योगी आदित्यनाथ होंगे सीएम कैंडीडेट! कितना सच, कितना झूठ?

लखनऊ। दरअसल सोशल मीडिया के अलग अलग माध्यमों में, भारतीय जनता पार्टी के कार्यक्रमों में इस बात की जोरदार चर्चा है कि आगामी 2017 यूपी विधानसभा चुनावों में भाजपा बतौर सीएम कैंडीडेट गोरखपुर से सांसद योगी आदित्यनाथ को प्रोजेक्ट करेगी। हालांकि ये महज आंकलन मात्र है। पर, सच्चाई क्या है इसके लिए हमने हर एक महत्वपूर्ण पहलू पर निगहबानी की।

Yogi Adityanath

इस पूरे क्रम में जो हकीकत खुलकर सामने आई, उसे आपको भी जानना चाहिए। तो ये है हमारी ग्राउंड जीरो से रिपोर्ट-

पार्टी के अधिकतर लोग ''योगी'' के पक्ष में

यूपी के सलेमपुर से सांसद रवीन्द्र कुशवाहा ने गोरक्ष पीठाधीश्वर सांसद आदित्यनाथ को उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा के मुख्यमंत्री पद का दावेदार घोषित करने की मांग की थी। जबकि सूत्रों के मुताबिक प्रदेश में पार्टी के ही ज्यादातर लोग योगी आदित्यनाथ को बतौर सीएम प्रोजेक्ट करने के पक्ष में हैं।

इन चेहरों को लेकर 'कशमकश' की स्थिति!

कुछ वक्त पहले बिल्थरारोड में पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक में सांसद रवीन्द्र कुशवाहा ने कहा कि विधानसभा चुनाव में भाजपा के पास मुख्यमंत्री पद के दावेदार के तौर पर कल्याण सिंह और योगी आदित्यनाथ के रूप में दो ही विकल्प हैं।

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सोशल मीडिया के जरिए कोई गृह मंत्री राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह को सीएम कैंडीडेट के तौर पर बेहतर बताया जा रहा है तो एक खेमा वरूण गांधी के साथ भी खड़ा दिखाई देता है। जबकि इस कतार में योगी पहले नंबर पर हैं।

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योगी आदित्यनाथ

योगी आदित्यनाथ

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यूपी में हर जगह ''योगी-योगी'' की गूंज

जी हां पिछले महीने बहराईच में राजा सुहेल देव की प्रतिमा का अनावरण करने जब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह पहुंचे तो वहां पर योगी आदित्यनाथ के समर्थक योगी के साथ जनबल को दर्शाने के लिए भगवा झंडे के साथ पहुंचे। बहरहाल सोशल मीडिया के जरिए भी हिंदू युवा वाहिनी जैसे कई हिंदू संगठन योगी को सीएम कैंडीडेट घोषित करने की मांग कर रहे हैं। आपको बताते चलें कि हिंदू युवा वाहिनी के संस्थापक योगी आदित्यनाथ हैं।

'मास्टर स्ट्रोक' के तौर पर ये चाल चल सकती है 'BJP'

भाजपा में प्रदेश अध्यक्ष की उठापटक के अंत के बाद, सबकी नजरें हैं 'सीएम कैंडीडेट' पर। अन्य राज्यों में सीएम पद के लिए लोगों पर प्रभाव छोड़ने वाला चेहरा न चुनने का खामियाजा भाजपा दिल्ली और बिहार विधानसभा चुनावों में भर भी चुकी है। हां दिल्ली में बतौर सीएम किरन बेदी को भाजपा ने प्रोजेक्ट तो किया लेकिन कई मायनों में भाजपा से चूक भी हो गई।

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चूक इस बात की कि लोग वादों और दावों को तथ्यों के साथ प्रभावपूर्ण ढ़ंग से पेश करना वाला चाहते थे। जबकि किरन बेदी के राजनीतिक जीवन की वो महज शुरूआत भर थी। अब गर यूपी की बात की जाए तो ओबीसी के हाथों में अध्यक्ष पद देने के बाद अब पार्टी किसी सवर्ण चेहरे पर दांव लगा सकती है। जिसमें उसे दरकार होगी एक आक्रामक चेहरे की।

ऐसे में सबसे आगे योगी आदित्यनाथ का नाम चल रहा है। वे संघ की भी पसंद हैं, हालांकि प्रदेश से जुड़े नेता और मोदी खेमे के कुछ सिपहसलार नहीं चाहते कि योगी सीएम कैंडिडेट हों।

''योगी'' के साथ जुड़ा है एक बड़ा ''वोटबैंक''

वहीं इन सबके इतर भारतीय जनता पार्टी की उत्तर प्रदेश इकाई के प्रभारी ओम माथुर ने पिछले दिनों पार्टी कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा था कि उत्तर प्रदेश में पार्टी किसी को मुख्यमंत्री के चेहरे के तौर पर पेश नहीं करेगी। बल्कि सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ेगी। अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या यूपी में बीजेपी सीएम के चेहरे को ढ़क मूंद कर दांव चलेगी या फिर जल्द ही किसी नाम का ऐलान कर सियासी सरगर्मियां बढ़ाने वाली है।

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इस दौरान लोगों ने इस बात की चर्चा भी शुरू कर दी है कि भाजपा में चेहरे को लेकर अंर्तकलह की स्थिति भी बन सकती है। क्योंकि पार्टी में बतौर सीएम कैंडीडेट प्रोजेक्ट करने के लिए पंकज सिंह, वरूण गांधी, कल्याण सिंह, मनोज सिन्हा एवं योगी आदित्यनाथ हैं। जिसमें करीबन सभी के समर्थकों के लिहाज से एक बड़ा वोट बैंक जुड़ा हुआ है।

इस फेहरिस्त में योगी सबसे अधिक वोट बैंक के साथ ऊपरी पायदान पर हैं। योगी को नजरंदाज करना मतलब कि वोटबैंक से हाथ धोने जैसा ही है। इस गलती को शायद भाजपा कतई नहीं कर सकती।

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