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जेड प्लस सुरक्षा खतरे के आधार पर होनी चाहिए, खर्च उठाने की क्षमता पर नहींः सुप्रीम कोर्ट

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अंबानी बंधुओं और उनके परिवार के सदस्यों को जेड प्लस सुरक्षा कवर वापस लेने की याचिका को खारिज कर दिया है, लेकिन देश के शीर्ष अदालत ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उक्त विचार पर घुड़की लगाई है कि पुलिस को उन लोगों को उच्च स्तरीय सुरक्षा देनी चाहिए, जिनकी जान को खतरा हो और जो सुरक्षा का खर्च चुकाने को तैयार हों। याचिकाकर्ता ने यह कहकर अंबानी बंधुओं से सुरक्षा वापस लेनी की मांग थी, वो खुद के खर्च पर अपनी सुरक्षा करने में सक्षम हैं।

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बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा मामले में दायर एक जनहित याचिका को खारिज की थी

बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा मामले में दायर एक जनहित याचिका को खारिज की थी

गौरतलब है बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा मामले पर दायर एक जनहित याचिका को खारिज करने के बाद याचिकाकर्ता हिमांशु अग्रवाल ने उसे सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज किया था। जनहित याचिका में याचिकाकर्ता ने इस आधार पर अंबानी बंधुओं और उनके परिवार के सदस्यों को जेड प्लास सुरक्षा वापस लेने की मांग की थी कि वो अमीर हैं और अपनी सुरक्षा के लिए पैसा खर्च करने में सक्षम हैं, ऐसे में उनकी सुरक्षा के लिए सरकारी खजाने से पैसा क्यूं किया जाए।

कानून का राज सुनिश्चित करना राज्य की जिम्मेदारी है: बॉम्बे हाई कोर्ट

कानून का राज सुनिश्चित करना राज्य की जिम्मेदारी है: बॉम्बे हाई कोर्ट

बॉम्बे हाई कोर्ट ने जनहित याचिक को खारिज करते हुए कहा, कानून का राज सुनिश्चित करना राज्य की जिम्मेदारी है। इसमें ऐसे नागरिको को सुरक्षा प्रदान करना भी शामिल है, जिनकी जान को खतरा है। रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के राजस्व का भारत की जीडीपी पर बड़ा प्रभाव है। इसलिए इन लोगो की जान के खतरे को हल्के में नहीं लिया जा सकता है।

दोनों उद्योगपति भाईयों और उनके परिवार को खतरा है: मुकुल रोहतगी

दोनों उद्योगपति भाईयों और उनके परिवार को खतरा है: मुकुल रोहतगी

सुप्रीम कोर्ट ने अंबानी बंधुओं की ओर से कोर्ट में पेश हुए वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने बताया कि दोनों उद्योगपति भाईयों और उनके परिवार को खतरा है। उन्होंने बताया कोर्ट को बताया कि अंबानी बंधु सरकार की तरफ से मिली सुरक्षा के बदले में पेमेंट कर रहे हैं। इस पर कोर्ट ने सवाल किया कि क्या हर वो आदमी जिसे जान का खतरा महसूस हो और सुरक्षा का खर्च उठाने को तैयार हो, उसे सरकार की ओर से सुरक्षा मुहैया करनी चाहिए।

निजी व्यक्तियों को सुरक्षा प्रदान करने को मंजूरी नहीं देना चाहता है कोर्ट

निजी व्यक्तियों को सुरक्षा प्रदान करने को मंजूरी नहीं देना चाहता है कोर्ट

पीठ ने पूछा कि अगर कोई नागरिक अपने जीवन के लिए खतरा मानता है और सुरक्षा कवर की लागत वहन करने को तैयार है, तो क्या राज्य इसे प्रदान करना चाहिए? पीठ ने कहा, पिछली बार राज्य द्वारा धमकी पाने वाले किसी नागरिक समीक्षा कब की गई थी? हम यह मंजूरी नहीं देना चाहते हैं कि राज्य को निजी व्यक्तियों को सुरक्षा कवर प्रदान करना चाहिए, अगर वह सुरक्षा कवर के लिए भुगतान करने की क्षमता रखता है।

कोई व्यक्ति खर्च चुकाने में सक्षम है, तो उसे सुरक्षा मुहैया करानी चाहिए

कोई व्यक्ति खर्च चुकाने में सक्षम है, तो उसे सुरक्षा मुहैया करानी चाहिए

शीर्ष अदालत ने आगे कहा, हमारी राय है कि अगर कोई व्यक्ति खर्च चुकाने में सक्षम है, तो सरकार को उसे सुरक्षा मुहैया करा ही देनी चाहिए। सरकार को किसी के खतरे और उसकी सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करते रहना चाहिए। याचिकाकर्ता की अपील को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि राज्य को समय-समय पर अंबानी के लिए खतरे की धारणा की समीक्षा करेंगे और उन्हें सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में उचित कदम उठाएंगे।

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English summary
The Supreme Court on Tuesday rejected the plea to withdraw the Z Plus security cover to the Ambani brothers and their family members, but the country's top court has rebuffed the Bombay High Court's view that the police should be given a higher level Security should be given to those who are in danger of life and who are ready to pay the security expenses. The petitioner demanded the withdrawal of security from the Ambani brothers, saying that they are able to protect themselves at their own expense.
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