चीनी इंजीनियर ने किया अल्लाह का अपमान! गिरफ्तार कर अब धर्मसंकट में पड़ गए शहबाज शरीफ?
पाकिस्तान में ईशनिंदा के आरोप में मॉब लिंचिंग का घटनाएं नई नहीं हैं। फरवरी में ननकाना साहिब जिले में एक शख्स को कुरान के अपमान के आरोप में भीड़ ने मार डाला था। इससे पहले एक श्रीलंकाई नागरिक की हत्या कर दी गई थी।

पाकिस्तान एक चीनी नागरिक को ईशनिंदा कानून के तहत गिरफ्तार कर मुश्किल में फंस गया है। यहां ईशनिंदा कानून बेहद शख्त हैं और इसके तहत मौत की सजा दी जा सकती है। अगर पाकिस्तान चीनी नागरिक को सजा देता है तो उसे चीन का प्रकोप झेलना पड़ सकता है।
दरअसल रविवार शाम को खैबर-पख्तूनख्वा प्रांत की पुलिस ने चीनी नागरिक को हिरासत में लिया था। चीनी नागरिक चाइना गेजौबा ग्रुप कंपनी में एक इंजीनियर है। उसे इस्लामाबाद से लगभग 350 किमी उत्तर में दसू हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के एक कैंप में तैनात किया गया था।
यह घटना उस समय हुई जब इंजीनियर की स्थानीय मजदूरों के साथ तीखी बहस हो गई। दरअसल रमजाम के कारण रोजा रखने के कारण मजदूरों का काम धीमा हो गया था। इसे लेकर चीनी इंजीनियर मजदूरों पर नाराज हो गया, जिसके बाद ये झगड़ा शुरू हुआ।

कहा जा रहा है कि चीनी इंजीनियर ने कथित रूप से ईशनिंदा वाली टिप्पणी कर दी जिसके बाद मजदूर उस पर भड़क गए। गुस्साई भीड़ को देख पुलिस को फोन किया गया, जिसके एक पुलिस दल घटनास्थल पर पहुंचा और इलाके को अपने नियंत्रण में लिया। इसके बाद आरोपी को सुरक्षित रूप से कोमिला पुलिस स्टेशन ले जाया गया।
हालांकि ये बात बाकी जगहों पर फैल गई। जिसेक बाद आज सोमवार को हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारियों ने प्रदर्शन करना शुरू किया। ये लोग कराकोरम हाइवे पर पहुंच गए और चीनी शिविर में घुसने की कोशिश करने लगे। इस दौरान प्रदर्शनकारियों को आश्वासन दिया गया कि चीनी नागरिक को कानूनी कार्रवाई का सामना करना होगा।
डॉन की एक रिपोर्ट के मुताबिक आरोपी को सेना के हेलीकॉप्टर के जरिए एबटाबाद ले जाया गया है क्योंकि पुलिस को डर था कि स्थानीय लोग उसे नुकसान पहुंचा सकते हैं। अब चीनी नागरिक को एबटाबाद की एक अदालत में पेश किया जाएगा। हालांकि ऐसा कहा जा रहा है कि यदि पाकिस्तान, चीनी इंजीनियर को कोई सजा देता तो यह दोनों देशों के बीच एक राजनयिक विवाद का कारण बन सकता है।

आपको बता दें कि ये पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान में किसी विदेशी नागरिक पर ईशनिंदा का आरोप लगाया गया है। दिसंबर 2021 में, सियालकोट की एक फैक्ट्री में मैनेजर के पद पर काम करने वाले श्रीलंकाई नागरिक प्रियांथा दियावदाना को ईशनिंदा के आरोप में पीटपीट कर मार डाला गया था।
48 वर्षीय प्रियांथा की हत्या के बाद कारखाने के श्रमिकों की भीड़ ने उनके शव को आग के हवाले कर दिया था। इस घटना से पाकिस्तान और श्रीलंका के रिश्तों में तनाव पैदा हो गया था। श्रीलंका के तत्कालीन प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने तत्कालीन पीएम इमरान खान से नाराजगी भी जताई थी।

डॉन की एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में आजादी के बाद से ईशनिंदा के 1,415 मामले सामने आए हैं जिसमें 89 नागरिकों की मौत हुई है। सेंटर फॉर रिसर्च एंड सिक्योरिटी स्टडीज की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया गया है कि 1947 से 2021 तक ईशनिंदा के आरोप में 18 महिलाओं और 71 पुरुषों की हत्या कर दी गई।
ईशनिंदा क्या है?
ईशनिंदा का अर्थ ईश्वर की निंदा करना है। यदि कोई शख्स जानबूझकर पूजा करने की जगह को नुकसान पहुंचाता है, धार्मिक कार्य में बाधा पहुंचाता है, धार्मिक भावनाओं का अपमान करता है या इन्हें ठेस पहुंचाता है तो यह ईशनिंदा के अंतर्गत आता है।
ईशनिंदा कानून कहता है, इस्लाम या पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ कुछ भी बोलने या करने पर फांसी सजा का प्रावधान है। यदि मौत की सजा नहीं दी जाती है तो आरोपी को जुर्माने के साथ आजीवन कारावास झेलना पड़ सकता है। इस कानून की नींव ब्रिटिश शासनकाल में पड़ी थी।

एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के 26 फीसदी देशों में ऐसे कानून हैं, जिसमें ईशनिंदा करने पर सजा का प्रावधान है। इनमें से 70 फीसदी मुस्लिम देश हैं। ईशनिंदा कानून पाकिस्तान, ईरान, सऊदी अरब, मलेशिया मिस्र और इंडोनेशिया में सख्ती से लागू है।
आमतौर पर लोग ऐसा समझते हैं कि ये सिर्फ मुस्लिम धर्म के लोगों द्वारा दूसरे धर्म के लोगों पर लगाया जाता है। मगर मुस्लिम शख्स को भी ईशनिंदा के मामले में सजा मिल सकती है। हाल ही में पाकिस्तान में एक पत्रकार को हिन्दू देवता हनुमान पर विवादित पोस्ट करने के बाद ईशनिंदा कानून के तहत गिरफ्तार किया गया है।
भारत में ईशनिंदा कानून को अंग्रेजों ने 1860 में बनाया था। इसका उद्देश्य हिन्दू-मुस्लिम समुदाय के बीच धार्मिक झगड़ों को रोकना था। ऐसा कहा जाता है कि भारत से पाकिस्तान के बीच बंटवारे में भी ईशनिंदा कानून की भूमिका है। भारत से अलग होने के बाद पाकिस्तान में ये कानून बरकरार रहा और इसके तहत आने वाले मामलों की संख्या में भी लगातार इजाफा हुआ है।
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, ईशनिंदा के आरोपों में आरोपी के साथ-साथ उसके परिवार पर भी खतरा होता है। ईशनिंदा के आरोपित व्यक्तियों को कथित तौर पर मौत की धमकी, हमले, भीड़ के हमलों का खतरा बना रहता है। ईशनिंदा के आरोपी को पुलिस हिरासत में रहने के दौरान कथित तौर पर प्रताड़ित या मार दिया जाता है।












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