वो पांच महिलाएं, जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट में लड़ी तीन तलाक की लड़ाई
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक पर अपना फैला सुना दिया। पांच जजों की संवैधानिक पीठ में से 3 जजों ने तीन तलाक को जहां असंवैधानिक बताया है वहीं 2 जजों ने कहा कि इस पर संसद को कानून बनाना चाहिए। हालांकि 5 से 3 जजों की ओर से तीन तलाक की प्रक्रिया को आज से ही खत्म हो गया। सुप्रीम कोर्ट की ओर से तीन तलाक पर यह फैसला आने के बाद आज उन महिलाओं के लिए बड़ी खुशी का दिन है जिन्होंने इस कुप्रथा के खिलाफ लड़ने की शुरआत की थी।
तो आइए आपको उन महिलाओं के बारे में बताते हैं जिन्होंने यह ठान लिया कि भले उनके पति ने उनकी जिन्दगी बर्बाद कर दी लेकिन अब वो आगे की पीढ़ी की जिन्दगी को बर्बाद नहीं होंगे देंगी।
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शायरा बानो का केस
उत्तराखंड के अल्मोड़ा की रहने वाली शायरा बानो ने तीन तलाक को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। बानो ने तीन तलाक, निकाह हलाला और कई शादिया करने की प्रथा को भी असंवैधानिक घोषित किए जाने की मांग की थी। बानो ने मुस्लिम पर्सनल लॉ की धारा 2 की सवैधानिकता को भी चुनौती दी थी। बानो की शादी दहेज की मांग के चलते टूट गई थी और उनके पति ने उन्हें तीन बार तलाक दे दिया था।

आफऱीन को उनके पति ने स्पीड पोस्ट से तलाकनामा भेज दिया
राजस्थान के जयपुर की रहने वाली आफऱीन को उनके पति ने स्पीड पोस्ट से तलाकनामा भेज दिया था। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में तीन तलाक को चुनौती दी। 25 वर्षीय आफरीन की शादी साल 2014 में एक शादी की वेबसाइट के जरिए हुई थी। आफरीन ने बताया था कि शादी के कुछ दिनों बाद ही उनके ससुराल वालों ने दहेज के लिए परेशान करना शुरू कर दिया। जिसके बाद मैं अपने घर आ गई। अपने घर आने के बाद मुझे मेरे पति ने स्पीडपोस्ट से तलाक भेज दिया।

सहारनपुर की आतिया ने कहा था...
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर निवासी आतिया को उनके शौहर ने कागज पर तीन तलाक लिखकर उनसे रिश्ता खत्म कर लिया था। जिसके बाद वो सुप्रीम कोर्ट गईं और वहां अपने हक की लड़ाई लड़ी। बता दें कि इसी साल मार्च में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में आतिया और उनके परिवार ने यह ऐलान तक कर दिया था कि उन्होंने तीन तलाक के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी को वोट दिया है। सहारनपुर के मंडी कोतवाली के मोहल्ला आली की चुंगी की रहने वाली आतिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी तीन तलाक खत्म करने की अपील की थी।

पश्चिम बंगाल के हावड़ा की इशरत
पश्चिम बंगाल के हावड़ा की इशरत जहां ने भी तीन तलाक की इस कुप्रथा के खिलाफ लड़ाई लड़ी है। उन्हें उनके पति ने दुबई से ही फोन पर तलाक दे दिया था। अपनी याचिका में इशरत ने कोर्ट में कहा था कि उनका निकाह साल 2001 में हुआ था और उनके बच्चे भी हैं। बच्चों को उसके पति ने जबरदस्ती अपने पास रखे हैं।

यूपी की गुलशन परवीन
यूपी के ही रामपुर में रहने वाली गुलशन परवीन उनके पति ने दस रुपये के स्टांप पेपर पर तीन तलाकनामा भेज दिया था। गुलशन की 2013 में शादी हुई थी और उसका दो साल का बेटा भी है।












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