अमेरिका का स्टील्थ फाइटर जेट निकला कबाड़? अरबों डॉलर से बने 70% से ज्यादा F-35 फाइटर जेट निकले बेकार
F-35 Fighter jet News: क्या अमेरिका ने अपने जिस F-35 स्टील्थ फाइटर जेट का ढिंढोरा पीटा था, क्या वो बेकार साबित हो रहा है, क्योंकि एक रिपोर्ट में सनसनीखेज खुलासा करते हुए कहा गया है, कि 70 प्रतिशत से ज्यादा F-35 फाइटर जेट लड़ने के काबिल ही नहीं हैं।
अमेरिकी सरकार की गवर्नमेंट अकाउंटिबिलिटी ऑफिस (GAO) की सितंबर-2023 की रिपोर्ट में कुछ चौंकाने वाले खुलासे कि एघये हैं, कि कैसे अरबों डॉलर की लागत से बनाए गये F-35 स्टील्थ पांचवी पीढ़ी के लड़ाकू विमान लड़ने के काबिल ही नहीं हैं।

अमेरिका के F-35 जेट पर गंभीर सवाल
GAO की रिपोर्ट से गंभीर सवाल इसलिए खड़े हो रहे हैं, क्योंकि चीन का मुकाबला करने के लिए अमेरिका के पास एफ-35 ही एकमात्र स्टील्थ फाइटर जेट है और ताइवान में तनावपूर्ण स्थितियों के बीच अगर अमेरिका का मुख्य हथियार ही बेकार निकल जाए, तो ये उसके लिए बहुत बड़ा झटका होगा।
रिपोर्ट में दावा किया गया है, कि सिर्फ 15 से 30% एफ-35 लड़ाकू विमान ही युद्ध करने में सक्षम हो सकते हैं। हालांकि, अमेरिकी मीडिया की कुछ रिपोर्ट्स में लगातार दावें किए गये हैं, कि औसतन, लगभग 55 प्रतिशत एफ-35 युद्ध करने के काबिल हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है, कि अगर एक सामान्य आदमी इस रिपोर्ट को देखता है, तो उसे लगता है, कि 55 प्रतिशत विमान युद्ध लड़ने के काबिल हैं। लेकिन हकीकत में उन्हें धोखा दिया जा रहा है। क्योंकि, किसी मिशन के लिए सक्षम होना और युद्ध के लिए समक्ष होना और किसी फाइटर जेट का उड़ान भरने में सक्षम होना, तीनों बातें अलग अलग हैं।
लिहाजा, अगर अमेरिकी रक्षा मंत्रालय यह दावा करता है, कि उसके एफ-35 फाइटर जेट किसी मिशन के लिए सक्षम हैं, तो इसका मतलब यह है, कि एक विमान उड़ान भर सकता है ,और कम से कम एक मिशन को अंजाम दे सकता है। लेकिन, इसका मतलब कतई ये नहीं है, कि एक विमान युद्ध लड़ने में भी सक्षम है।

लिहाजा, GAO की रिपोर्ट में साफ साफ शब्दों में लिखा गया है, कि 'मिशन सक्षम' के रूप में नामित एक विमान कुछ प्रकार का युद्ध करने में सक्षम हो सकता है, लेकिन ऐसा नहीं भी हो सकता है। इसके बजाय, वह जिस मिशन को क्रियान्वित करने में सक्षम हो सकता है, वह परीक्षण या प्रशिक्षण, या कोई अन्य मिशन हो सकता है, जिसमें युद्ध शामिल नहीं है।
और भले ही इसे परीक्षण या प्रशिक्षण के लिए लायक माना जाए, लेकिन कई विमान ऐसे हैं, जो परीक्षण या प्रशिक्षण की पूरी श्रृंखला को पूरी करने में भी सक्षम नहीं हो सकते हैं, जिसकी आप पूरी तरह ऑपरेशन फाइटर जेट से उम्मीद करते हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है, कि इसीलिए एफ-35 फाइटर जेट को, मिलिट्री-इंडस्ट्रियल-कांग्रेसनल कॉम्पैक्स के सामने एक शब्द में 'मिशन सक्षम' लिखना, सिर्फ शब्दों का खेल है, जो दवाबदेही से बचने का रास्ता तैयार करता है।
बड़े युद्ध में मुंह की खाएगा अमेरिका?
GAO की रिपोर्ट में कहा गया है, कि एफ-35 फाइटर जेट को लेकर जो रिपोर्ट है, अगर उसपर भी ध्यान दिया जाए, तो भी इनमें कहा गया है, कि 55 प्रतिशत फाइटर जेट 'मिशन सक्षम' हैं, लेकिन किसी भी स्थिति के लिए तैयार रहने के लिए अमेरिकी वायु सेना के बेड़े में हर वक्त 90 प्रतिशत से ज्यादा एफ-35A को युद्ध के लिए सक्षम होना चाहिए। जबकि, लड़ाकू विमान एफ-35बी (मरीन कोर) के लिए 85 प्रतिशत होना चाहिए, लेकिन वास्तविक क्षमता, लक्ष्य से काफी कम है।
यानि, एफ-35 बेड़ा कुछ भी करने में सक्षम होने के अपने मिशन क्षमता लक्ष्य को पूरा करने के करीब भी नहीं है।
इसके अलावा, रिपोर्ट में ये भी कहा गया है, कि जब एफ-35 को लेकर कॉन्ट्रैक्ट किए गये, तो उसमें युद्ध को लेकर मिशन, सर्विलांस, ट्रेनिंग और टेस्टिंग, हर तरह के मिशन को लेकर कॉन्ट्रैक्ट था, ऐसे में कुछ ही प्वाइंट पर विमान का कसौटी पर खड़ा उतरना सवाल खड़े करता है।
रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा गया है, कि अगर हर एक पैमाने पर परखा जाए, तो अमेरिकी एयरफोर्स के बेड़े में शामिल सिर्फ 30 प्रतिशत एफ-35 ही सटीक बैठते हैं, जबकि नौसेना के लिए ये आंकड़ा 15 प्रतिशत के दयनीय स्थिति पर है।
कहा गया है, कि एफ-35 फाइटर जेट में जिस इंजन का इस्तेमाल किया गया है, वो इस फाइटर जेट को हर एक मिशन को अंजाम देने के काबिल नहीं बनाता है। लिहाजा, युद्ध की स्थिति में ये फाइटर जेट धोखा दे सकते हैं और अमेरिका को गहरा नुकसान हो सकता है।












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