Wrestling Row: पहलवानों का दावा, प्रदर्शन में पानी, गद्दे और स्पीकर पर ₹ 5 लाख तक खर्च हुए
Wrestling का पूरा विवाद बृजभूषण सिंह पर FIR के आदेश के बाद और गंभीर होता दिख रहा है। पहलवानों का दावा है कि प्रदर्शन में पानी, गद्दे और स्पीकर पर ₹ 5 लाख तक खर्च हुए हैं।

Wrestling Row: कुश्ती फेडरेशन के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे पहलवानों ने दावा किया है कि गद्दे पर ₹ 5 लाख से ₹ 50 हजार रुपये खर्च हुए हैं। ऑडियो पर ₹ 60 हजार रुपये खर्च किए गए हैं। पांच दिनों में पहलवानों ने पांच लाख तक खर्च किए हैं।
पानी और खाने के अलावा गद्दे, चादर, पंखे, स्पीकर जैसे सामानों की व्यवस्था पर पांच लाख रुपये से अधिक खर्च किए हैं। इससे साफ है कि इंसाफ की मांग के साथ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे पहलवानों की 'सिस्टम' से लड़ाई 'महंगी' साबित हो रही है।
पानी और गद्दे जैसी बुनियादी जरूरतों पर जेब से पैसे देने पड़ रहे हैं। पहलवानों को ये खर्च भारी पड़ रहा है। साक्षी मलिक और विनेश फोगट सहित कई पहलवान धरना स्थल पर डटे हैं।
आर्थिक दवाब के बावजूद, जंतर-मंतर पर पहलवानों का विरोध लंबा चलेगा, इसके संकेत मिल रहे हैं। भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह की गिरफ्तारी की मांग कर रहे पहलवानों ने यौन उत्पीड़न के आरोप और धमकी मामले में तत्काल एक्शन की अपील की है।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के बारे में समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार गत पांच दिनों में, पहलवानों को गद्दे, चादरें, पंखे, स्पीकर और माइक्रोफोन समेत पानी और भोजन के अलावा एक मिनी पावर जेन-सेट पर पांच लाख रुपये से अधिक खर्च करना पड़ा है।
शुरू में, उन्होंने गद्दे, चादरें और साउंड सिस्टम किराए पर लिए। एक दिन के लिए 27 हजार रुपये खर्च हुए। जल्द ही उन्होंने महसूस किया कि अगर उन्हें लंबे समय तक बैठना पड़ा तो छोटी-छोटी चीजों की व्यवस्था बड़ा वित्तीय बोझ बन जाएगा।
विनेश फोगट के पति सोमवीर राठी के हवाले से समाचार एजेंसी पीटीआई-भाषा की रिपोर्ट के अनुसार, पहलवानों ने गद्दे खरीदने का फैसला लिया। सोमवीर ने खुद अपने गांव खरखौदा से 50,000 रुपये देकर 80 गद्दे खरीदे।
उन्होंने बताया, 'किराए पर प्रतिदिन 12,000 रुपये चार्ज किए जा रहे थे, जो बहुत बड़ी रकम है।' उन्होंने कहा, "शुरुआत में, हमने स्पीकर और माइक्रोफोन किराए पर लिए थे, लेकिन एक दिन की लागत ₹ 12,000 बहुत अधिक थी।"
बकौल सोमवीर, अब हमने चांदनी चौक बाजार से ₹ 60,000 में अपना साउंड सिस्टम खरीदा है। उन्होंने कहा, "दुकानदार अच्छा था। वह जानता था कि एथलीट सड़क पर हैं इसलिए उसने हमें बिना लाभ के साउंड सिस्टम दिया।"
सोमवीर ने बताया, पंखे और जनरेटर जैसे कुछ सामान अभी भी किराए पर हैं। दोनों के लिए एक दिन में लगभग ₹ 10,000 रुपये का भुगतान करना पड़ता है। उन्होंने कहा, "अगर जरूरत पड़ी तो हम कूलर खरीद लेंगे। बाहर बहुत गर्मी है।
गौरतलब है कि ओलंपियन साक्षी मलिक और बजरंग पूनिया समेत विनेश फोगाट जैसे पहलवान विरोध-प्रदर्शन के प्रमुख का चेहरा हैं। सोमवीर, उनके दोस्त योगेश (भारत केसरी) और कई अन्य लोग विरोध जारी रखने के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं।
उन्होंने बताया, हम अपने साथ दो लाख रुपये नकद लाए थे। अब तक लगभग 5-6 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। हमने आपस में काम बांट लिया है। कुछ कोच भोजन की क्वालिटी पर ध्यान दे रहे हैं। युवा पहलवान भोजन पहुंचाते हैं। एक व्यक्ति पानी की निर्बाध आपूर्ति करता है।
दूसरा स्वच्छता का ध्यान रखता है। बकौल सोमवीर, "सुरक्षाकर्मी भी कभी-कभी हमारी मदद करते हैं।" प्रदर्शन समाप्त होने के बाद खरीदी गई इन सब चीज़ों का क्या करेंगे? इस सवाल पर उन्होंने कहा, "हम सब कुछ या तो गुरुद्वारे या मंदिर में बांट देंगे।
वहां गद्दे, स्पीकर और अन्य सामानों का अच्छा उपयोग किया जा सकता है।" हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, सोमवीर को हरियाणा के अखाड़ों के नेताओं को समझाने की कोशिश करते देखा गया कि वे पहलवानों को जंतर-मंतर न भेजें क्योंकि बड़ी भीड़ को संभालना एक चुनौती होगी।
कुछ पहलवानों के माता-पिता 50 किलो दूध लेकर आए थे। दुर्भाग्य से भीषण गर्मी के कारण लगभग 20 किलो बर्बाद हो गया। हम लोगों से सिर्फ सहयोग मांग रहे हैं। उन्होंने कहा, "गुरुवार को रोहतक में एक बैठक थी।
हरियाणा के 100 'अखाड़ों' में से लगभग 80 उनके समर्थन के लिए आने को तैयार हैं। क्या उन्हें किसी राजनीतिक दल या प्रभावशाली लोगों से आर्थिक मदद नहीं मिल रही है जो उनका समर्थन करते हैं?
इस सवाल पर सोमवीर बताते हैं, "अगर ऐसा होता, तो हमारे सिर पर एक वाटरप्रूफ शेड होता और कुछ अच्छी सुविधाएं होतीं, लेकिन हम कम से कम प्रबंधन कर रहे हैं।" विनेश, साक्षी और बजरंग के परिवार खर्च चला रहे हैं।
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उन्होंने कहा, "आज की तरह हम किसी से भी मदद नहीं ले रहे हैं। हम अपने आप से प्रबंधन कर रहे हैं और बहुत सावधानी से पैसा खर्च कर रहे हैं। सभी लोग आ रहे हैं और अपने भोजन की व्यवस्था कर रहे हैं।"












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