कर्नाटक बीजेपी में येदियुरप्पा और ईश्वरप्पा आमने-सामने, होगा ये नुकसान

दरअसल ईश्वरप्पा शिमोगा सिटी से टिकट चाहते हैं लेकिन येदियुरप्पा इसके लिए तैयार नहीं हैं।

नई दिल्ली। कर्नाटक विधानसभा चुनाव से पहले राज्य के दो बड़े बीजेपी नेता आमने-सामने आ गए हैं जिस वजह से बीजेपी के लिए मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। दरअसल बीजेपी की तरफ से मुख्यमंत्री उम्मीदवार बीएस येदियुरप्पा और उनके शिष्य रहे केएस ईश्वरप्पा के बीच एक बार फिर से तनातनी की खबरें है। ये तनातनी टिकट बंटवारे को लेकर है। थोड़े दिनों पहले ही हाईकमान ने दोनों के बीच सुलह कराया था। येदियुरप्पा और ईश्वरप्पा के बीच की जंग अगर समय रहते खत्म नहीं होती है तो इसका नुकसान बीजेपी को हो सकता है।

ईश्वरप्पा के 'रायना ब्रिगेड' के नेताओं ने कर्नाटक में बीजेपी के प्रभारी मुरलीधर राव से मुलाकत की

ईश्वरप्पा के 'रायना ब्रिगेड' के नेताओं ने कर्नाटक में बीजेपी के प्रभारी मुरलीधर राव से मुलाकत की

न्यूज 18 की खबर के मुताबिक गुरुवार की रात ईश्वरप्पा के 'रायना ब्रिगेड' के नेताओं ने कर्नाटक में बीजेपी के प्रभारी मुरलीधर राव से मुलाकत की। ईश्वरप्पा के समर्थकों ने 21 टिकटों की मांग की है। जिसमें शिमोगा सिटी से ईश्वरप्पा का टिकट भी शामिल है। बैठक में मौजूद लोगों के मुताबिक बीजेपी प्रभारी से कहा गया कि ईश्वरप्पा ओबीसी के एक बड़े नेता है और उन्हें अनदेखा कर चुनाव में पार्टी को बहुत नुकसान पहुंचा सकता है।

ईश्वरप्पा शिमोगा सिटी से टिकट चाहते हैं

ईश्वरप्पा शिमोगा सिटी से टिकट चाहते हैं

दरअसल ईश्वरप्पा शिमोगा सिटी से टिकट चाहते हैं लेकिन येदियुरप्पा इसके लिए तैयार नहीं हैं। उन्होंने ईश्वरप्पा से कहा है कि वो टिकट को लेकर कोई गारंटी नहीं देंगे। टिकट को लेकर पार्टी हाई कमान का फैसला आखिरी होगा। ईश्वरप्पा को लगता है कि येदियुरप्पा इस बात का बहाना बना कर उनका टिकट काट रहे हैं कि वो पहले से ही एमएलसी हैं।

ईश्वरप्पा बीजेपी सरकार में एक ताकतवर मंत्री थे

ईश्वरप्पा बीजेपी सरकार में एक ताकतवर मंत्री थे

ईश्वरप्पा बीजेपी सरकार में एक ताकतवर मंत्री थे और कर्नाटक में दो बार पार्टी के अध्यक्ष भी बने थे। इस वक्त ईश्वरप्पा विधान परिषद में विपक्ष के नेता हैं। येदियुरप्पा और ईश्वरप्पा के रिश्तों में खटास की शुरुआत 2011 में हुई जब येदियुरप्पा ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया। ईश्वरप्पा 2013 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के खिलाफ हार गए थे। साल 2014 में जब लोकसभा चुनाव के दौरान येदियुरप्पा की बीजेपी में वापसी हुई तो ईश्वरप्पा खुश नहीं थे। साल 2016 में जब एक बार फिर येदियुरप्पा को राज्य में बीजेपी का अध्यक्ष और मुख्यमंत्री का उम्मीदवार बनाया गया तो दोनों नेताओं के बीच घाव गहरे हो गए।

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