीन विदेश सचिव एस जयशंकर के स्तर पर किए गए थे। उस वक्त ये धारणा थी, कि भारत यूएई को पाकिस्तान के चश्मे से देखता था, लेकिन 2014 के बाद ये नजरिया बदला, जब यूएई ने संकेत दिया, कि वो भारत के साथ संबंधों को द्विपक्षीय रिश्ते के नजरिए से देख रहा है। और इसी के बाद से रिश्तों को मजबूत करने की कोशिशें शुरू हो गईं।
2015 में पीएम मोदी का यूएई दौरा 34 साल बाद किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री का पहला दौरा था। इससे पहले, आखिरी बार यूएई का दौरा साल 1981 में प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी ने किया था।
भारत और यूएई के संबंध कैसे थे, इसका अंदाजा इसी से लगा सकते हैं, कि जब आईसी 184 अपहरण हुआ, तो भारतीय राजदूत को कंधार के लिए उड़ान भरने से पहले, उस एयर बेस में जाने की इजाजत नहीं दी गई, जहां अपहृत विमान को उतारा गया था। और आज, भारत और यूएई सामरिक पार्टनर बन गये हैं और जब राफेल विमान फ्रांस से आ रहा था, उस वक्त यूएई ने आसमान में ही राफेल विमान में तेल भरा था, जिसका नजारा पूरी दुनिया ने देखा था।
उस वक्त बहुत सारे आतंकवादियों और अपराधियों ने संयुक्त अरब अमीरात में शरण ले रखी थी और वहां से भारत को निशाना बना रहे थे।
लेकिन, अब वह सब बदल गया है। आज, संयुक्त अरब अमीरात के पास प्रवासी भारतीयों को ले जाने वाला सबसे शक्तिशाली भारतीय पासपोर्ट है। यूएई में 35 लाख भारतीय रहते हैं। भारतीयों के लिए यूएई अब नया सिंगापुर बन गया है। यूएई अब भारत के सबसे करीबी सहयोगियों में से एक बन गया है, जो अब द्विपक्षीय संधि पर हस्ताक्षर करने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शेख मोहम्मद बिन जायद के दूरदर्शी नेतृत्व से सब कुछ बदल गया है।
और इसी का नतीजा आबू धाबी में बनने वाला भव्य हिंदू मंदिर, जिसके बारे में आज से 10 साल पहले कल्पना भी नहीं किया जा सकता था।












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