Indore Temple Accident: बावड़ी से ज्यादा गहरे हादसे के जख्म, ऐसी बिछी थी मौत की छत, नहीं भूलेगा इंदौर
इंदौर बावड़ी हादसे ने हर किसी को स्तब्ध कर दिया। अब मामले में जांच का दौर शुरू हो गया है। लेकिन ग़मगीन कई परिवारों का साया 60 फीट गहरी बावड़ी में ही समा गया। जिसे भुला पाना आसान नहीं।

Indore beleshwar Mahadev jhulelal Temple Accident: मिनी मुंबई कहलाने वाले मध्य प्रदेश का इंदौर, रामनवमी के दिन हुए दर्दनाक हादसे जैसे दौर से कभी नहीं गुजरा। बावड़ी में समाई 36 जिंदगियां ही नहीं, उन परिवारों के अरमान भी डूब गए। छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्ग पुण्य कमाने मंदिर पहुंचे थे, लेकिन वहां तो पाप करने वालों ने बावड़ी पर मौत की छत बिछा रखी थी। हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों पर संजीदा सरकार ने कार्रवाई करना भी शुरू कर दिया हैं। बावड़ी से ज्यादा गहरे, कभी न भर पाने वाले अब, हादसे के जख्म हैं। कई सवालों के बीच सबक भी है कि ऐसी जगहों की शिकायतों को नजरअंदाज करने का खामियाजा बेगुनाह लोगों की जान गंवाकर चुकाना पड़ता हैं।

पुण्यदायी जगह पर पाप से मुकाबला
रामनवमी पर एमपी के इंदौर बेलेश्वर मंदिर हादसे ने पूरे देश को झकझोर दिया। किसी ज़माने में 'बावड़ी' भी पुण्य का ही प्रतीक मानी जाती थी। मंदिर भी लोग पुण्य हासिल करने ही पहुंचते हैं। लेकिन हवन-पूजा के लिए जुटी श्रद्धालुओं की भीड़ ने इस बात की जरा भी कल्पना नहीं की होगी, मंदिर के दरबार में उनकी जिंदगी का आखिरी दर्शन हैं। जमीन समझकर लोग जहां बैठे, उसके नीचे तो पाप बिछा था। 60 फीट गहरी बावड़ी, जिसमें चार मंजिला कोई इमारत समां जाए, उससे कोई मुकाबला कर भी कैसे पाता?

कोई हाथ जोड़े था, कोई ध्यान में था
हादसे के बाद चश्मदीदों के जो बयान आए, उसकी कल्पना से ही दिल सहम जाता हैं। लोगों ने बताया कि मंदिर में जब यह हादसा हुआ तब मंदिर में हवन चल रहा था। बावड़ी की छत मौजूद लोगों में कोई आंखे बंद किए ध्यान की मुद्रा में था, तो कोई हाथ जोड़े भगवान की स्तुति कर रहा था। सबसे पहले बावड़ी के एक हिस्सा अचानक भरभराकर गिरा, लोग संभल पाते कि पल भर में आधा सैकड़ा से ज्यादा लोग गहराई में समा गए। किसी बावड़ी में जो बच्चे ऊपर सुरक्षित बचे वो मां को पुकारने लगे और जिनके बच्चे बावड़ी में गिरे ऊपर मौजूद उनकी मां बेसुध हो गई। चीख-पुकार का मंजर जिस किसी ने देखा, उसकी रूहं कांप गई। एक महिला तो अपने बच्चे को प्रसाद खिलाते वक्त बावड़ी में गिरी। हादसे में डेढ़ दर्जन से ज्यादा लोग घायल भी है। जिनका अलग-अलग अस्पताल में इलाज जारी हैं। सरकार की ओर से पूरा खर्च उठाया जा रहा है।

करीब 200 साल पुरानी थी बावड़ी
इंदौर के जिस स्नेह नगर इलाके में यह दर्नाक हादसा हुआ, वहां पहले कभी खेत हुआ करते थे। वक्त गुजरा तो खेतों ने रहवासी बसाहट की शक्ल लेना शुरू कर दिया। अतीत के झरोखे में हादसे वाली बावड़ी भी दर्ज थी। स्थानीय लोग इसके दो सौ साल पुरानी होने का अनुमान लगाते हैं। राजा रजवाड़ों के वक्त प्राकृतिक जल स्त्रोत के रूप में इनका निर्माण करवाया जाता था, जो लोगों की प्यास बुझाने और जलापूर्ति का साधन हुआ करती थी। यह बावड़ी भी उन्ही में से थी, जिसका आस्त्तिव बचा था।

गार्डन वाली जगह पर मंदिर!
हादसे वाले इलाके की स्नेह नगर समिति ने इस बावड़ी का जिक्र करते हुए कई तरह की शिकायत भी की थी। क्षेत्रीय लोग बताते है कि बेलेश्वर मंदिर का पहला छोटी सा मढियानुमा स्वरुप था। जिन किसान परिवारों ने इसका निर्माण करवाया, वह यहां से चले गए। लोग यहां पूजा पाठ करने लगे। गुजरते वक्त से साथ क्षेत्र जब कॉलोनी के रूप में विकसित हुआ, तो मंदिर से लगी जगह गार्डन के लिए रिजर्व कर दी गई। लेकिन कुछ लोगों ने मंदिर पर अधिपत्य ज़माने ट्रस्ट का निर्माण कर लिया। फिर मंदिर का स्वरुप भी बढ़ गया। बावड़ी वाली जगह को ट्रस्ट ने अपने संरक्षण में ले लिया।

शिकायत को हवा में उड़ाने वाले कौन?
मंदिर में अवैध निर्माण और खतरे को लेकर स्थानीय समिति द्वारा की गई शिकायतों का पुलिंदा अब फिर से खुल गया गया। सोशल मीडिया पर वो पत्र भी वायरल हो रहे है, जिसमें नगर निगम प्रशासन इस बावड़ी को पानी की टंकी समझता था। आरोप मंदिर ट्रस्ट पर पहले भी लगाए जाते रहे और अभी भी लगाए जा रहे हैं। स्थानीय प्रशासन ने शिकायतों का निराकरण करने बदले सिर्फ पत्राचार की करने की रस्म ही अदा की। अब संबंधित विभाग के ऐसे अधिकारी कर्मचारी को भी चिन्हित किया जा रहा है। जिनकी लापरवाही बरतने में भूमिका रही।

क्या होगा 'मौत की बावड़ी' का?
बेकसूर 36 लोगों की जान लीलने वाली इंदौर की इस बावड़ी के इतिहास में काला अध्याय जुड़ गया हैं। हादसे की वजह से जिन लोगों के घर के सदस्य अब दुनिया में नहीं है, उनके आंगन में दुःख के सिवाय कुछ नहीं। हालांकि नगर निगम मेयर और स्थानीय प्रशासन ने शहर की ऐसे बावड़ी, कुएं पता लगाने निर्देश दे दिए है, जिन पर अवैध निर्माण हैं। उन्हें हटाकर सुरक्षित किया जाएगा, ताकि भविष्य में इस तरह की दोबारा कोई दुर्घटना न हो। मंदिर वाली इस बावड़ी वाले हिस्से में बाहरी लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया गया हैं। मंदिर निर्माण समेत यहां की भूमि के संबंध में भी जांच की जा रही हैं।
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