तो इसलिए अपने मंत्रियों की जासूसी करा रहे हैं नरेंद्र मोदी
नई दिल्ली। फर्स्टपोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक मोदी यूपीए राज की तरह घोटालों और भ्रष्टाचार का पाप अपने और अपनी सरकार के सिर पर नहीं रखना चाहते हैं। इसके लिए वह अजित डोवाल की मदद से अपने ही मंत्रियों पर नजर रख रहे हैं।

मोदी के 'जेम्स बांड' अजित डोवाल
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार यानी एनएसए अजित डोवाल को लोगों ने 'जेम्स बांड' का टाइटल दिया है। टाइटल से अलग अब डोवाल वाकई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए जेम्स बांड की तर्ज पर काम करते नजर आने वाले हैं।
यूपीए को उसके राज में हुए लाखों करोड़ों के घोटालों का खामियाजा लोकसभा चुनावों में भुगतना पड़ा है।नरेंद्र मोदी ने बतौर प्रधानमंत्री अब यूपीए के उस 'इतिहास' से सबक लेते हुए भ्रष्टाचार और घोटालों पर लगाम लगाने की कमर कस ली है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नहीं चाहते हैं कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की तरह उन पर भी कुछ न कर पाने का इल्जाम लगाया जाए। वह सभी तरीकों का प्रयोग कर रहे हैं जिसके बाद वह अपने सभी मंत्रियों को गलत काम करने से रोक सकें।
मोदी और मंत्रियों की जासूसी
- मोदी ने अपने सभी 44 मंत्रियों पर हर तरह से करीबी नजर रखने के लिए निर्देश दे दिए हैं।
- मोदी ने सभी मंत्रालयों में अपने सबसे विश्वासपात्र ब्यूरोक्रेट्स की नियुक्ति की हुई है।
- ऐसे मंत्रालय जहां पर घोटालों की संभावना सबसे ज्यादा है वहां पर मोदी सबसे ज्यादा एतियाहात बरत रहे हैं।
- अजित डोवाल नरेंद्र मोदी के लिए सबसे बड़े हथियार के तौर पर सामने आए हैं।
- सूत्रों के मुताबिक डोवाल के निर्देशों के बिना मंत्रियों पर नजर रख पाना और कई तरह की तकनीकों का प्रयोग कर पाना असंभव है।
- कुछ मंत्रियों ने तो उनकी कार की सफाई तक के लिए प्रोफेशनल्स को हायर किया हुआ है।
- इन प्रोफेशनल्स की मदद से कार में इंस्टॉल किसी भी तरह की बगिंग डिवाइस को हटाया जाता है।
धर्मेंद्र प्रधान
- केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान मोदी के जांच के घेरे में रहने वाले मंत्रियों में से एक है।
- प्रधान के कार्यालय के बाहर दो सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया गया है।
- यह सुरक्षा कर्मी हर उस व्यक्ति पर कड़ी नजर रखते हैं, तो प्रधान से मिलने के लिए आता है।
- प्रधान के पास जो मंत्रालय है वहां पर घोटाले की संभावना सबसे ज्यादा है।
- प्रधान का सिर्फ एक फैसला सरकार के लिए मुसीबत बन सकता है।
- प्रधान को मोदी ने पहले 100 दिनों के पूरे होने के मौके पर प्रेस कांफ्रेंस करने की मंजूरी नहीं दी थी।
पीयूष गोयल
- पीयूष गोयल के पास तीन मंत्रालय हैं जिसमें कोयला और ऊर्जा के अलावा एक और मंत्रालय शामिल है।
- गोयल भी मोदी की तेज नजरों से बच नहीं सके हैं।
- गोयल पर नजर रखने के लिए मोदी ने गुजरात कैडर के एक ब्यूरोक्रेट को ऊर्जा मंत्रालय में तैनात किया है।
- यह ब्यूरोक्रेट उन सभी फैसलों पर कड़ी नजर रखता है जो कोयला और ऊर्जा मंत्रालय से संबधित होते हैं।
- इस ब्यूरोक्रेट की मदद से मोदी की नजर गोयल के मंत्रालयों से जुड़े हर फैसलों और हर बड़े कदम पर रहती है।
अरुण जेटली
- अरुण जेटली के पास वित्त मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय के अलावा एक और अहम विभाग है।
- मोदी ने जेटली के लिए भी एक गुजरात कैडर के अधिकारी हसमुंख अधिया को वित्त मंत्रालय में नियुक्त किया है।
- वर्ष 1981 के बैच के इस आईएएस अधिकारी को हाल ही में वित्त मंत्रालय के वित्त सेवाओं से जुड़े विभाग में सचिव नियुक्त किया गया है।
- कहते हैं कि आधिया कुछ हद तक वित्त मंत्रालय में मोदी की आंख और कान हैं।
- इसके अलावा पीएमओ की ओर से भी वित्त मंत्रालय पर कुछ नियंत्रण है।
- पीएमओ हर उस मसले पर अपनी नजर रखता है जो निजी क्षेत्र के बैंकों की लाखों करोड़ों के एनपीए से जुड़े होते हैं।












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