World Environment Day: हॉफ सेंचुरी मारता तापमान, मौसम का बदलता मिजाज, क्या है ये खतरे की घंटी?
नई दिल्ली, 05 जून। इस साल भयंकर गर्मी ने सभी को बेहाल कर दिया है, तापमान 50 डिग्री तक पहुंच चुका है। कभी अचानक से बरसात तो कभी तपती हुई गर्मी और आए दिन समुद्रों में आने वाले तूफान और चक्रवातों से हम इंसान ही नहीं बल्कि सम वैज्ञानिक भी हैरान हैं और ये उनके लिए भी एक पहेली बनता जा रहा है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दुनिया में हीट वेव की रफ्तार 30 गुना बढ़ गई है। आखिर ये सब क्या किसी आने वाले बड़े खतरे की घंटी है? इसका जवाब विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जानिए पर्यावरणविद और जलवायु विशेषज्ञ डॉ सीमा जावेद से। वनइंडिया को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में डॉ सीमा जावेद ने बदलते मौसम के ही बारे में नहीं बल्कि प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग को लेकर भी बड़ी बातें बताई जिसको जानना हर किसी को बहुत जरूरी है।
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ये आखिरी मौका है दुनिया को बचाने का
डॉ सीमा जावेद ने कहा इंटरनेशल पैनल ऑफ क्लाइमेंट चेंज की हालिया रिपोर्ट ने हमें अगाह किया है पिछले 2000 सालों में पृथ्वी अब सबसे गर्म हो चुकी है इसके पीछे ग्रीन हाउसों का उर्सजन है। ये इतनी हद तक बढ़ चुका है कि हमारे विनाश होने का खतरा उत्पन्न हो चुका है। ये दुनिया के लिए खतरे की घंटी है और ये आखिरी मौका है दुनिया को बचाने का। अगर हम 2030 तक इस उत्सर्जन को आधा कर देते हैं और 2050 तक इसे हम जीरो तक ले जाते हैं यानी कार्बन को शून्य तक ले जाते हैं जब संभव है कि हम इस धरती को बचा सकेंगे।

वरना हमारा विनाश तय है
डॉ सीमा जावेद ने कहा अगर ऐसा नहीं किया तो जो हमने पेरिस समझौते में जो लक्ष्य तय किया था 1.5 का ग्लोबल वार्मिंग से ऊपर नहीं जाने का वो वादा नहीं निभा पाएंगे क्योंकि भारत वर्तमान समय में 1.1 डिग्री ग्लोबल वार्मिंग तक पहुंच चुका हैं। अगर हम आने वाले 8 सालों में उर्सजन को आधा कर लिया तो बचेंगे वरना हमारा विनाश तय है। ये यूएन ने पूरी दुनिया को अच्छी तरह से समझा दिया है कि अब मौका नहीं बचा है।

कार्बन उत्सर्जन इतनी तेजी से बढ़ा कि पृथ्वी गर्म हो गई है
डॉ सीमा जावेद ने कहा अब जो ग्रीन हाउस उत्सर्जन हो रहा है वो मानवजनित कारणों से है यानी हमने विकास की तेज दौड़ में हमने कार्बन उर्जजन किया है। पिछले 150 सालों से हमने कार्बन का इतनी तेजी से उत्सर्जन किया कि पृथ्वी बहुत गर्म हो गई। अब जो विनाश हो रहा है वो इंसानी गतिविधियों की वजह से हो रहा है और विनाश की कगार पर धरती ही नहीं इंसान खुद भी है। यानी धरती ही नहीं रहेगी तो हम भी नहीं रहेंगे डायनासोर की तरह हमारा भी सफाया हो जाएगा। अब इस पार या उस पार की लड़ाई है ये ।

हीट वेव की रफ्तार 30 गुना बढ़ गई है
डॉ सीमा जावेद ने बताया इस बार मार्च अप्रैल में भयानक तपिश पड़ी भारत में रिपोर्ट में ये कहा दुनिया में हीट वेव यानी लू की आने की रफ्तार 30 गुना बढ़ गई है। सामान्य इंसान जो ऑफिस नहीं सड़क पर बाहर काम करता है वो नहीं बच पाएगा।

तापमान बढ़ने के हैं ये महत्वपूर्ण कारण
डॉ सीमा जावेद ने कहा इसके साथ ही गर्मी बढ़ने के अन्य कारण हैं जिसमें पहला समुद्र का तापमान बढ़ रहा है क्योंकि समुद्र धरती की बड़ी मात्रा में उष्मा अपने में सोख रहा है इसलिए समुद्र अम्लीय हो रहा है। इससे समुद्र के जीव जन्तु है उनके सेल नहीं बन रहे। इसके अलावा समुद्र में चक्रवात और तूफान भी आ रहे हैं इसका भी कारण जलवायु परिवर्तन है। तीसरा असर हमारी उत्पादकता पर असर पड़ रहा है। हीट वेव के कारण भारत जैसा गेंहू का निर्यात करने वाले भारत देश को ये निर्यात रोकना पड़ा क्योंकि देश की जनसंख्या की जरूरत को सरकार को पूरा करना है। यूएन की रिपोर्ट के अनुसार पूरी दुनिया में हीट वेव के कारण गेंहू की उत्पादकता में 10 प्रतिशत की कमी आई है।

धरती ही नहीं समुद्र से मिलने वाला भोजन भी कम हो रहा है
हमारी खाद्य समाग्रियों के उत्पादन पर भी क्लाइमेट चेंज का असर पड़ रहा। समुद्र के अंदर जीव जन्तु मर रहे हैं समुद्र के जीव जन्तु जिनको खाया जाता है वो भी कम हो रहे हैं ।यानी धरती से जो हमें भोजन मिलता था वो भी कम हो रहा है और समुद्र से मिलने वाला भोजन भी कम हो रहा है।












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