म्यांमार में 500 भारतीय बंधकः सोशल मीडिया पर अच्छी नौकरी का झांसा देकर फंसाया, हो रहा शोषण

नैपीताव, 04 अक्टूबरः म्यांमार में लगभग 500 भारतीयों को बंधक बनाकर रखा गया है। ये सभी आईटी प्रोफेशनल्स हैं और इनसे दिन-रात साइबर क्राइम कराया जा रहा है। काम में कोताही बरतने पर इन्हें यातनाएं दी जा रही हैं। इन सभी लोगों को सोशल मीडिया के जरिए फंसाया गया और अब चीन फौजी की मदद से इनका इस्तेमाल डिजिटल फ्रॉड के लिए किया जा रहा है। भारत सरकार अलग-अलग माध्यमों के जरिए इन्हें छुड़ाने की कोशिशें कर रही है। विदेश मंत्रालय की मदद से अब तक 30 से अधिक भारतीयों को छुड़ाया जा चुका है।

32 लोगों को लाया गया वापस

32 लोगों को लाया गया वापस

विदेश मंत्रालय ने 23 सितंबर को कहा था कि म्यांमार में नौकरी में फंसाने के रैकेट में शामिल चार कंपनियों की पहचान की गई है। विदेश मंत्रालय, भारतीयों को बचाने के प्रयास में लगा हुआ है और अब तक 32 आईटी कर्मचारी को वापस लाने में सफलता हासिल हुई है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक म्यांमार में फंसे लोगों की संख्या 100 से 150 हो सकती है। हालांकि म्यांमार से हैदराबाद और दिल्ली वापस लौटने वाले लोगों ने द टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि वहां काम करने वाले लोगों की संख्या इससे कहीं अधिक है और यह आंकड़ा लगभग 500 तक हो सकता है।

सोशल मीडिया पर दिया गया नौकरी का झांसा

सोशल मीडिया पर दिया गया नौकरी का झांसा

ऑफिस ऑफ द प्रोटेक्टर ऑफ इमिग्रेंट्स (पीओई-हैदराबाद) के एक बयान में कहा गया है, "अब तक, ओकेएक्स प्लस (दुबई), लाजादा, सुपर एनर्जी ग्रुप और जेनटियन ग्रुप को इन नौकरियों की पेशकश करने वाली कंपनियों के रूप में पहचाना गया है।" इन्हें सोशल मीडिया की मदद से मोटी सैलरी का लालच देकर थाइलैंड बुलाया जाता है। थाईलैंड पहुंचने के बाद एयरपोर्ट से ही म्यांमार के गुमनाम इलाकों में ले जाया जाता है। इनसे पासपोर्ट समेत सभी जरूरी दस्तावेज छीन लिए जाते हैं।

बंधकों का साइबर ठगी में इस्तेमाल

बंधकों का साइबर ठगी में इस्तेमाल

इन भारतीय आईटी पेशेवरों को चीनी महिलाओं के रूप में ऑनलाइन पेश किया जाता है और क्रिप्टो करेंसी निवेश के नाम पर अमेरिका और यूरोप से उच्च आय वाले व्यक्तियों को फंसाया जाता है। इन बंधकों के दम पर ही म्यांमार से धोखाधड़ी का इंटरनेशनल रैकेट चल रहा है। यहीं से दुनियाभर के लोगों से साइबर ठगी की जा रही है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने दैनिक भास्कर को बताया कि विदेश मंत्रालय म्यांमार सरकार से जानकारी हासिल करने की कोशिशें कर रही है, लेकिन सूचना किसी तीसरे सोर्स से ही मिल पा रही है। बंधकों को छोड़ने के लिए भारी रकम वसूली जा रही है। ये फिरौती भी क्रिप्टोकरंसी में ली जा रही है।

काम न करने पर दिए जाते हैं बिजली के झटके

काम न करने पर दिए जाते हैं बिजली के झटके

म्यांमार से केरल लौटने वाले एक आईटी प्रोफेशनल्स ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि ये आईटी प्रोफेशनल्स एक कैंपस में काम करते हैं जो स्नाइपर राइफलों से लैस गार्डों द्वारा संचालित होते हैं। यहां काम करने वाले लोगों से 16-16 घंटे काम कराया जाता है। अगर कोई कर्मचारी काम करने से इंकार कर करता है तो उसे पीटा जाता है और बिजली के झटके तक दिए जाते हैं। केरलवासी ने बताया कि वहां मौजूद सभी लोगों के पासपोर्ट जब्त कर लिए गए हैं और फोन का इस्तेमाल करने पर प्रतिबंध लगा हुआ है। समय-समय पर चेकिंग अभियान भी चलाया जाता है।

चीन-म्यांमार की सीमा पर है ठिकाना

चीन-म्यांमार की सीमा पर है ठिकाना

ये आईटी कंपनियां म्यांमार के म्यावाडी इलाके से संचालित होती हैं। यह इलाका चीन-म्यांमार की सीमा पर स्थित है। इस इलाके को बड़े पैमान पर चीनी सेना द्वारा नियंत्रित किया जाता है। ऑफिस ऑफ द प्रोटेक्टर ऑफ इमिग्रेंट्स के मुताबिक इस तरह का पहला मामला जुलाई 2022 में दर्ज किया गया था। तब से, विदेश मंत्रालय, थाईलैंड और म्यांमार में अपने मिशनों के माध्यम से, ऐसे भारतीय नागरिकों को बचाने के लिए आवश्यक कार्रवाई कर रहा है। हालांकि कुछ ऐसी भी जानकारी मिली है कि कई भारतीय इस काम में मिलने वाली मोटी पगार के कारण स्वेच्छा से भी जुड़े हुए हैं।

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