Omkareshwar में आदिगुरु शंकराचार्य की प्रतिमा स्थापना की तैयारी, कहां तक पहुंचा काम, जानिए
संभागायुक्त डॉ. पवन कुमार शर्मा ने ओंकारेश्वर में आदि गुरु शंकराचार्य की प्रतिमा स्थापना के संदर्भ में सभी संबंधित एजेंसियों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग द्वारा बैठक लेकर प्रगति की समीक्षा की।

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आस्था और अध्यात्म की नगरी ओमकारेश्वर में आदि गुरु शंकराचार्य की 108 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित की जानी है, जहां इसे लेकर तैयारियों का सिलसिला शुरू हो चुका है। महाकाल लोक के बाद ओमकारेश्वर तीर्थ नगरी को संवारने की तैयारी की जा रही है। साथ ही यहां आदि गुरु शंकराचार्य की बेहद ही आकर्षक और विशाल प्रतिमा स्थापित की जाएगी। ओंकारेश्वर में आदि शंकराचार्य की 108 फीट ऊंची बहुधातु प्रतिमा व पेडेस्टल के निर्माण कार्य के लिए पुनरीक्षित लागत राशि 198.25 करोड़ की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है। उधर, प्रशासन के अधिकारी लगातार बैठक लेकर प्रतिमा स्थापना कार्य, और अन्य विकास कार्यों की समीक्षा कर रहे हैं।
बैठक में दिए ये दिशा-निर्देश
संभागायुक्त डॉ. पवन कुमार शर्मा ने कहा है कि ओंकारेश्वर के पावन पर्वत पर स्थापित होने वाली शंकराचार्य की प्रतिमा धर्म और अध्यात्म का सुंदर संजोग बनेगी। यह शंकराचार्य न्यास का ऐसा प्रकल्प है जिससे ओंकारेश्वर में धार्मिक पर्यटन को एक नया स्वरूप मिलेगा। संभागायुक्त डॉ. पवन कुमार शर्मा ने ओंकारेश्वर में आदि गुरु शंकराचार्य की प्रतिमा स्थापना के संदर्भ में सभी संबंधित एजेंसियों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग द्वारा बैठक लेकर प्रगति की समीक्षा की। बैठक में संस्कृति विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों सहित कलेक्टर खंडवा अनूप कुमार सिंह भी शामिल थे। बैठक में बताया गया कि, शंकराचार्य की प्रतिमा का निर्माण अन्यत्र प्रारंभ हो गया है। ग्रीष्मकाल की समापन बेला में ही ओंकारेश्वर में प्रतिमा का अंतिम रूप से संयोजन किया जाएगा। मूर्ति के निर्माण के लिए मॉडल का रूप संस्कृति विभाग द्वारा अंतिम रूप से चयनित किया जा चुका है। संभागायुक्त द्वारा प्रतिमा निर्माण स्थल में लैंडस्केपिंग संग्रहालय इंटरप्रिटेशन सेंटर इत्यादि के संदर्भ में भी आवश्यक निर्देश दिए गए।
ओमकारेश्वर में ली थी दीक्षा
ओमकारेश्वर से आदि गुरु शंकराचार्य का बेहद ही खास जुड़ाव रहा है। यही वह स्थान है, जहां शंकराचार्य ने दीक्षा ली थी। ओम्कारेश्वर को आदि गुरु शंकराचार्य की दीक्षा स्थली के रूप में भी जाना जाता है। यही कारण है कि, यहां सरकार ने विशाल प्रतिमा स्थापित करने का फैसला किया है। इसी के साथ ओमकारेश्वर तीर्थ नगरी को भी संवारा जाएगा। इससे पहले मध्यप्रदेश में महाकाल लोक को संवारा गया है, जिसे देखने अब दूर-दूर से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं।
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