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योगी आदित्यनाथ का दावा कितना सही कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे सुरक्षित राज्य है? - फ़ैक्ट चेक

उत्तर प्रदेश, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
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उत्तर प्रदेश, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
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उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में इन दिनों विधानसभा के चुनाव हो रहे हैं. इसलिए इन दोनों राज्यों में बेहतर क़ानून और व्यवस्था चुनाव का प्रमुख मुद्दा बना हुआ है.

इस बीच शनिवार को उत्तराखंड के टिहरी में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश आज की तारीख़ में देश का सबसे सुरक्षित राज्य है.

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक़, बीजेपी की ओर से आयोजित उस जनसभा में योगी आदित्यनाथ ने आगे कहा, ''मुझे भय है कि अपराधी और गुंडे अब उत्तर प्रदेश से निकलकर उत्तराखंड में घुस जाएंगे. इसलिए हमें उत्तराखंड को भी यूपी की तरह सुरक्षित बनाना है.''

उन्होंने यह भी कहा कि बात जब देश के बचाव और सुरक्षा की आती है तो बीजेपी इससे कोई समझौता नहीं करती.

https://twitter.com/ANINewsUP/status/1492403866817609728?s=20&t=b3AvVNNHdN4YhxeKpjnv1g

योगी आदित्यनाथ के अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी के दूसरे नेता भी रैलियों में क़ानून और व्यवस्था के मोर्चे पर पिछले 5 सालों के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार के किए बेहतर कामों की जमकर तारीफ़ कर रहे हैं.

बीजेपी का दावा है कि यूपी में उनकी सरकार ने आम लोगों ख़ासकर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए काफ़ी प्रयास किए हैं. उत्तर प्रदेश के लिए जारी पार्टी के घोषणापत्र में भी लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर फ़ोकस किया गया है.

दूसरी ओर, कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी और अन्य विपक्ष नेताओं ने राज्य की बिगड़ती क़ानून और व्यवस्था को मुद्दा बनाते हुए राज्य सरकार पर हमला किया है.

यूपी में अपराध
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यूपी में अपराध

आख़िर सच क्या है?

सरकार और विपक्ष के दावों की सही सूरत पता करने के लिए बीबीसी ने सरकार द्वारा जारी आंकड़ों की पड़ताल की है. उसके बाद बीबीसी ने पाया है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का दावा कि उनका राज्य देश में सबसे सुरक्षित है, सही नहीं है.

देश में होने वाले अपराधों से जुड़े आंकड़ों को इकट्ठा करने का काम नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो यानी एनसीआरबी का है. केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाली यह संस्था देश के सभी 28 राज्यों और आठ केंद्र शासित प्रदेशों से अपराध के विस्तृत आंकड़े जुटाकर 'क्राइम इन इंडिया' नाम की एक रिपोर्ट प्रकाशित करती है.

योगी
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योगी

इस रिपोर्ट में एनसीआरबी अपराधों को दो श्रेणियों में बांटती है: भारतीय दंड संहिता यानी आईपीसी के तहत किए गए अपराध और विशेष एवं स्थानीय क़ानूनों के तहत किए गए अपराध. इसमें दोनों श्रेणियों को मिलाकर अपराधों की कुल संख्या भी बताई जाती है.

पिछले साल सितंबर में जारी हुए एनसीआरबी के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, 2020 में उत्तर प्रदेश में सभी श्रेणियों के तहत अपराध के कुल 6,57,925 मामले दर्ज हुए. ऐसे में बेहतर सुरक्षा वाले राज्यों के लिहाज से यूपी का नंबर देश के सभी 36 राज्यों में 34वां रहा.

उत्तर प्रदेश से भी ख़राब हाल केवल दो राज्यों तमिलनाडु और गुजरात का रहा. तमिलनाडु में देश में सबसे ज़्यादा कुल 13,77,681 अपराध के मामले दर्ज हुए. वहीं गुजरात में अपराध के कुल 6,99,619 मामले सामने आए.

2020 में अपराध के सबसे कम मामलों के साथ देश का सबसे सुरक्षित प्रदेश लक्षद्वीप रहा. वहां पूरे साल केवल 147 अपराध के मामले दर्ज किए गए.

महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध
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महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध

अपराध दर के लिहाज से भी यूपी सबसे सुरक्षित राज्य नहीं

हालांकि, केवल कुल अपराधों की संख्या देखकर ही किसी राज्य के माहौल का सटीक आकलन नहीं किया जा सकता. वो इसलिए कि देश के राज्यों के बीच जनसंख्या में काफ़ी बड़ा अंतर है. कई राज्य ऐसे हैं जहां की जनसंख्या केवल कुछ लाख है तो कई राज्यों की आबादी कई करोड़ है.

आबादी के लिहाज से उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है जहां क़रीब 24 करोड़ लोग रहते हैं. ऐसे में संभावना होती ही है कि ज़्यादातर पैमानों पर यह राज्य देश में सबसे आगे होगा.

ऐसे में किसी राज्य के माहौल की सही तस्वीर पता करने का सबसे बेहतर पैमाना अपराध दर होता है. इसका मतलब हर एक लाख की आबादी पर दर्ज होने वाले अपराधों की संख्या से है.

लेकिन अपराध दर के लिहाज से भी उत्तर प्रदेश देश का सबसे सुरक्षित राज्य नहीं है. यूपी में एक लाख की आबादी पर 287.4 अपराध दर्ज किए गए और इस तरह इस मामले में यह देश का पहला नहीं बल्कि 20वां सबसे सुरक्षित राज्य है.

अपराध दर के आंकड़ों से पता चलता है कि देश का सबसे सुरक्षित प्रदेश दादरा-नागर हवेली और दमन-दीव है. इस केंद्र शासित प्रदेश में अपराध की दर केवल 51.3 है. वहीं देश का सबसे ख़तरनाक राज्य तमिलनाडु पाया गया, जहां अपराध दर 1,808.8 है.

आईपीसी के तहत दर्ज होने वाले अपराधों से इतर ख़ास क़िस्म के अपराधों में भी उत्तर प्रदेश का हाल बेहतर नहीं है. उदाहरण के लिए, दहेज के चलते होने वाली मौतों की दर के लिहाज से यह राज्य पूरे देश में नंबर एक है. इससे पता चलता है कि उत्तर प्रदेश को क़ानून और व्यवस्था और महिला सुरक्षा के मामले में अभी लंबा रास्ता तय करना बाक़ी है.

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