MP में बिजली संकट, इन कारणों के चलते अंधेरे में डूब सकता है पूरा प्रदेश

इंदौर, 26 अप्रैल: मध्य प्रदेश में नए संकट की आहट हुई है, जहां कोयले की कमी के चलते पूरा प्रदेश अंधेरे में डूब सकता है. प्रदेश के विद्युत ताप गृहों में अब केवल कुछ ही दिनों का कोयला शेष बचा है, जिससे एक बार फिर प्रदेश में बिजली कटौती की स्थिति पैदा हो सकती है. मध्य प्रदेश को बिजली आपूर्ति पूरी करने के लिए रोजाना 58 हजार मीट्रिक टन कोयले की जरूरत है, लेकिन अभी फिलहाल 50 हजार मैट्रिक टन कोयला ही उपलब्ध हो पा रहा है. देशभर में व्याप्त कोयले के संकट के बीच अब मध्यप्रदेश में भी कोयले की कमी बिजली का संकट पैदा कर सकती है, जहां अब इस समस्या से निपटने के लिए शिवराज सरकार लगातार मंथन कर रही है, तो वहीं ऊर्जा विभाग भी इस संकट से निपटने के लिए निरंतर प्रयासों में जुटा हुआ है.

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कई राज्यों में गहराया बिजली का संकट

कोयले की किल्लत के चलते देश के कई राज्यों में बिजली संकट गहराया हुआ है. ऐसे में मध्यप्रदेश में भी अब कुछ ही दिन का कोयला शेष बचा है. नियम के अनुसार किसी भी पावर प्लांट में 20 दिनों का कोयला रहना आवश्यक है. बहरहाल, अब देखने वाली बात होगी कि प्रदेश की शिवराज सरकार, कोयले की कमी से उपजे बिजली संकटों के हालातों का किस तरह से सामना कर सकेगी, और किस तरह से प्रदेशवासियों को बिजली की इस समस्या से निजात दिला पाएगी.

प्रदेश के पावर प्लांटों की ऐसी स्थिति

मध्यप्रदेश में यदि पावर प्लांटों की बात करें, तो प्रदेश में कुल 4 पावर प्लांट हैं, लेकिन कोयले की सप्लाई नहीं होने पर आने वाले दिनों में इन सभी पावर प्लांटों में विद्युत उत्पादन ठप हो सकता है. प्रदेश में स्थित अमरकंटक पावर प्लांट, संजय गांधी थर्मल पावर प्लांट, सतपुड़ा थर्मल पावर प्लांट और सिंगाजी थर्मल पावर प्लांट में बिजली का उत्पादन होता है. इन चारों ही पावर प्लांटों की सहायता से प्रदेश में बिजली की आपूर्ति की जाती है.

ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत कटौती का सिलसिला शुरू

बिजली संकट की ओर बढ़ रहे मध्य प्रदेश में अब ग्रामीण इलाकों में अघोषित कटौती की जा रही है. प्रदेश में बिजली की खपत पर लगाम लगाने के लिए विद्युत कटौती का सहारा लिया जाने लगा है. उधर, विशेषज्ञों की माने तो शहर और कस्बे दोनों ही जगह बिजली की खपत बढ़ गई है.

कोयले की कमी से निपटने के लिए शिवराज सरकार की तैयारी

प्रदेशभर में कोयले की किल्लत को देखते हुए, अब सरकार भी अलर्ट मोड पर नजर आ रही है. प्रदेश के उर्जा मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर लगातार अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करते नजर आ रहे हैं. इसी के साथ सरकार ने जनता को इस बात का आश्वासन दिया है कि, प्रदेश में बिजली संकट नहीं आने दिया जाएगा, और जल्द ही कोयले की कमी को भी दूर कर लिया जाएगा.

कांग्रेस ने साधा सरकार पर निशाना, पूछा ये सवाल

देश के साथ ही प्रदेश में गहरा रहे बिजली संकट को लेकर अब कांग्रेस ने शिवराज सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया है. वहीं हाल ही में सीएम शिवराज सिंह चौहान के कार्यक्रम में हुई विद्युत कटौती को लेकर भी कांग्रेस ने सरकार पर तंज कसा है. कुलमिलाकर, देखा जाए तो बिजली संकट के बीच सियासत का सिलसिला भी तेज है, जहां कांग्रेस लगातार बीजेपी सरकार पर निशाना साधते नजर आ रही है.

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