MP के इस शहर में चाइनीज मांझे से पतंग उड़ाना प्रतिबंधित, मिलेगी सख्त सजा
मकर संक्रांति का पर्व नजदिक है, ऐसे में पतंगबाजी के लिए उपयोग में आने वाले मांझे से किसी को नुकसान ना हो, इसे देखते हुए खरगोन जिले में चाइनीज मांझे को प्रतिबंधित किया है.

प्रदेशभर में 14 व 15 जनवरी को जिले में मकर सक्रांति का पर्व मनाया जाएगा। मकर सक्रांति के अवसर पर बच्चों व अन्य व्यक्तियों द्वारा सामूहिक रूप से पतंगबाजी की जाती है। जिसमें व्यक्तियों पतंग उड़ाने के लिये शीशा युक्त मांजा चायना धागा उपयोग किया जाता है। चायना धागे के उपयोग से पक्षियों के घायल होने तथा मृत्यु की घटना होने, साथ ही सड़क पर चलने वाले व्यक्तियों के भी घायल होने की संभावना रहती है। इन सभी की सुरक्षा ध्यान में रखते हुए अपर कलेक्टर जेएस बघेल ने पतंग उड़ाने के दौरान चीनी मांजे (चायना धागा) के निर्माण, क्रय-विक्रय तथा प्रयोग करने पर दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा-144 के तहत संपूर्ण जिला की सीमा में 22 दिसंबर से आगामी 02 माह तक के लिए प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए है।
नायलोन मांजे पर रहेगा प्रतिबंध
जारी आदेश में कोई भी व्यक्ति सार्वजनिक स्थान, मार्ग, मकानों की छतों पर पतंग उड़ाने के दौरान चायनीज मांजे के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया है। वहीं जिलें के समस्त थोक व्यापारी, विक्रयकर्ता चायनीज मांजे के क्रय विक्रय पर प्रतिबंध रहेगा। पतंग उड़ाने में उपयोग किये जाने वाले प्लास्टिक, सिन्थेटिक मटेरियल से निर्मित चायनीज, नायलोन मांजे से पक्षियों एवं मानवों को होने वाले दुष्प्रभाव के कारण इसके उपयोग को प्रतिबंधित किया है। मकर सक्रांति पर्व पर पतंगबाजी के लिए ऐसी डोर का क्रय-विक्रय एवं निर्माण किया जावे, जिससे किसी भी व्यक्ति, पशु-पक्षियों को किसी भी प्रकार की शारीरिक क्षति न हो। यदि कोई व्यक्ति प्रतिबंधात्मक आदेश का उल्लंघन करेगा तो भारतीय दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 188 के अंतर्गत अभियोजित किया जाएगा।
लगातार सामने आते हैं मामले
चाइना की डोर से नुकसान पहुंचने के मामले लगातार सामने आते रहते हैं। इतना ही नहीं चाइना के मांझे से पतंग उड़ाने के चलते हर साल लगभग 500 से ज्यादा पक्षी भी जख्मी हो जाते हैं। वहीं पतंगबाजी का मौसम आने पर प्रशासन हमेशा से ही चाइना डोर पर प्रतिबंध की बात करता है, लेकिन बावजूद इसके अवैध तरीके से चाइना डोर बिकने के कारण लगातार इसका उपयोग पतंगबाजी में किया जाता है, जिसका सीधा असर वाहन चालकों और पक्षियों पर पड़ता है, जहां लगातार इस तरह के मामले सामने आते हैं।
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