एक साल पहले बांग्लादेश ने प्रति व्यक्ति आय में भारत को छोड़ा था पीछे, अब कंगाल होने की नौबत कैसे आई?

नई दिल्ली, 28 जुलाईः भारत के पड़ोसी देशों की हालत ठीक नहीं चल रही है। श्रीलंका के बाद पाकिस्तान, नेपाल, मालदीव और अब बांग्लादेश के आर्थिक संकट में फंसने की खबर आ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, कोरोना और रूस यूक्रेन युद्ध ने बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था को भी पटरी से उतार दिया है। वित्तीय संकट से निपटने के लिए बांग्लादेश ने वाशिंगटन स्थित अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से 4.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर का लोन मांगा है।

बांग्लादेश की हो रही थी प्रशंसा

बांग्लादेश की हो रही थी प्रशंसा

ज्यादा वक्त नहीं हुआ जब साल 2020 के आखिरी महीनों में आईएमएफ ने यह अनुमान लगाया था कि बांग्लादेश प्रति व्यक्ति जीडीपी में आने वाले समय में भारत को पीछे छोड़ कर आगे निकल जाएगा। इसके बाद तो देश में विपक्ष में मौका मिल गया। इसी मुद्दे पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ट्वीट करते हुए कहा था कि बीजेपी सरकार के पिछले छह साल के नफरत भरे सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की सबसे ठोस उपलब्धि यही रही है: बांग्लादेश भी भारत को पीछे छोड़ने वाला है।

बांग्लादेश ने प्रति व्यक्ति आय में भारत को छोड़ा पीछे

बांग्लादेश ने प्रति व्यक्ति आय में भारत को छोड़ा पीछे

इसके ठीक छह महीने बाद वह समय भी आ गया जब बांग्लादेश ने प्रति व्यक्ति आय में भारत को पीछे छोड़ दिया। इसके बाद तो चारों ओर मानो हाहाकार मच गया। दुनिया भर में बांग्लादेश की प्रशंसा होने लगी वहीं, यहां भाजपा सरकार के लिए कटाक्ष किए जाने लगे। इसमें कोई शक नहीं है कि आजादी के बाद से बांग्लादेश ने आर्थिक और सामजिक पैमानों पर खूब तरक्की की है। पाकिस्तान से अगर बांग्लादेश की तुलना की जाए तो शायद ही किसी बिंदु पर बांग्लादेश, पाकिस्तान से पिछड़ता नजर आए।

बांग्लादेश में अब ऐसा क्या हो गया?

बांग्लादेश में अब ऐसा क्या हो गया?

पाकिस्तान से अलग होने से पहले बांग्लादेश (पूर्वी पाकिस्तान) वहां का सबसे गरीब क्षेत्र हुआ करता था। लेकिन अब देखिए मैन्युफैक्चरिंग उद्योग हो या कपड़ा उद्योग, दुनिया भर में बांग्लादेश के प्रगति की प्रशंसा होती है। विकास का यही परिणाम है कि विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, प्रतिदिन 1.25 डॉलर में अपना जीवन चलाने वाले लोग 2019 में 9 फीसदी ही रह गए थे। लेकिन अब ऐसा क्या हो गया है कि बांग्लादेश की तुलना लोग श्रीलंका से करने लगे हैं? मात्र एक साल में ही ऐसा क्या बदल गया है कि भारत के पड़ोसी देश की ऐसी नौबत आ चुकी है?

आयात-निर्यात के बीच बढ़ा अंतर

आयात-निर्यात के बीच बढ़ा अंतर

बांग्लादेश सेंट्रल बैंक की रिपोर्ट बताती है कि कैसे देश में आयात बढ़ा और निर्यात घटा है और इसका सीधा असर यहां के खजाने पर हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार जुलाई, 2021 से लेकर मई 2022 के बीच 81.5 अरब डॉलर का आयात किया गया है। यदि इसकी तुलना बीते साल से की जाए तो आयात में 39 फीसदी की बढ़त देखी गई है। इसका अर्थ है कि बांग्लादेश ने दूसरे देशों से सामान मंगवाने में अधिक डॉलर खर्च किए हैं और विदेशों को अपने सामान का निर्यात कम किया है जिससे देश को नुकसान हुआ है।

विदेशी मुद्रा भंडार हो रहा खत्म

विदेशी मुद्रा भंडार हो रहा खत्म

बांग्लादेश में विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से खत्म हो रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेश के पास बस 5 महीने के खर्चे चलाने जितना ही विदेशी मुद्रा है। इसकी कई वजह बताई गई हैं। जैसे कि विदेशों में काम करने वाले बांग्लादेशियों की आय गिर रही है, आयात बढ़ रहा है और निर्यात घट रहा है। विदेशी मुद्रा भंडार पर नजर डाली जाए तो पिछले साल जुलाई तक यह 45 अरब डॉलर था। 20 जुलाई, 2022 को यह घटकर 39 बिलियन डॉलर ही बचा है। 2 महीने पहले तक आंकड़ा 42 बिलियन डॉलर था।

विदेशी यात्राओं पर लगी है रोक

विदेशी यात्राओं पर लगी है रोक

हालात इस कदर खराब हुए कि सरकार ने इससे निपटने के लिए सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के विदेशी यात्राओं पर रोक लगा दी थी। बांग्लादेश सरकार द्वारा ऐसे प्रोजेक्ट्स पर भी रोक लगा दी गई है, जिनके लिए अधिक मात्रा में विदेशों से चीजों को आयात करने की जरूरत होती है। बताया गया कि बांग्लादेश में जनवरी के बाद से ही हालात खराब होने लगे थे। विदेशों से बांग्लादेशी नागरिकों द्वारा भेजे जाने वाले पैसे में भी कमी आई है। ये कमी पिछले ठीक एक साल पहले जुलाई से शुरू हुई। वहीं, आयात बढ़ता चला गया।

बांग्लादेश के लिए चुनौतियां बढ़ीं

बांग्लादेश के लिए चुनौतियां बढ़ीं

बांग्लादेश के विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए दो महीने से भी अधिक समय से वाशिंग मशीन, स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल, एयर कंडीशन और रेफ्रिजेरेटर के आयात पर रोक लगी हुई है। लेकिन इसके बाद भी हालात सही नहीं हुए हैं। विदेशी मुद्रा भंडार का संकट बना हुआ है। आगे हालात बिगड़ने की आशंका इसलिए भी जाहिर की जा रही क्योंकि रूस और यूक्रेन की जंग का असर दुनियाभर में तेल की कीमतों की वृद्धि के रूप में पहले ही देखा जा रहा है। इसके कारण सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था कहे जाने वाले अमेरिका तक में मंदी का खतरा जताया गया है। ऐसे में बांग्लादेश के लिए चुनौतियां और भी बढ़ गई हैं।

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