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विश्व के सबसे खतरनाक ज्वालामुखी में कभी भी हो सकता है विस्फोट, बहुत ही डरावना है इसका इतिहास

नई दिल्ली, 20 मई: दुनिया के सबसे खतरनाक ज्वालामुखी के फिर से फटने का समय नजदीक आ चुका है। यह किसी भी दिन या आने वाले समय में कभी भी हो सकता है। ज्वालामुखी पर रिसर्च करने वाले भू-वैज्ञानिकों ने यह अनुमान ज्वालामुखी विस्फोट के कम से के 22,000 वर्षों के इतिहास की छानबीन के आधार पर लगाया है। सबसे बड़ी बात ये है कि प्रशांत महासागर के तट पर स्थित जिस इलाके में यह खतरा है, वहां पास में ही एक बहुत ही घनी आबादी वाला जापानी शहर भी है।

ज्वालामुखी फटने का पूर्वानुमान लगाना मुश्किल

ज्वालामुखी फटने का पूर्वानुमान लगाना मुश्किल

भूकंप की तरह ज्वालामुखी के फटने का पूर्वानुमान लगाना भी बहुत मुश्किल है, जबकि इसमें हुआ विस्फोट कभी भी भयानक तबाही ला सकता है। कई ज्वालामुखी तो हजारों-हजारों साल तक शांत पड़े रहते हैं। लेकिन, अचानक वह सक्रिय हो जाते हैं और उसका परिणाम बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण होता रहा है। ज्वालामुखी फटने की अनेकों खतरनाक घटनाएं लिखित रूप से इतिहास में दर्ज हैं, जिनमें से 79 ई. में इटली के माउंट वेसुवियस में हुआ ज्वालामुखी विस्फोट बहुत ही कुख्यात है। माना जाता है कि उस समय इसकी चपेट में आकर 15,000 लोगों की जान चली गई थी। जब यह फटा तो पोम्पेई समेत आसपास की बस्तियों में गैस और पिघली हुई चट्टानों ने सबकुछ खत्म कर दिया था। लेकिन, शोधकर्ताओं के मुताबिक यह सबसे खतरनाक ज्वालामुखी नहीं है।

दुनिया का सबसे खतरनाक ज्वालामुखी दरअसल जापान में

दुनिया का सबसे खतरनाक ज्वालामुखी दरअसल जापान में

लेकिन, इन दो हजार वर्षों में मानव ने विज्ञान के क्षेत्र में काफी तरक्की की है और आज वैज्ञानिक इतना अनुमान लगाने की कोशिश जरूर करने लगे हैं कि किस ज्वालामुखी के फटने की आशंका है। इसकी सहायता से नुकसान को कम किया जा सकता है। लेकिन, समय को लेकर अभी भी पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता कि कौन सा ज्वालामुखी कब फट जाएगा। वास्तविकता ये भी है कि आज भी ज्वालामुखी प्रकृति के सबसे खौफनाक स्वरूपों में से एक हैं, जिसपर बहुत ही बारीकी निगरानी रखने की आवश्यकता पड़ती है। मिरर में छपी एक रिपोर्ट में 24/7 Wall St. के विश्लेषकों के हवाले से कहा गया है कि दुनिया का सबसे खतरनाक ज्वालामुखी दरअसल जापान में है। कंपनी ने नेशनल म्यूजियम ऑफ नैचुरल हिस्ट्री के ग्लोबल वोकैनिज्म प्रोग्राम से आंकड़े जुटाकर और उनकी तुलना करके ज्वालामुखी की रैंकिंग की है।

क्यूशू द्वीप का एयरा दुनिया का सबसे खतरनाक ज्वालामुख-कुण्ड

क्यूशू द्वीप का एयरा दुनिया का सबसे खतरनाक ज्वालामुख-कुण्ड

विश्लेषकों का निष्कर्ष ये रहा है कि जापान के क्यूशू द्वीप के एयरा (Aira) दुनिया का सबसे खतरनाक ज्वालामुख-कुण्ड है। यह कड़ाहीनुमा आकार ज्वालामुखी विस्फोट के तुरंत बाद बनता है। एयरा क्यूशू द्वीप के दक्षिण में स्थित 25 किलोमीटर चौड़ा गड्ढा है, जिसके बारे में माना जाता है कि यह करीब 22,000 साल पहले बना था। यह 'रिंग ऑफ फायर' का हिस्सा है, जो प्रशांत महासागर के किनारे से सटे इलाके में ज्वालामुखियों की एक पूरी श्रृंखला है।

सबसे खतरनाक ज्वालामुखी क्यों है एयरा ?

सबसे खतरनाक ज्वालामुखी क्यों है एयरा ?

अब इस विश्लेषण के सबसे भयावह आशंका पर गौर करने की बात है। इसी ज्वालामुखी के बगल में जापान का काहोशिमा शहर है, जिसकी आबादी 10 लाख के करीब है। विश्लेषकों ने कुछ निश्चित मानदंडों के आधार पर दुनिया के सबसे खतरनाक ज्वालामुखियों की एक लिस्ट तैयार की है। ये मानदंड हैं- जिसमें कम से कम एक बड़ा विस्फोट हुआ हो, कई बार बड़े विस्फोट हो चुके हों, जो विस्फोट बहुत ही घातक रहा हो, ज्वालामुखी की सक्रियता या महत्वपूर्ण रूप से लावा का बहाव कितना रहा। सबसे खतरनाक ज्वालामुखियों की जो लिस्ट बनाई गई है, उनमें से उन्हें ही शामिल किया गया है, जो ऊपर के कम से कम तीन मानदंडों को पूरा करते हैं। लेकिन, 24/7 Wall St.ने एयरा को विश्व का सबसे खतरनाक ज्वालामुखी माना है, क्योंकि यह इन सारे मानदंडों को पूरा करता है।

एयरा में कई बार हो चुका है घातक विस्फोट

एयरा में कई बार हो चुका है घातक विस्फोट

इसके साथ ही ज्वालामुखी विस्फोट की विस्फोटकता को मापने के लिए ज्वालामुखी विस्फोट सूचकांक (वीईआई) का उपयोग किया गया। इसके तहत गैर-विस्फोटक ज्वालामुखी के लिए जीरो रेंज रखा गया और बहुत विशाल विस्फोट के लिए आठ। मसलन, 79 ई. में इटली में जो ज्वालामुखी फटा था, इस आधार पर उसका वीईआई पांच था। लेकिन, एयरा का वीईआई अलग-अलग समय पर भिन्न पाया गया। उदाहरण के लिए साल 8050 ईसवी पूर्व में हुए इसके विस्फोट का वीईआई 6 था। नेशनल म्यूजियम ऑफ नैचुरल हिस्ट्री के ग्लोबल वोकैनिज्म प्रोग्राम के मुताबिक यह रेडियोकार्बन की जांच से मापा गया है। सबसे हाल में इसमें जो अक्टूबर 1955 में विस्फोट हुआ, उसका वीईआई तीन रहा। लेकिन, एयरा के ज्वालामुख-कुण्ड के अंदर जो दक्षिणी रिम में सकुराजिमा में 1914 में जो स्ट्रैटोवोकैनो फटा था, वह काफी घातक था। उसमें 58 लोगों की मौत हो गई थी और आसपास भारी नुकसान हुआ था। क्योंकि, सतह के नीचे से मैग्मा खिसकने से जमीन धंस गई थी।

सबसे खतरनाक ज्वालामुखी में कभी भी हो सकता है विस्फोट

सबसे खतरनाक ज्वालामुखी में कभी भी हो सकता है विस्फोट

2016 में ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने पाया था कि एयरा के ज्वालामुख-कुण्ड के नीचे मैग्मा के निर्माण होने के परिणामस्वरूप सकुराजिमा में और भी विशाल ज्वालामुखी विस्फोट हो सकता है, जिसके परिणाम बहुत ही भयावह हो सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 'सिस्टम को मैग्मा की सप्लाई सकुराजिमा ज्वालामुखी में हुए विस्फोट से ज्यादा तेज गति से हो रही है।' इसकी वजह से सतह के नीचे मैग्मा जमा हो रहा है और जमीन मोटी होती जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक सालाना 14 मिलियन क्यूबिक मीटर मैग्मा की सप्लाई हो रही है, जो कि बहुत ही बड़े विस्फोट का संकेत है। रिसर्च के मुताबिक 1914 का घातक विस्फोट मात्रा में 1.5 घन किलोमीटर था। उस हिसाब से उसी आकार के विस्फोट के लिए मैग्मा इकट्ठा होने में तब से 130 साल लग सकते हैं। यानी भयानक ज्वालामुखी विस्फोट का समय बहुत ही नजदीक हो सकता है। यह कभी भी या कुछ वर्षों में हो सकता है (तस्वीरें- प्रतीकात्मक)

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