इंदौरियों की पहली पसंद है पोहा, शहर में हर दिन होती है 60 से 65 टन पोहे की खपत!
इंदौर, 7 जून: आज का दिन हर इंदौरी के लिए बेहद खास है, क्योंकी आज ही वो दिन है जब पूरे विश्व में पोहा दिवस मनाया जाता है. जी हां, वही पोहा जिसे इंदौर से पहचान मिली और जिसके लिए इंदौर देश ही नहीं पूरी दुनियां में अपनी अलग पहचान रखता है. जब भी पोहा या इंदौर की बात की जाति है. तो दोनों के ही जिक्र में एक दूसरे का नाम शामिल ना हो ऐसा हो ही नहीं सकता, क्योंकी जहां पोहे को पहचान इंदौर के नाम से मिली है, तो वहीं इंदौर को भी लोग अक्सर पोहे के लिए ही पहचानते हैं. यही कारण है की 7 जून यानि विश्व पोहा दिवस पर इंदौरी जायके का जिक्र ना हो ऐसा हो ही नहीं सकता. राजनेता और या फिल्मी सितारे या फिर विदेश से आने वाले मेहमान हर किसी की इंदौर आते ही एक ही फरमाइश होती है, और वो है पोहा, और हो भी क्यूं ना क्योंकी जो इंदौर आए और पोहा ना खाए तो फिर इंदौर को पहचान कैसे पाए.

60 से 65 टन पोहे की खपत
इंदौर के पोहा की दिवानगी का अंदाज इस बात से ही लगाया जा सकता है, की हर दिन शहर में लगभग 60 से 65 टन पोहे की खपत होती है. जहां घर से लेकर होटलों तक सुबह से लेकर शाम तक सिर्फ और सिर्फ पोहे की डिमांड ही अक्सर लोगों की फरमाइश में होती है. शादी हो या गमी को कोई कार्यक्रम, बच्चे का जन्मदिन हो या त्योहार का उत्सव इंदौर में बगैर पोहे कुछ भी संभव ही नहीं है. तभी तो इंदौर और इंदौरी पोहा आज वैश्विक स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाने में कामयाब हुआ है.
अलग-अलग तरीकों से बनता है पोहा
खान-पान के शौकिनों के शहर इंदौर में पोहा का उपयोग अलग-अलग तरीकों से किया जाता है, जहां पोहा बनाने के लिए अलग-अलग रैसिपी का इस्तेमाल भी होता है. इंदौर में पोहे का उपयोग नास्ते के तौर पर सर्वाधिक किया जाता है.
इंदौर और पोहे का खास कनेक्शन
कुलमिलाकर, देखा जाए तो इंदौर और पोहे का खास कनेक्शन है, भले ही पोहे ने इंदौर से निकलकर अब देश दुनियां में अपनी अलक पहचान बना ली हो, लेकिन आज भी पोहे की पहचान में इंदौर का अपना अलग ही महत्व है.












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