इंडोनेशिया में हिंदू धर्म की वापसी की 600 साल पुरानी भविष्यवाणी सच? पहले राष्ट्रपति की बेटी बनी हिंदू
इंडोनेशिया में 600 साल पुरानी एक पुजारी की हिंदू धर्म की वापसी की भविष्यवाणी क्या आज सच साबित हो गई? पूर्व राष्ट्रपति की बहन ने हिंदू धर्म अपना लिया है।
जकार्ता, अक्टूबर 26: इंडोनेशिया के संस्थापक और पहले राष्ट्रपति सुकर्णो की बेटी और पाचवें राष्ट्रपति मेगावती सोकर्णोपुत्री की बहन सुगमावती सुकर्णोपुत्री ने आज इस्लाम का त्याग कर दिया है और उन्होंने हिंदू धर्म को अपना लिया है। इसके साथ ही इंडोनेशिया में 600 साल पुरानी उस भविष्यवाणी के सच साबित होने की बात की जाने लगी है, जिसमें कहा गया था, कि ''मैं वापस आउंगा और हिंदू धर्म फिर से लौटेगा''। आज जब पहले राष्ट्रपति की बेटी ने फिर से हिंदू धर्म अपनाया है, उस वक्त आईये जानते हैं कि किसने की थी भविष्यवाणी और क्या वास्तव में आज भविष्यवाणी सच साबित हो गई है?

विश्व का सबसे बड़ा मुस्लिम देश
इंडोनेशिया विश्व का सबसे बड़ा मुस्लिम देश है, लेकिन एक वक्त इंडोनेशिया हिंदू देश हुआ करता था, लेकिन इस देश में रहने वाले मुसलमानों ने अभी भी अपनी परंपरा का त्याग नहीं किया है। पहली शताब्दी की शुरूआत में जावा और सुमात्रा द्वीप तक हिंदू धर्म का विशालकाय प्रभाव था और 15वीं शताब्दी तक इंडोनेशिया में हिंदू धर्म का ही प्रभाव था। लेकिन धीरे-धीरे इस्लाम के आगमन के बाद इंडोनेशिया में हिंदू धर्म का प्रभाव घटता चला गया और अब देश में हिंदुओं को अल्पसंख्यक का दर्जा हासिल है। लेकिन, देश के मुसलमान अभी भी हिंदू परंपरा से जुड़े हुए हैं और इंडोनेशिया के राजकीय मुद्रा पर भगवान गणेश और लक्ष्मी की तस्वीर है, जबकि इंडोनेशिया के कोने कोने में आपको मंदिर मिल जाएंगे।

पुजारी सबदापालन की भविष्यवाणी
इंडोनेशिया आज भले ही इस्लामिक देश है, लेकिन इंडोनेशिया के लोग आज भी पुजारी सबदापालन की भविष्यवाणी को नहीं भूले हैं। इंडोनेशिया के मुसलमानों को भी उस भविष्यवाणी पर विश्वास है। पुजारी सबदापालन इंडोनेशिया के सबसे शक्तिशाली मजापहित साम्राज्य के राजा ब्रविजय पांचवी के दरबार में एक सम्मानित पुजारी थे और उसी वक्त देश में इस्लाम का आगमन शुरू हुआ था। साल 1478 में राजा ब्रविजय-5 ने हिंदू धर्म को छोड़कर इस्लाम को अपना लिया और उसी वक्त पुजारी सबदापालन ने राजा के श्राप देते हुए भविष्यवाणी की थी। पुजारी सबदापालन ने भरे दरबार में इंडोनेशिया में बार बार आपदा आने और एक दिन वापस लौटने की भविष्यवाणी की थी। पुजारी सबदापालन ने कहा था कि, एक बार फिर से इंडोनेशिया में हिंदू धर्म की वापसी होगी और लोग एक बार फिर से हिंदू धर्म की तरफ जाना शुरू कर देंगे।

पुजारी सबदापालन का श्राप
इंडोनेशिया में कहा जाता है कि, पुजारी सबदापालन ने राजा को भरे दरबार में शाप दिया था कि इंडोनेशिया में बार बार प्रकृति अपना कहर बरपाती रहेगी और सच में इंडोनेशिया में बार बार भूकंप आते रहता है और हजारों लोगों की मौत भूकंप की वजह से हो चुकी है। वहीं, 2004 में इंडोनेशिया में आई भीषण सुनामी में करीब एक लाख 68 हजार लोगों की मौत हो गई थी। हालांकि, इन प्राकृतिक आपदाओं के बीच प्रकृति की ही अपनी संरचना है, लेकिन लोगों के बीच धारणा है कि, पुजारी सबदापालन का श्राप अपना असर दिखाता रहता है।

पुजारी सबदापालन ने क्या कहा था?
इंडोनेशिया में प्रचलित और कल्पवृष में वर्णित कहानी के मुताबिक, पुजारी सबदापालन ने राजा के दरबार में कहा था कि, ''मैं जावा की जमीन में देश की रानी और सभी डांग-हयांग (देव और आत्मा) का सेवक हूं और मेरे पुर्वज विकु मनुमानस, सकुत्रम और बबांग सकरी से लेकर हर पीढ़ी के सदस्य जवानीस राजाओं के सेवक रहे हैं। अब तक दो हजार साल से ज्यादा बीत चुके हैं और उनके धर्म में कुछ भी बदलाव नहीं आया है, लेकिन अब अब जब राजा अपना धर्म बदल रहा है, तो मैं यहां से लौट रहा हूं। 500 सालों के बाद मैं यहां पर वापस हिंदू धर्म को लाऊंगा''। उन्होंनों राजा के सामने भविश्यवाणी करते हुए कहा कि, ''महाराज अगर आप इस्लाम को अपनाते हैं, तो आपके वंश का नाश हो जाएगा और जावा में रहने वाले लोग धरती को छोड़ने के लिए मजबूर हो जाएंगे और यहां के लोगों को इस द्वीप को छोड़कर जाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा''।

सच हो रही हैं भविष्यवाणियां?
दिलचस्प बात ये है कि, 1978 में इंडोनेशिया में फिर से मंदिरों का बनना शुरू हो गया और देश में जीर्ण हो चुके मंदिरों के जीर्णोद्धार का काम फिर से शुरू हो गया। जाना में रहने वाले हजारों मुसलमानों ने हिंदू धर्म को फिर से अपनाना शुरू कर दिया। हालांकि, उनकी भविष्यवाणी कितनी सच साबित हुई है या गलत, ये इंडोनेशिया के लोग ही जानें, लेकिन अब 70 साल की हो चुकीं इंडोनेशिया के संस्थापक और पहले राष्ट्रपति की बहन सुकमावती ने हिंदू धर्म का अपनाने का फैसला कर लिया और आज वो हिंदू धर्म में पस आ चुकी हैं। उनकी दादी न्योमन राय सिरिम्बेन भी एक हिंदू महिला थीं, जो बाली की रहने वालीं थीं और बताया जाता है कि, सुकमावती के ऊपर हमेशा से हिंदू धर्म का काफी प्रभाव बचपन से ही रहा है।

समारोह की भव्य तैयारी
बाले अगुंग के एक शरणार्थी जूनियर मेड अरसाना के मुताबिक, समारोह की भव्य तैयारियां की गई थी। अरसाना ने कहा कि, "सब कुछ सजाया गया था,"। अरसाना ने कहा कि धर्म परिवर्तन का संकल्प सुकमावती सुकर्णोपुत्री द्वारा परिषद हिंदू धर्म इंडोनेशिया (पीएचडीआई) प्रबंधन की उपस्थिति में किया गया। उन्होंने यह भी बताया कि कैसे पहले राष्ट्रपति की बेटी अपने भाई-बहनों के साथ बाले अगुंग आती थी। सुकमावती सुकर्णोपुत्री ने पहले कई हिंदू समारोहों में भाग लिया था और हिंदू धर्म में धार्मिक प्रमुखों के साथ बातचीत की थी। धर्म परिवर्तन के उनके फैसले को उनके भाइयों, गुंटूर सोएकर्णोपुत्र, और गुरु सोएकर्णोपुत्र, और बहन मेगावती सुकर्णोपुत्री का समर्थन मिला है। वहीं, उनके धर्म परिवर्तन के फैसले का उनके पुत्र मोहम्मद ने स्वागत किया है।

कौन हैं राजकुमारी सुकमावती?
राजकुमारी सुकमावती इंडोनेशिया के संस्थापक राष्ट्रपति सुकर्णो और तीसरी पत्नी फातमावती की बेटी हैं। वह इंडोनेशिया की 5वीं राष्ट्रपति मेगावती सोकर्णोपुत्री की बहन भी हैं। उनका विवाह कांजेंग गुस्ती पंगेरन आदिपति आर्य मंगकुनेगारा IX से हुआ था, लेकिन 1984 में उनका तलाक हो गया था। इस्लाम छोड़कर सनातम धर्म में आने का उनका ये फैसला उनकी दादी इदा आयु न्योमन राय श्रीम्बेन से प्रभावित था, जो बाली की रहने वाली थीं। आपको बता दें कि, सुकमावती सुकर्णोपुत्री इंडोनेशियाई नेशनल पार्टी (पार्टाई नैशनल इंडोनेशिया-पीएनआई) की संस्थापक हैं।












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