MP में बिजली संकट की आहट, ताप विद्युत गृहों में चंद दिनों का कोयला बचा
इंदौर, 2 मई: देश के कई राज्यों के साथ-साथ अब मध्यप्रदेश में भी कोयले की कमी के चलते बिजली संकट गहराने लगा है, जहां प्रदेश के ताप विद्युत गृहों में अब चंद दिनों का कोयला शेष बचा है. उधर सरकार कोयले की कमी पूरी करने के हर संभव प्रयास करती नजर आ रही है. प्रदेश में फिलहाल कोयले की जरूरत है, लेकिन कोयले की आपूर्ति नहीं हो पा रही. वहीं बिजली सप्लाई की डिमांड भी बढ़ती चली जा रही है, कोयले की कमी होने के कारण सप्लाई पर इसका असर देखने मिल रहा है.

ऊर्जा मंत्री ने की रेल मंत्री से मुलाकात
प्रदेश में गहरा रहे बिजली संकट को देखते हुए, ऊर्जा मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर ने हाल ही में अपने दिल्ली दौरे के दौरान रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात की है. इस दौरान ऊर्जा मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को मध्यप्रदेश के हालातों से अवगत कराते हुए, कोयले के परिवहन के लिए रोजाना मिलने वाले रैकों में बढ़ोतरी कि मांग की है.
विद्युत ताप गृहों में इतने दिनों का कोयला शेष बचा
प्रदेश के विद्युत ताप गृहों में अब केवल कुछ ही दिनों का कोयला शेष बचा है, जिससे एक बार फिर प्रदेश में बिजली कटौती की स्थिति पैदा हो सकती है. मध्य प्रदेश को बिजली आपूर्ति पूरी करने के लिए रोजाना 58 हजार मीट्रिक टन कोयले की जरूरत है, लेकिन अभी फिलहाल 50 हजार मैट्रिक टन कोयला ही उपलब्ध हो पा रहा है.
ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत कटौती का सिलसिला शुरू
बिजली संकट की ओर बढ़ रहे मध्य प्रदेश में अब ग्रामीण इलाकों में अघोषित कटौती की जा रही है. प्रदेश में बिजली की खपत पर लगाम लगाने के लिए विद्युत कटौती का सहारा लिया जाने लगा है. उधर, विशेषज्ञों की माने तो शहर और कस्बे दोनों ही जगह बिजली की खपत बढ़ गई है.












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