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आर्थिक नीतियों को लेकर यशवंत सिन्हा का मोदी सरकार पर हमला, कहा- चुनाव जीतने के लिए अंधाधुंध...

पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा कल्याणकारी योजनाओं पर भारी खर्च की वजह से राजकोषीय स्थिति पर काफी बुरा असर पड़ रहा है।
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नई दिल्ली, 20 मार्च। पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा कल्याणकारी योजनाओं पर भारी खर्च की वजह से राजकोषीय स्थिति पर काफी बुरा असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि राजकोषीय घाटा असामान्य रूप से काफी ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। सिन्हा ने एक मीडिया चैनल को दिए साक्षात्कार में कहा कि यह हैरानी की बात है कि किसी को भी यह राजकोषीय घाटा दिखाई नहीं दे रहा है, खुद सरकार को भी नहीं।

Yashwant Sinha

टीएमसी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सिन्हा ने कहा, 'मोदी सरकार कल्याणकारी योजनाओं पर बड़ी रकम खर्च कर रही है, जिसमें मुफ्त भोजन योजना और बाकी सब कुछ शामिल है, लेकिन इससे वित्तीय स्थिति गड़बड़ा गई है। सरकार के अविश्वसनीय आंकड़ों के मुताबिक भी राजकोषीय घाटा असामान्य अनुपात को छू गया है।'

देश का राजकोषीय घाटा चालू वित्त वर्ष 2021-22 में जीडीपी का 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है। पहले इसके 6.8 प्रतिशत रहने का अनुमान था। सिन्हा ने आरोप लगाया कि आज सरकार की आर्थिक नीतियां इस आधार पर तय होती हैं कि क्या इनसे उसे चुनाव जीतने में मदद मिलेगी या नहीं।

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उन्होंने कहा कि एक तरफ गरीबों के लिए कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं तो दूसरी तरफ चुनिंदा कॉरपोरेट अप्रत्याशित लाभ कमा रहे हैं। यह कुछ ऐसा हो रहा है जिसे लेकर देश में किसी को भी चिंता हीं है। उन्होंने कहा कि यह मजबूत राजकोषीय नीतियों और मजबूत आर्थिक नीतियों के बीच स्पष्ट रूप से असंतुलन की स्थिति है और यही आज की सच्चाई है।

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था को मुद्रास्फीति और वृद्धि की चुनौतियों से जूझना होगा। चालू वित्त वर्ष में एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 8.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो कि पहले से अनुमानित सरकारी आंकड़े 9.2% की तुलना में कम है। मोदी सरकार के बड़े आलोचक रहे सिन्हा ने कहा कि आज अर्थव्यवस्था को सरकार के साथ-साथ निजी क्षेत्र के निवेश की जरूरत है जो कि होता नहीं दिख रहा है। सरकार निवेश नहीं बढ़ा रही है, इसके अलावा निजी निवेश भी कमजोर है। सिन्हा ने कहा कि ब्याद दरों में बढ़ोत्तरी की वजह से निवेश कमजोर है। निवेश के अभाव में भारतीय अर्थव्यवस्था प्रगति नहीं कर पाएगी। भारतीय अर्थव्यवस्था पर रूस-यूक्रेन युद्ध के प्रभाव को लेकर उन्होंने कहा कि हमारी अर्थव्यवस्था काफी हद तक कच्चे तेल के आयात पर टिकी है। ऐसे में मुद्रास्फीती के मोर्चे पर अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी।

बता दें कि खुदरा मुद्रास्फीति फरवरी में 6.07% के साथ आठ माह के उच्च स्तर पर पहुंच गई है, जो लगातार दूसरे महीने रिजर्व बैंक के संतोषजनक स्तर से अधिक है। जबकि थोक मूल्य आधारित मुद्रास्फीति कच्चे तेल और गैर-खाद्य वस्तुओं की कीमतों के सख्त होने के कारण बढ़कर 13.11% हो गई। गौरतलब है कि शयवंत सिन्हा पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में मंत्रिमंडल में शामिल थे, लेकिन शीर्ष नेतृत्व से मतभेद के बाद उन्होंने साल 2018 में भाजपा से किनारा कर लिया था।

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English summary
Yashwant Sinha targeted Modi government regarding economic policies
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