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Winter Session: कांग्रेस सांसद Manish Tewari चुनाव सुधारों पर बोले - 'आयोग को SIR का अधिकार नहीं'

Winter Session Manish Tewari Speech: लोकसभा में चुनाव सुधार पर मंगलवार को चर्चा की शुरुआत कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने की। उन्होंने इस दौरान एसआईआर (SIR) प्रक्रिया पर सवाल दागे। कांग्रेस सांसद ने चुनाव से पहले खातों में पैसे भेजने वाली स्कीम पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि अगर यही चलन रहा, तो ऐसे चुनाव नतीजे आएंगे जब आप जीतते रहेंगे और हम हारेंगे। तिवारी ने इस दौरान यह भी कहा कि आज चुनाव आयोग के पास वोटर लिस्ट संशोधन (SIR) का अधिकार नहीं है।

लोकसभा में चुनाव सुधार पर शुरू हुई बहस के दौरान कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर ही सवाल उठाया। उन्होंने दावा किया कि ईवीएम की विश्वसनीयता पर आज देश का हर नागरिक सवाल कर रहा है।

Winter Session Manish Tewari Speech

Manish Tewari Speech: कैश ट्रांसफर पर उठाए सवाल

चुनाव से पहले मतदाताओं को सीधे पैसे भेजे जाने की योजनाओं पर कड़ा सवाल उठाते हुए तिवारी ने कहा कि यह लोकतांत्रिक प्रणाली के लिए खतरनाक है। अगर ऐसा ही होता रहा तो यह परंपरा बन जाएगी और आप जीतते रहेंगे हम हारते रहेंगे। कांग्रेस सांसद ने कहा कि संसद को एक सीमा तय करनी चाहिए कि जिन राज्यों का कर्ज-से-जीडीपी अनुपात 20% से अधिक है, वे किसी भी प्रकार का कैश ट्रांसफर न करें। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो देश का वित्तीय ढांचा डगमगा सकता है।

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'Election Commission की विश्वसनीयता खतरे में'

चंडीगढ़ से कांग्रेस सांसद ने कहा कि लोकतंत्र के मुख्य स्तंभ 98 करोड़ मतदाता और राजनीतिक दल हैं। इसके बीच निष्पक्ष अंपायर की जरूरत को देखते हुए चुनाव आयोग का गठन किया गया था। आज उसी संस्था की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं, जिन्हें दूर करने के लिए व्यापक सुधार जरूरी हैं।

मनीष तिवारी ने कहा, 'देश के नागरिकों के मन में यह शंका लगातार बनी हुई है कि क्या ईवीएम में छेड़छाड़ संभव है। इस संदेह को दूर करने के लिए दो विकल्प हैं। एक कि 100% वीवीपैट मिलान हो या फिर पेपर बैलट की वापसी की जाए। उन्होंने पूछा कि ईवीएम का सोर्स कोड किसके पास है? चुनाव आयोग के पास या मशीन बनाने वाली कंपनियों के पास? यह जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।'

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SIR की वैधता पर कांग्रेस सांसद ने सवाल उठाए

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने आरोप लगाया कि कई राज्यों में एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) कराया जा रहा है, जबकि संविधान या कानून में इसका कोई स्पष्ट जिक्र नहीं है। आयोग के पास इस प्रक्रिया को कराने का अधिकार नहीं है। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग इसे सेक्शन 21 से जोड़ता है, लेकिन वह सिर्फ मतदाता सूची की त्रुटियां सुधारने से संबंधित है। कांग्रेस सांसद ने मांग की कि सरकार यह बताए कि किन निर्वाचन क्षेत्रों में, किस वजह से एसआईआर किया गया। साथ ही हर क्षेत्र की खामियों की सूची सदन पटल पर रखी जानी चाहिए।

तिवारी ने कहा कि 2023 में बनाया गया कानून संशोधित करने की जरूरत है। चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति समिति में सरकार और विपक्ष से दो-दो सदस्य होने चाहिए और मुख्य न्यायाधीश को भी शामिल किया जाना चाहिए। इससे चुनाव आयोग की विश्वसनीयता बढ़ेगी और "खेला होबे" नहीं बल्कि सही खेल होगा।

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